रोहतक, 31 जुलाई 2026: महान क्रांतिकारी शहीद-ए-आजम उधम सिंह के बलिदान दिवस पर हरियाणा दलित एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण एसोसिएशन द्वारा भारत रत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर भवन, नेहरू कॉलोनी, रोहतक में श्रद्धांजलि एवं पौधारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शहीद उधम सिंह के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उनके अद्वितीय बलिदान को नमन किया गया। साथ ही पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए पौधारोपण भी किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. अनिल मेहरा ने की। उन्होंने कहा कि शहीद उधम सिंह केवल एक स्वतंत्रता सेनानी नहीं, बल्कि साहस, राष्ट्रभक्ति और न्याय के जीवंत प्रतीक हैं। उनका जीवन आज भी देश के युवाओं को राष्ट्रसेवा और देशभक्ति की प्रेरणा देता है।
मुख्य बातें
- रोहतक में शहीद उधम सिंह के बलिदान दिवस पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित।
- पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया।
- शहीद उधम सिंह के नाम पर विश्वविद्यालय स्थापित करने की मांग।
- 26 दिसंबर को राजपत्रित अवकाश पुनः बहाल करने की अपील।
- सामाजिक कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों ने बड़ी संख्या में लिया भाग।
शहीदों की विरासत को संजोना हर नागरिक का कर्तव्य : डॉ. अनिल मेहरा
अपने संबोधन में डॉ. अनिल मेहरा ने कहा कि शहीद उधम सिंह का जीवन देशभक्ति, साहस और त्याग का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1919 में हुए जलियांवाला बाग हत्याकांड ने पूरे देश को झकझोर दिया था। इस नरसंहार का बदला लेने के लिए उधम सिंह ने वर्षों तक इंतजार किया और अंततः लंदन में ब्रिटिश शासन के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कर भारतीय स्वाभिमान का परिचय दिया।
उन्होंने कहा कि 31 जुलाई 1940 को ब्रिटेन की पेंटनविल जेल में उन्हें फांसी दे दी गई, लेकिन उनका बलिदान आज भी हर भारतीय के लिए प्रेरणा का स्रोत है। ऐसे महान स्वतंत्रता सेनानियों की गाथा को नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।
सरकार से की गई ये प्रमुख मांगें
डॉ. अनिल मेहरा ने राज्य और केंद्र सरकार से मांग करते हुए कहा कि—
- शहीद उधम सिंह के सम्मान में उनके नाम पर एक विश्वविद्यालय की स्थापना की जाए।
- उनके जन्म दिवस 26 दिसंबर पर पहले की तरह राजपत्रित अवकाश पुनः घोषित किया जाए।
- स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में उनके जीवन और बलिदान पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएं ताकि युवाओं में राष्ट्रभक्ति की भावना और मजबूत हो।
उन्होंने कहा कि यदि देश अपने शहीदों का सम्मान करेगा तो आने वाली पीढ़ियां भी उनके आदर्शों पर चलने के लिए प्रेरित होंगी।
पौधारोपण के साथ दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पौधारोपण किया गया। एसोसिएशन के प्रांतीय महासचिव श्रीकिशन मुण्डे ने कहा कि प्रत्येक पौधा शहीदों के प्रति श्रद्धांजलि के साथ-साथ प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी का भी प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के दौर में पौधारोपण केवल एक अभियान नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की आवश्यकता है। उन्होंने सभी नागरिकों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने का आह्वान किया।
देशभक्ति और सामाजिक चेतना का संदेश
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता और पर्यावरण संरक्षण की भावना को मजबूत करते हैं। शहीदों का सम्मान केवल शब्दों से नहीं, बल्कि उनके आदर्शों को जीवन में अपनाकर किया जा सकता है।
उन्होंने युवाओं से नशामुक्त, शिक्षित और जागरूक समाज के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का भी आह्वान किया।
बड़ी संख्या में लोग रहे उपस्थित
इस अवसर पर बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी और संस्था के सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से श्रीकिशन मुण्डे, डॉ. फूल कुमार, वजीर सिंह मोरिया, सुशील कुमार, पवन, अजय कुमार, मान सिंह, पवन सूतवाल, मुकेश सिंहमार, शकुंतला, राकेश प्रजापत, ऋषिराज निनानिया, हरीश सोहल, नवल सिंह, कुलदीप राठी, कालू सिकरी, राजीव सतवाल, सागर मुराल, सत्यवान राठी, जशवीर अहलावत, सुरेंद्र रंगा, नसीब सिंधु, निवास कन्हेली, तरुणा, पूजा, श्वेता, सरिता, राजेश, सौरभ, विकास, हिना, नवीन, रामचरण, योगेश, राहुल, लोकेश, मंजू सिवाच और आरती सहित अनेक गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
शहीद उधम सिंह कौन थे?
शहीद उधम सिंह भारत के महान स्वतंत्रता सेनानियों में से एक थे। उन्होंने 13 मार्च 1940 को लंदन के कैक्सटन हॉल में माइकल ओ’ड्वायर की गोली मारकर हत्या की थी। ओ’ड्वायर को 1919 के जलियांवाला बाग हत्याकांड के लिए जिम्मेदार माना जाता था। इस घटना के बाद उधम सिंह को गिरफ्तार कर मुकदमा चलाया गया और 31 जुलाई 1940 को पेंटनविल जेल में फांसी दे दी गई। उनका बलिदान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में अमर है।
निष्कर्ष
रोहतक में आयोजित यह श्रद्धांजलि कार्यक्रम केवल शहीद उधम सिंह को याद करने का अवसर नहीं था, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक जागरूकता और राष्ट्रभक्ति का संदेश देने का भी माध्यम बना। पौधारोपण, श्रद्धांजलि और विश्वविद्यालय की मांग जैसे कदम यह दर्शाते हैं कि समाज आज भी अपने महान शहीदों के आदर्शों को जीवित रखना चाहता है। आयोजकों ने सभी नागरिकों से शहीदों की विरासत को संजोने और उनके बताए मार्ग पर चलने का आह्वान किया।

