Resident Doctors Leave Policy को लेकर डेमोक्रेटिक मेडिकल एसोसिएशन (DMA India) ने देशभर के मेडिकल कॉलेजों और स्वास्थ्य संस्थानों को स्पष्ट संदेश दिया है कि रेजिडेंट डॉक्टरों के अवकाश और अधिकारों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। संगठन ने कहा कि यदि किसी संस्थान द्वारा Resident Doctors Rights का उल्लंघन किया जाता है या निर्धारित अवकाश रोके जाते हैं, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

Resident Doctors Leave Policy पर डीएमए की राष्ट्रीय मुहिम
DMA India ने देशभर के रेजिडेंट डॉक्टरों के हितों की रक्षा के लिए अभियान शुरू किया है। संगठन की मांग है कि सभी मेडिकल कॉलेजों में 48 घंटे साप्ताहिक कार्य सीमा लागू की जाए और डॉक्टरों को पर्याप्त साप्ताहिक, वार्षिक तथा आकस्मिक अवकाश प्रदान किए जाएं। डीएमए का कहना है कि बेहतर कार्य परिस्थितियां न केवल डॉक्टरों के लिए बल्कि मरीजों की सुरक्षा के लिए भी आवश्यक हैं।
Rohtak Model Leave Policy को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने की मांग
पंडित बी.डी. शर्मा यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज़, रोहतक द्वारा 5 फरवरी 2025 को जारी आदेश के अनुसार MD, MS और MDS रेजिडेंट डॉक्टरों को वर्ष के 52 रविवारों में से केवल 10 रविवार कार्य करना होगा। इसके बदले उन्हें 10 अतिरिक्त अवकाश दिए जाएंगे, जिन्हें वे एक साथ लेकर अपने परिवार के साथ समय बिता सकेंगे। साथ ही NMC दिशानिर्देशों के अनुरूप 20 आकस्मिक अवकाश का भी प्रावधान किया गया है।
डीएमए ने इस Rohtak Model Leave Policy को देश के सभी मेडिकल कॉलेजों में लागू करने की मांग की है। संगठन का मानना है कि यह मॉडल Resident Doctors Leave Policy के लिए एक आदर्श उदाहरण है।
Resident Doctor Duty Hours को लेकर गंभीर चिंता
डीएमए ने Central Residency Scheme 1992 का हवाला देते हुए कहा कि रेजिडेंट डॉक्टरों से सप्ताह में 48 घंटे से अधिक नियमित कार्य नहीं लिया जाना चाहिए। इसके अलावा एक बार में 12 घंटे से अधिक लगातार ड्यूटी भी नियमों और मानवीय कार्य परिस्थितियों के खिलाफ है।
हालांकि, आज भी कई मेडिकल कॉलेजों में Resident Doctor Duty Hours निर्धारित सीमा से कहीं अधिक हैं। कई स्थानों पर डॉक्टरों से 24 घंटे, 30 घंटे और यहां तक कि 36 घंटे तक लगातार ड्यूटी करवाई जा रही है। डीएमए ने इसे डॉक्टरों के स्वास्थ्य और मरीजों की सुरक्षा दोनों के लिए गंभीर खतरा बताया है।
Resident Doctors Rights की रक्षा के लिए कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
डीएमए ने कहा कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 प्रत्येक नागरिक को जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार देता है, जबकि अनुच्छेद 42 मानवीय कार्य परिस्थितियों और उचित कार्य समय सुनिश्चित करने की बात करता है।
यदि किसी रेजिडेंट डॉक्टर को लगातार ड्यूटी, नींद और भोजन से वंचित रखा जाता है, मानसिक उत्पीड़न किया जाता है या अमानवीय कार्य परिस्थितियों में काम करने के लिए मजबूर किया जाता है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
डीएमए की प्रमुख मांगें
- देश के सभी मेडिकल कॉलेजों में Rohtak Model Leave Policy लागू की जाए।
- Central Residency Scheme 1992 को सख्ती से लागू किया जाए।
- Resident Doctor Duty Hours को वैज्ञानिक और मानवीय आधार पर निर्धारित किया जाए।
- 24 से 36 घंटे की लगातार ड्यूटी व्यवस्था को तुरंत समाप्त किया जाए।
- Resident Doctors Rights और उनके मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
- सभी संस्थानों में 48 घंटे साप्ताहिक कार्य सीमा का पालन कराया जाए।
डीएमए अध्यक्ष का बयान
डीएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अमित व्यास ने कहा कि किसी भी मेडिकल कॉलेज या प्रशासन द्वारा रेजिडेंट डॉक्टरों का अवकाश रोकना अथवा मनमाने तरीके से समाप्त करना पूरी तरह अस्वीकार्य है। उन्होंने कहा कि यदि किसी संस्थान द्वारा Resident Doctors Leave Policy का उल्लंघन किया जाता है और डॉक्टरों को नियमानुसार अवकाश देने से इंकार किया जाता है, तो DMA India संगठनात्मक, प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर कठोर कदम उठाने के लिए बाध्य होगा।
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