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Corporate Hospitals Revenue Target: डॉक्टरों पर Revenue Targets थोपने के खिलाफ DMA India का बड़ा कदम, NHRC से Suo Motu जांच की मांग

Byadmin

Aug 3, 2026
Corporate Hospitals Revenue

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देशभर के कॉर्पोरेट अस्पतालों (Corporate Hospitals) में डॉक्टरों पर Revenue Generation Targets और व्यावसायिक प्रदर्शन (Commercial Performance) के लक्ष्य थोपे जाने के आरोपों को लेकर डेमोक्रेटिक मेडिकल एसोसिएशन (DMA India) ने बड़ा कदम उठाया है। संगठन ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) को विस्तृत प्रतिनिधित्व भेजकर इस मामले में Suo Motu Cognizance (स्वतः संज्ञान) लेने तथा स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

DMA India का कहना है कि डॉक्टरों के चिकित्सकीय निर्णय मरीज के सर्वोत्तम हित में होने चाहिए, न कि किसी वित्तीय लक्ष्य या प्रबंधन के दबाव में।

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DMA India ने NHRC को भेजा विस्तृत प्रतिनिधित्व

DMA India द्वारा भेजे गए इस प्रतिनिधित्व को संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अमित व्यास, राष्ट्रीय महासचिव डॉ. शुभ प्रताप सोलंकी तथा महाराष्ट्र के कोर सदस्य डॉ. प्रांजल निबुधे के संयुक्त प्रयासों से तैयार किया गया है।

संगठन ने बताया कि डॉ. प्रांजल निबुधे द्वारा इस विषय पर पहले से राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के समक्ष प्रस्तुत शिकायत का DMA India ने पूर्ण समर्थन किया है और अब इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया गया है।

“चिकित्सा सेवा को व्यापार नहीं बनाया जा सकता” – डॉ. अमित व्यास

DMA India के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अमित व्यास ने कहा कि—

“चिकित्सा सेवा को केवल राजस्व कमाने का माध्यम बनाना चिकित्सा नैतिकता के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। डॉक्टरों के सभी चिकित्सकीय निर्णय मरीज के सर्वोत्तम हित में होने चाहिए, किसी Revenue Target के दबाव में नहीं।”

उन्होंने कहा कि यदि डॉक्टरों पर आर्थिक लक्ष्य थोपे जाते हैं तो इसका सीधा असर मरीजों के सुरक्षित, निष्पक्ष और साक्ष्य-आधारित उपचार के अधिकार पर पड़ सकता है।

“Revenue Targets डॉक्टरों की Professional Autonomy पर हमला” – डॉ. शुभ प्रताप सोलंकी

DMA India के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. शुभ प्रताप सोलंकी ने कहा कि—

“डॉक्टरों पर Revenue Targets थोपना उनकी Professional Autonomy पर सीधा आघात है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं में जनता का विश्वास कमजोर हो सकता है और चिकित्सा व्यवस्था का मानवीय स्वरूप प्रभावित होता है।”

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में व्यावसायिक दबाव की जगह चिकित्सा नैतिकता को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

“यह केवल डॉक्टरों का नहीं, हर मरीज का मुद्दा” – डॉ. प्रांजल निबुधे

DMA India के महाराष्ट्र कोर सदस्य डॉ. प्रांजल निबुधे ने कहा कि—

“यह केवल डॉक्टरों का नहीं बल्कि देश के प्रत्येक मरीज के अधिकारों और पूरी चिकित्सा व्यवस्था की विश्वसनीयता का प्रश्न है।”

उन्होंने उम्मीद जताई कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग इस गंभीर विषय पर प्रभावी हस्तक्षेप करेगा।

DMA India की प्रमुख मांगें

DMA India ने NHRC से निम्नलिखित मांगें की हैं—

  • इस पूरे मामले में Suo Motu Cognizance लिया जाए।
  • देशभर के कॉर्पोरेट अस्पतालों में डॉक्टरों पर लगाए जा रहे Revenue Targets की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए।
  • संबंधित मंत्रालयों, राज्य सरकारों और स्वास्थ्य नियामक संस्थाओं से विस्तृत रिपोर्ट तलब की जाए।
  • डॉक्टरों की Professional Autonomy और मरीजों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
  • चिकित्सा नैतिकता में हस्तक्षेप करने वाली जबरन राजस्व आधारित नीतियों पर रोक लगाने हेतु आवश्यक सिफारिशें की जाएं।

DMA India का स्पष्ट संदेश

DMA India ने अपने प्रतिनिधित्व में कहा कि—

“चिकित्सा सेवा कोई व्यापार नहीं, बल्कि मानवता की सेवा है। डॉक्टरों का मूल्यांकन उनके द्वारा अर्जित राजस्व से नहीं, बल्कि मरीजों को प्रदान की गई गुणवत्तापूर्ण, नैतिक एवं साक्ष्य-आधारित चिकित्सा सेवा के आधार पर होना चाहिए।”

संगठन ने यह भी कहा कि यदि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग इस मामले में जांच या अन्य कार्रवाई शुरू करता है तो DMA India हर स्तर पर पूर्ण सहयोग देगा।

क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?

यदि डॉक्टरों पर इलाज के साथ-साथ आर्थिक लक्ष्य पूरे करने का दबाव बनाया जाता है, तो इससे चिकित्सा निर्णयों की निष्पक्षता, मरीजों का विश्वास और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। यही कारण है कि DMA India ने इस विषय को केवल डॉक्टरों का नहीं, बल्कि देश के हर मरीज के अधिकारों और चिकित्सा व्यवस्था की पारदर्शिता से जुड़ा मुद्दा बताया है।

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