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हरियाणा के मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी संकट, DMA India ने सरकार को चेताया

Byadmin

Aug 11, 2026
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हरियाणा मेडिकल कॉलेजों

रोहतक/चंडीगढ़, 11 अगस्त 2026। हरियाणा के सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की कमी का मुद्दा अब गंभीर होता जा रहा है। डेमोक्रेटिक मेडिकल एसोसिएशन (DMA India) ने प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में वर्षों से लंबित नियमित फैकल्टी भर्ती, बड़ी संख्या में रिक्त पदों और संविदा फैकल्टी के साथ सेवा संबंधी असमानता को लेकर हरियाणा सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

DMA India के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अमित व्यास ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, स्वास्थ्य मंत्री कुमारी आरती राव और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) को इस संबंध में विस्तृत ज्ञापन भेजा है। संगठन का कहना है कि यदि जल्द नियमित भर्ती और फैकल्टी के लिए बेहतर सेवा शर्तें सुनिश्चित नहीं की गईं, तो इसका सीधा असर मेडिकल शिक्षा, विशेषज्ञ डॉक्टरों के प्रशिक्षण और मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है।

हरियाणा मेडिकल कॉलेजों

चार वर्षों से नियमित फैकल्टी भर्ती नहीं होने का दावा

DMA India के अनुसार, DMER और UHS रोहतक के अंतर्गत पिछले करीब चार वर्षों से नियमित फैकल्टी भर्ती नहीं हुई है। संगठन का दावा है कि भर्ती प्रक्रिया में देरी के कारण प्रदेश के कई सरकारी मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की कमी लगातार बढ़ती गई है।

ज्ञापन में कहा गया है कि वर्ष 2022 में शुरू हुई भर्ती प्रक्रिया अक्टूबर 2023 में पूरी हुई। इस देरी के दौरान कई योग्य MD/MS विशेषज्ञ निजी संस्थानों और दूसरे राज्यों की ओर चले गए।

संगठन के मुताबिक, इसका सबसे बड़ा असर उन सरकारी मेडिकल कॉलेजों पर पड़ा है जहां मेडिकल शिक्षा के साथ-साथ बड़ी संख्या में मरीजों का इलाज भी किया जाता है।

करीब 750 संविदा पदों के मुकाबले सीमित आवेदन चिंता का विषय

DMA India ने हालिया संविदा भर्ती प्रक्रिया का भी मुद्दा उठाया है। संगठन के अनुसार करीब 750 पदों के मुकाबले केवल 70–80 पदों के भरने की संभावना है।

एसोसिएशन का कहना है कि इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि डॉक्टर संविदा नियुक्तियों में पर्याप्त रुचि नहीं दिखा रहे हैं। इसके पीछे कम वेतन, नौकरी की सुरक्षा का अभाव और भविष्य को लेकर अनिश्चितता जैसे कारण बताए गए हैं।

DMA India का मानना है कि केवल संविदा नियुक्तियों के माध्यम से लंबे समय तक मेडिकल कॉलेजों की फैकल्टी जरूरतों को पूरा करना व्यावहारिक समाधान नहीं है।

कई सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 30 से 40% तक फैकल्टी की कमी

DMA India ने प्रदेश के अलग-अलग मेडिकल संस्थानों में फैकल्टी की स्थिति को लेकर भी चिंता जताई है।

संगठन के अनुसार:

  • PGIMS रोहतक, KCGMC करनाल, BPS खानपुर और मेवात जैसे संस्थानों में लगभग 30–40% तक फैकल्टी पदों की कमी है।
  • SABV मेडिकल कॉलेज, छायसा (फरीदाबाद) में लगभग 70% फैकल्टी पद रिक्त बताए गए हैं।
  • भिवानी, कोरियावास (नारनौल) और कुटेल मेडिकल यूनिवर्सिटी, करनाल में स्थायी फैकल्टी की स्थिति बेहद कमजोर बताई गई है।

अगर ये आंकड़े लंबे समय तक बने रहते हैं, तो मेडिकल कॉलेजों की शैक्षणिक और क्लिनिकल क्षमता पर दबाव बढ़ सकता है।

फैकल्टी संकट का MBBS और PG छात्रों की पढ़ाई पर असर

मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी केवल पढ़ाई तक सीमित भूमिका नहीं निभाती। प्रोफेसर और विशेषज्ञ डॉक्टर छात्रों की क्लिनिकल ट्रेनिंग, रिसर्च, परीक्षा, थीसिस और मरीजों के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

DMA India ने आशंका जताई है कि फैकल्टी की लगातार कमी के कारण:

  • MBBS और PG छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है।
  • छात्रों के क्लिनिकल प्रशिक्षण की गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है।
  • थीसिस और रिसर्च कार्यों में कठिनाई बढ़ सकती है।
  • अनुभवी विशेषज्ञों की कमी से जटिल मरीजों के इलाज पर असर पड़ सकता है।
  • सुपर-स्पेशियलिटी सेवाओं को पर्याप्त विशेषज्ञ उपलब्ध कराने में चुनौती आ सकती है।
  • NMC के निर्धारित फैकल्टी मानकों को पूरा करना मुश्किल हो सकता है।
  • भविष्य में MBBS और PG सीटों के विस्तार की योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं।

संगठन ने यह भी कहा है कि सरकार द्वारा विशेषज्ञ डॉक्टर तैयार करने पर किया गया निवेश तब दूसरे राज्यों और निजी संस्थानों को फायदा पहुंचा सकता है, जब प्रशिक्षित विशेषज्ञ बेहतर अवसरों की तलाश में सरकारी संस्थानों से बाहर चले जाते हैं।

संविदा फैकल्टी के साथ समान व्यवहार की मांग

DMA India ने नियमित भर्ती के साथ-साथ संविदा फैकल्टी की सेवा शर्तों में सुधार की भी मांग की है।

संगठन का कहना है कि जब तक नियमित भर्ती नहीं होती, तब तक संविदा आधार पर काम कर रहे डॉक्टरों को सम्मानजनक सेवा सुरक्षा और उचित सुविधाएं मिलनी चाहिए।

इसके लिए संगठन ने “समान कार्य के लिए समान वेतन” के सिद्धांत को लागू करने की मांग की है।

DMA India की सरकार से 8 प्रमुख मांगें

DMA India ने हरियाणा सरकार के सामने कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं:

1. नियमित फैकल्टी भर्ती

DMER और UHS रोहतक के अंतर्गत सभी स्वीकृत फैकल्टी पदों पर तत्काल और नियमित भर्ती शुरू की जाए तथा इसके लिए निश्चित समय-सीमा तय हो।

2. समान कार्य के लिए समान वेतन

नियमित और संविदा फैकल्टी के बीच वेतन संबंधी असमानता को दूर किया जाए।

3. संविदा फैकल्टी को सेवा लाभ

नियमित भर्ती होने तक संविदा फैकल्टी को नियमित फैकल्टी के समान आवश्यक सेवा लाभ दिए जाएं।

4. सामाजिक सुरक्षा

संविदा डॉक्टरों को PF, पेंशन, ग्रेच्युटी, बीमा और अन्य सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं का लाभ दिया जाए।

5. छुट्टियों की सुविधा

अर्जित अवकाश, मेडिकल लीव, मातृत्व/पितृत्व अवकाश, अकादमिक लीव और वेकेशन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

6. पारदर्शी प्रमोशन नीति

फैकल्टी के लिए पारदर्शी पदोन्नति और करियर प्रोग्रेशन की नीति लागू की जाए।

7. समान अकादमिक अवसर

अकादमिक, परीक्षा, शोध और प्रशासनिक कार्यों में संविदा फैकल्टी को भी समान अवसर दिए जाएं।

8. समयबद्ध नियमित नियुक्तियां

मेरिट आधारित नियमित नियुक्तियों की प्रक्रिया को समयबद्ध बनाया जाए और संविदा फैकल्टी के अधिकारों तथा सेवा सुरक्षा की स्पष्ट गारंटी दी जाए।

डॉ. अमित व्यास ने सरकार से तत्काल कदम उठाने की अपील की

DMA India के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अमित व्यास ने कहा कि किसी भी सरकारी मेडिकल कॉलेज की सबसे महत्वपूर्ण ताकत उसकी मजबूत और पर्याप्त फैकल्टी होती है।

उनके अनुसार, यदि सरकार समय रहते नियमित भर्ती, सेवा सुरक्षा और बेहतर कार्य परिस्थितियां उपलब्ध नहीं कराती है, तो इसका असर केवल डॉक्टरों पर नहीं बल्कि मेडिकल छात्रों की शिक्षा, विशेषज्ञ डॉक्टरों के प्रशिक्षण और आम मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ेगा।

DMA India ने मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री, NMC और DMER हरियाणा से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। संगठन ने सभी रिक्त फैकल्टी पदों को भरने और संविदा फैकल्टी को सम्मानजनक सेवा सुरक्षा एवं समान अधिकार देने की मांग दोहराई है।

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