कुरुक्षेत्र, 11 जून। डेमोक्रेटिक मेडिकल एसोसिएशन (डीएमए इंडिया) ने कुरुक्षेत्र अस्पताल प्रकरण को लेकर हरियाणा राज्य महिला आयोग की पूर्व अध्यक्षा रेणु भाटिया द्वारा दिए गए बयानों पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। संगठन का कहना है कि इस मामले में केवल नर्सिंग समुदाय को जिम्मेदार ठहराना न तो न्यायसंगत है और न ही तथ्यात्मक रूप से उचित।
डीएमए इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अमित व्यास, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. भानु कुमार, राष्ट्रीय महासचिव डॉ. शुभ प्रताप सोलंकी तथा महाराष्ट्र टीम के कोर सदस्य डॉ. प्रांजल निबुदे ने इस संबंध में एक आधिकारिक पत्र जारी कर निष्पक्ष एवं व्यापक जांच की मांग की है।
केवल नर्सिंग स्टाफ पर जिम्मेदारी डालना उचित नहीं
डीएमए का मानना है कि किसी भी गंभीर अस्पताल घटना की जांच केवल एक वर्ग तक सीमित नहीं होनी चाहिए। संगठन के अनुसार इस मामले में संस्थागत, प्रशासनिक और व्यवस्थागत कमियों की पर्याप्त समीक्षा किए बिना केवल नर्सिंग स्टाफ को दोषी ठहराना न्याय के मूल सिद्धांतों के विपरीत है।
संगठन ने कहा कि निष्पक्ष जांच तभी संभव है जब सभी संबंधित पक्षों, विभागों और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की समान रूप से जांच की जाए।
चिकित्सा नैतिकता और संस्थागत जवाबदेही का सवाल
डीएमए ने स्पष्ट किया कि चिकित्सा नैतिकता और अस्पतालों की मानक कार्यप्रणाली के अनुसार किसी महिला मरीज की जांच या उपचार के दौरान महिला स्टाफ की उपस्थिति एक महत्वपूर्ण सुरक्षा व्यवस्था मानी जाती है।
ऐसे प्रोटोकॉल तैयार करना, उनका पालन सुनिश्चित करना और उनकी निगरानी करना केवल नर्सिंग कर्मचारियों की जिम्मेदारी नहीं होती, बल्कि अस्पताल प्रशासन, विभागीय नेतृत्व और संबंधित चिकित्सा अधिकारियों की भी सामूहिक जिम्मेदारी होती है।
संगठन का कहना है कि यदि इन व्यवस्थाओं में कोई कमी रही है तो उसकी जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए।
स्टाफ की कमी और कार्यभार भी जांच का हिस्सा बने
डीएमए ने देशभर के सरकारी और निजी अस्पतालों में लंबे समय से चली आ रही स्टाफ की कमी, मानव संसाधनों की कमी और अत्यधिक कार्यभार की समस्या को भी प्रमुख कारण बताया।
संगठन के अनुसार सीमित संसाधनों और भारी कार्यभार के बीच काम कर रहे नर्सिंग कर्मियों पर एकतरफा दोषारोपण करना समस्या के वास्तविक कारणों से ध्यान भटकाने जैसा है।
डीएमए ने मांग की कि जांच के दौरान अस्पताल में उपलब्ध स्टाफ, कार्य परिस्थितियों और संसाधनों की स्थिति का भी मूल्यांकन किया जाए।
भर्ती प्रक्रिया और प्रशासनिक जिम्मेदारी पर उठे सवाल
डीएमए ने कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न भी उठाए हैं:
- क्या संबंधित व्यक्ति का निर्धारित नियमों के अनुसार बैकग्राउंड वेरिफिकेशन किया गया था?
- यदि संबंधित व्यक्ति के खिलाफ पहले कोई शिकायत या चिंता थी तो उसे नियुक्ति या पुनर्नियुक्ति क्यों दी गई?
- भर्ती प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों और अस्पताल प्रशासन की जवाबदेही तय करने पर चर्चा क्यों नहीं हो रही?
संगठन का कहना है कि इन सवालों के जवाब दिए बिना किसी एक वर्ग को जिम्मेदार ठहराना निष्पक्ष जांच की भावना के अनुरूप नहीं है।
नर्सिंग समुदाय की गरिमा और मनोबल का मुद्दा
डीएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अमित व्यास ने कहा कि नर्सिंग समुदाय देश की स्वास्थ्य व्यवस्था की आधारशिला है। किसी एक घटना के आधार पर पूरे नर्सिंग वर्ग को कटघरे में खड़ा करना उनके मनोबल को प्रभावित कर सकता है।
उन्होंने कहा कि देशभर में लाखों नर्सिंग कर्मी कठिन परिस्थितियों में मरीजों की सेवा कर रहे हैं और उनके योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
डीएमए की प्रमुख मांग
डीएमए ने सरकार और संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि कुरुक्षेत्र अस्पताल मामले की जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और व्यापक स्तर पर की जाए। जांच में न केवल व्यक्तिगत जिम्मेदारियों बल्कि प्रशासनिक, संस्थागत और व्यवस्थागत कमियों की भी समीक्षा की जाए ताकि वास्तविक तथ्य सामने आ सकें और स्वास्थ्य व्यवस्था में जनता का विश्वास बना रहे।
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