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14 साल के मासूम ने 6 लोगो के जीवन में किया उजाला:कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल

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May 25, 2026
14 साल के मासूम

 

  • दादी को सांत्वना देते हुए खुद कुलपति डॉ अग्रवाल की आंखें भी हुईं नम
  • झज्जर के मासूम को श्रद्धांजलि देने उमड़ा रोहतक शहर

रोहतक, 24 मई 2026। जब एक पिता अपने बच्चे को गोद में खिलाता है तो उसकी खुशी का ठिकाना नहीं होता। उसकी तोतली बोली, उसकी किलकारी, उसका नन्हा सा हाथ पकड़कर चलना… यही तो एक बाप की दुनिया होती है। लेकिन जब उसी बाप के सामने उसका कलेजा, उसका मासूम बेटा सफेद चादर में लिपटा पड़ा हो, तो उस लम्हे को शब्दों में बांधना नामुमकिन है। उस दर्द को सहना तो दूर, सोचते ही कलेजा मुंह को आ जाता है, रूह कांप जाती है, सांसें थम सी जाती हैं। यह कहना है पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ एच के अग्रवाल का। वे रविवार को ट्रॉमा सेंटर में अंगदान कर रहे 14 साल के मासूम ब्रेन स्टेम डेथ हो चुके बच्चे के परिजनों से मिलने पहुंचे थे।

डॉ एच के अग्रवाल ने कहा कि झज्जर जिले के बादली क्षेत्र के एक गांव के इस परिवार ने इस असहनीय दर्द को पीकर जो फैसला लिया, उसने इंसानियत को जिंदा कर दिया। अपने आंसुओं का घूंट पीकर, अपने जिगर के टुकड़े को विदा करते हुए, उन्होंने 6 अनजान लोगों की झोली में जिंदगी डाल दी। परिवार का यह कर्ज समाज सात जन्मों में भी नहीं उतार पाएगा।

डॉ अग्रवाल परिवार को ढांडस बंधा रहे थे लेकिन जब उन्होंने करीब 70 साल की दादी को पोते के शव से लिपटकर रोते हुए देखा, तो वो भी खुद को रोक नहीं पाए, ओर डॉ अग्रवाल की आंखें भी नम हो गईं।

दादी को सांत्वना देते वक्त छलक पड़े कुलपति के आंसू

चिकित्सकों के सामने मरीज की मृत्यु होना आम बात होती लेकिन रविवार को आईसीयू के बाहर का मंजर देखकर पत्थर भी पिघल जाए। पिता बस एक ही बात दोहरा रहे थे, मेरे बेटे उठ जा… देख तेरा पापा आया है… तूने कहा था पापा मैं देश सेवा करूंगा और आज देश के काम आ गया। चिकित्सक हो या नर्स हो या कोई टेक्नीशियन या कोई बियरर सभी की आंखें मासूम की कुर्बानी पर भरी हुई थी।

कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल पिता और दादी के आंसू देख खुद को नहीं रोक पाए। गाड़ी में दादी को सांत्वना देते हुए खुद के आंसू नहीं रोक पाए और रुंधे गले से बोले, “मां जी, आपका बेटा कहीं नहीं गया। आज उसने 6 लोगों को नया जीवन देकर सबसे बड़ा धर्म निभाया है। आपके आंसू मत बहाओ मां, आपका पोता तो भगवान बन गया।

यह कहते-कहते खुद डॉ. अग्रवाल की आंखें नम हो गईं। गला रुंध गया। वहां खड़े डॉक्टर, नर्स, गार्ड… किसी की आंख सूखी नहीं थी। एक पिता, एक डॉक्टर, एक कुलपति… उस दोपहर डॉ. अग्रवाल सिर्फ एक इंसान थे, जो दूसरे इंसान का दर्द महसूस कर रहा था। उन्होंने दादी के सिर पर हाथ फेरा और कहा कि मां, आज से हर वो सांस जो आपके पोते के अंगों से चलेगी, वो आपके पोते का आशीर्वाद होगी।

एक हादसा, जिसने हंसता-खेलता घर उजाड़ दिया

20 मई को जब 14 साल के बचे को पीजीआईएमएस के ट्रॉमा सेंटर लाया गया तो उसकी सांसें उखड़ रही थीं। आईसीयू इंचार्ज डॉ. तरुण यादव और उनकी टीम टूट पड़ी। सिर की चोट के साथ-साथ किडनी में भी काफी समस्या थी।

डॉ तरुण ने बताया कि नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. अंकुर गोयल के साथ मिलकर उन्होंने एक टीम की तरह जब मरीज ट्रॉमा आईसीयू में भर्ती हुआ था तो गंभीर सिर की चोट के साथ उसकी किडनी फेल हो रही थी। पीजीआई के ट्रांसप्लांट प्रभारी डॉ अंकुर ने कहा कि डॉ. तरुण यादव, निश्चेतना विशेषज्ञ और उनके द्वारा समय पर किए गए उपचार से दो दिन के भीतर ही मरीज की किडनी की कार्यप्रणाली चमत्कारिक रूप से सुधर गई और सामान्य हो गई।
किडनी ठीक हुई तो लगा शायद चमत्कार हो जाए, लेकिन 22 मई की सुबह 9 बजे न्यूरोसर्जरी विभाग के डॉ. अमरनाथ, डॉ तरुण ओर डॉ महिपाल की टीम ने चिकित्सा अधीक्षक डॉ कुंदन मित्तल के नेतृत्व में बनी कमेटी ने जांच में पाया कि बच्चा अब ब्रेन स्टेम डेड है।

‘मेरा बेटा मरा नहीं, वो तो 6 घरों में जिंदा है’
यह सुनते ही पिता के पैरों तेले से जमीन हिल गई, आंखें पथरा गईं। डॉक्टर साहब, कुछ तो करो… मेरा एक ही बेटा है… उनकी आवाज में जिंदगी भर का दर्द था, लेकिन डॉ भी परिवार का दर्द देख ग़म में दे लेकिन वे चाहकर भी ब्रेन स्टेम डेथ मरीज को ठीक नहीं कर सकते थे। ऐसे में परिवार ने इस दुख की घड़ी में दूसरों के परिवार के आंसू पूछने का साहसिक फैसला लिया।
सोटो हरियाणा की टीम के नोडल अधिकारी डॉ सुखबीर सिंह, ट्रांसपोर्ट कोऑर्डिनेटर रोहित, दीप्ति ओर मीडिया सलाहकार राजेश कुमार ने परिवार को अंगदान का महत्व बताया और समाज के लिए नेक कार्य करने की सलाह दी।
आखिर में आंसू पोंछते हुए पिता ने कुलपति डॉ अग्रवाल को कहा कि मेरे बेटे की वजह से अगर किसी की मांग का सिंदूर बच जाए, किसी की कोख उजड़ने से बच जाए, तो इससे बड़ा पुण्य क्या होगा। मेरा बेटा मरकर भी अमर हो जाएगा।

डॉ. अग्रवाल बोले- “6 जिंदगियां रोशन करेगा मासूम”
कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल ने मीडिया से बात की। उनकी आवाज अब भी भारी थी। परिवार का कर्ज समाज कभी नहीं उतार पाएगा। जिस दर्द से ये गुजरे हैं, उसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। और उसी दर्द में इन्होंने जो हिम्मत दिखाई, वो हरियाणा ही नहीं, पूरे हिंदुस्तान के लिए मिसाल है। जब एक पिता अपने जवान बेटे की अर्थी को कंधा देने से पहले दूसरों के बेटों की फिक्र करता है, तो वो इंसान नहीं रहता, फरिश्ता बन जाता है।

उन्होंने बताया कि इस मासूम के अंगदान से 6 लोगों को नया जीवन मिलेगा। 2 किडनी पीजीआईएमएस के ही दो मरीजों को लगेंगी। 2 कॉर्निया से दो लोगों को आंखों की रोशनी मिलेगी। लिवर को दिल्ली आईएलबीएस भेजा गया है, जहां स्प्लिट लिवर तकनीक से उसे 2 मरीजों में लगाया जाएगा। यानी एक लिवर, दो जिंदगियां।
डॉ अग्रवाल ने कहा कि 14 साल का बच्चा हमें सिखा गया कि जिंदगी की लंबाई मायने नहीं रखती, गहराई रखती है।

बॉक्स : पीजीआईएमएस को मिली दो किडनियां
डॉ तरुण ओर डॉ अंकुर ने कहा कि अंगदाता की दोनों किडनियों को पीजीआईएमएस रोहतक में दो जरूरतमंद मरीजों में सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित किया गया, जो संस्थान के अंगदान और प्रत्यारोपण कार्यक्रम की एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

‘डॉ. तरुण और सोटो टीम ने रचा इतिहास’
डॉ. अग्रवाल ने कहा कि आईसीयू के इंचार्ज डॉ. तरुण और सोटो हरियाणा की टीम ने वो कर दिखाया जो शब्दों से परे है। डॉ. तरुण ने न सिर्फ मरीज की किडनी बचाई, बल्कि मां-बाप को टूटने से भी बचाया। रात-रात भर जागकर उन्होंने मरीज को बचाने का भरसक प्रयास किया। अगर किडनी रिकवर न होती, तो दो परिवार आज भी अंधेरे में होते।
हरियाणा ने दो महीनों में यह पीजीआई का पांचवा सफल अंगदान करवा कर एक रिकॉर्ड बनाया है। माननीय मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ओर माननीय स्वास्थ्य मंत्री आरती राव जी के साथ हमारा भी सपना है कि हरियाणा अंगदान में देश में अग्रणीय राज्य बने। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने भी मन की बात में कहा है कि अंगदान, महादान है और उनकी प्रेरणा से हरियाणा में अंगदान में तेजी आयी है।
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निदेशक बोले- यह यज्ञ है, आहुति है
निदेशक डॉ. एस.के. सिंघल का गला भी रुंधा हुआ था। उन्होंने कहा कि यह दान नहीं है साहब, यह यज्ञ है। और इस यज्ञ में एक मां-बाप ने ब्रेन स्टेम डेथ हो चुके अपने कलेजे के टुकड़े की आहुति देकर हरियाणा को अंगदान के लिए जगाया है। डॉ सिंघल ने कहा कि 6 परिवारों को जीवन देने के लिए, हम सब इस परिवार के आगे शीश झुकाते हैं। पार्थिव शरीर को फूलों के साथ सैकड़ों लोगों ओर विद्यार्थियों ने पूरे सम्मान के साथ विदा किया।
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डॉ. कुंदन मित्तल: अंग अलॉट व कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के लिए पूरी रात जागी टीम ’
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कुंदन मित्तल ने बताया कि ब्रेन डेड कमेटी में निश्चेतन विभाग से डॉ. तरुण, सर्जरी विभाग से डॉ. महिपाल और न्यूरोसर्जरी विभाग से डॉ. अमरनाथ थे। कमेटी ने करीब 6 घंटे के अंतराल पर दो बार सभी टेस्ट किए। एप्निया टेस्ट, ब्रेन स्टेम रिफ्लेक्स टेस्ट के बाद ही ब्रेन डेड घोषित किया गया। डॉ कुंदन मित्तल ने बताया कि अंग अलॉट करने की प्रक्रिया करीब सारी रात चली ओर सुबह 6 बजे से रोहतक पुलिस ने ग्रीन कॉरिडोर बनाने की तैयारी शुरू कर दी थी।

21 गार्डों की सलामी, रुला देने वाला मंजर
डॉ तरुण ने बताया कि जब 14 साल के मासूम का पार्थिव शरीर ट्रॉमा सेंटर से बाहर निकला, तो 21 गार्ड सावधान की मुद्रा में खड़े थे। सम्मान के साथ सलामी देकर श्रद्धांजलि दी गई। उस वक्त ऐसा लग रहा था मानो आसमान भी रो रहा हो। डॉक्टर, नर्स, वार्ड बॉय… सबकी आंखें नम थीं। स्ट्रेचर को एम्बुलेंस तक ले जाते वक्त पूरा ट्रॉमा सेंटर सन्नाटे में था। सिर्फ सिसकियों की आवाज थी।

सोटो के नोडल अधिकारी डॉ. सुखबीर सिंह ने बताया कि झज्जर, रोहतक और दिल्ली पुलिस ने मिलकर ग्रीन कॉरिडोर बनाया। 70 किमी सिर्फ 48 मिनट में। झज्जर पुलिस ने एडीजीपी आईपीएस तनुश्री के नेतृत्व में सारी रात जागकर कानूनी कार्रवाई पूरी करके दी। सबको पता था, एक-एक मिनट की कीमत है।
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बाप की आखिरी अपील: ‘अंधविश्वास मत पालो’
एम्बुलेंस में बैठने से पहले पिता ने कांपती आवाज में कहा कि मैं हाथ जोड़कर कहता हूं… ये मौत तो सबको आनी है। पर जाते-जाते अगर किसी की मांग का सिंदूर, किसी की मां की कोख, किसी का सुहाग बचा सको… तो इससे बड़ा धर्म नहीं। मेरे बेटे ने कर दिखाया। अब आपकी बारी है। ब्रेन डेड होने पर अंगदान का निर्णय लें और दूसरों को इसके लिए प्रेरित करें।
दादी ने जाते-जाते बस इतना कहा कि मेरा राजा बेटा… अब वो 6 घरों का राजा बनेगा।

टजनसंपर्क विभाग के इंचार्ज डॉ वरुण अरोड़ा ने कहा कि 14 साल का मासूम चला गया पर जाते-जाते वो हम सबके लिए एक सवाल छोड़ गया कि अगर कल तुम्हारे सामने ये मौका आए, तो तुम क्या करोगे?
अंगदान करें। क्योंकि ऐसे परिवार जैसे फरिश्ते रोज नहीं आते।
परिवार का कर्ज तो हम नहीं उतार सकते। पर अंगदान का संकल्प लेकर, हम उसे सच्ची श्रद्धांजलि जरूर दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि वे एलपीएस बोर्सड के एमडी राजेश जैन ओर उनके परिवार का आभार व्यक्त करते हैं जो हमेशा लोगों की सेवा के लिए हमेशा आगे नजर आते हैं। इस अवसर पर डॉ सुखबीर सिंह, डॉ लव शर्मा, डॉ जितेंद्र जाखड़, डॉ पंकज छिक्कारा, डॉ योगेश, डॉ अंकुर, डॉ विवेक ठाकुर, डॉ गौरव, दीप्ति, राजेश भड़, रोहित, संजय कादयान, टिओ दिलबाग सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।

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