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Women day : जज्बा, प्रभा का चार दशक का संघर्ष और नाप लिया आसमां

Women day

  • फौलादी नगरी भिलाई का फौलादी जज्बा
  • प्रभा ने पावर लिफ्टिंग से लेकर स्वाई ड्राइविंग तक जौहर दिखाया
  • बीएसपी सेक्टर दो गर्ल्स स्कूल में पढ़ते हुए 1975 में खोखो से खेलों का शुरु किया सफर
  • नेशनल गेम में 8 सौ, 3 हजार व 5 हजार मीटर मैराथन दौड़ में मिला द्वितीय स्थान

Women day : भिलाई। देश में औद्योगिक तीर्थ के नाम से जाने जाने वाले भिलाई में फौलाद ही नहीं ढाला जाता, बल्कि प्रतिभाएं भी गढ़ी जाती हैं। खेलों में महिलाएं पुरुषों से कंधे से कंधा मिलाकर देश विदेश में परचम लहरा रहीं हैं, वरन कुछ क्षेत्रों में पुरुषों से भी आगे बढ़ रही हैं। इस्पात नगरी की पचास पार की बहूमुखी प्रतिभा की धनी प्रभा ठाकुर हुसैन स्पोर्ट्स में एक ऐसी अनूठी एंग्री वूमेन हैं, जो अपने शारीरिक दमखम और हौसले से कई खेलों और एडवेंचर में देश दुनिया में भिलाई और प्रदेश का नाम रोशन कर रही हैं। 57 वर्षीय यह प्रतिभाशाली स्पोर्ट्स एंड एडवेंचर एंग्री वूमेन अंतर्राष्ट्रीय क्षितिज पर जमीन से लेकर आकाश तक गजब का जौहर दिखा रही हैं। जिस उम्र में लोग रिटायरमेंट के करीब होते हैं और थकान के साथ शरीर में बीपी, शुगर जैसी बीमारियां घर बनाने लगती हैं, उस आयु में यदि कोई महिला बहूप्रतिभा और साहस की मिसाल बन जाए तो सुखद आश्चर्य होता है। हरफनमौला महिला प्रभा हुसैन की भिलाई की पहली महिला पावर लिफ्टर होने से लेकर फर्राटा वूमेन और स्काई डाइवर बनने तक की चार दशक से अधिक की कहानी जितनी संघर्षपूर्ण है, उतनी ही प्रेरक भी है। प्रभा बताती हैं कि बीएसपी सेक्टर दो गर्ल्स स्कूल में पढ़ते हुए 1975 में 5वीं से 8 वीं में खोखो से खेलों का सफर शुरु किया। 11 कक्षा में पढ़ते हुए व कल्याण कालेज में बतौर एनसीसी कैटेड 1984 और 87 में 2 बार गणतंत्र दिवस परेड दिल्ली में प्रदेश का प्रतिनिधित्व कर नेशनल गेम में 8 सौ, 3 हजार व 5 हजार मीटर मैराथन दौड़ में द्वितीय स्थान मिला। 87 में पूना में 21 किमी की अंतर्राष्ट्रीय मैराथन दौड़ में दूसरा स्थान प्राप्त किया। उन्हें पीएम इंदिरा, राजीव, राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह ने सम्मानित किया।

ऐसे दिखाया जौहर

आगे नेशनल पंजा कुश्ती, पावर लिफ्टिंग फिर अंतरराष्ट्रीय मैराथन दौड़ सहित कई खेलों में, होंगे सबसे आगे हिंदुस्तानी… का गौरवशाली सिलसिला आज 57 के पायदान पर पहुंचते तक हवाई जहाज से जंपिंग के स्काई डाइविंग के साहसिक एडवेंचर तक बना हुआ है। दौड़ (रनिंग) व स्काई डाइविंग के जुनून ने अंतर्राष्ट्रीय शोहरत दिलाई। भिलाई में नेशनल पंजा कुश्ती में गोल्डज व पावर लिफ्टिंग में प्रथम आकर राज्य की पहली महिला पावर लिफ्टर होने का गौरव हासिल किया। यहां तक पहुंचने में बीएसपी में कार्यरत पिता वीरेंद्र बहादुर सिंह और शादी के बाद बीएसपी में कार्यरत रहे और बास्केट बाल खिलाड़ी पति अख्तर हुसैन व इंजीनियर पुत्र अफरोज व बेटी आफरीन ने बहुत हौसलाआफजाई की। मेरी हाइट कम थी, सो मैंने स्पीड के रेसिंग पर ध्यान केंद्रित किया। मेरा ड्रीम अब विदेश में कुछ नया करने का है। हीरोइन उर्मिला मातोंडकर, प्रीति झिंगयानी व रजा मुराद सम्मानित कर चुके हैं।

परिवार से मिलती है रेसिंग के लिए स्टेमिना

सत्तावन वर्षीय प्रभा हुसैन परिवार को संभालते, संवारते हुए उतनी ही स्प्रिट और स्टेमिना से आगे बढ़ रही हैं, जितना शादी के पूर्व दौड़ रही थी। अब अपना पूरा फोकस मैराथन दौड़ व स्काई डाइविंग पर किया हुआ है। उन्होंने 55 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में वर्ष 2024 में एम्सटर्डम नीदरलैंड में 140 देशों के 48 हजार प्रतिभागी वाले इंटरनेशनल मैराथन दौड़ में भारत का प्रजेंटेशन किया। इसके पूर्व नेशनल प्रतियोगिता में 5 हजार मीटर दौड़ व लंबी कूद में में भारत में प्रथम और 15 सौ मीटर में द्वितीय स्थान प्राप्त किया। इतना ही नहीं, वे 2022 में मेदिनापुर बांग्लादेश में 5 किमी दौड़ में प्रथम,15 सौ मीटर में द्वितीय व 23 में हैदराबाद में 15 मीटर के मैराथन दौड़ में द्वितीय स्थान मिला। रेसिंग के अलावा उड़नपरी प्रभा आसमानी गोतोखोरी के एडवेंचर में भी कमाल दिखा रही हैं। उन्होंने 2022 में दुबई में स्काई डाइविंग गेम में हवाई जहाज से 13 हजार फीट ऊंचाई से हवा में हैरतअंगेज छलांग लगाई। इसके बाद 24 में नीदर लैंड टैक्सल आईलैंड में भी दूसरी बार 13 हजार फीट ऊंचाई से जंप कर दुनिया को रोमांचित किया। ऋषिकेश हिमालय में हजारों फीट नीचे खाई में वे बंजी जंपिंग भी कर चुकी हैं। बुलेट मोटर सायकल व जीप में भी करतब दिखाने वालीं प्रभा अब कुछ

नया कीर्तिमानी

एडवेंचर व रेसिंग की तैयारी कर रही हैं। वे बताती हैं कि पति व बच्चों के संबल से ही यहां तक पहुंची हैं। परिवार प्राउड फील करता है। फिर खतरा तो सब जगह है। जो डर गया वो कुछ नहीं कर सकता है। प्रेक्टिश, संतुलित खानपान, आत्मविश्वास और पति व परिवार से ही ही हौसला व स्टेमिना व सफलता मिलती है। पति व दोनों बच्चे भी स्काई जंपिंग कर चुके हैं। बताती हैं कि मेरे सामने भी चूल्हा चौक था लेकिन इच्छाशक्ति से मंजिल मिली। शौक एडवेंचर है। तेईस में दुबई में मांडलिंग भी की, जिसमें सुपर मांडल रनरअप का खिताब मिला।

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