• Fri. Jul 10th, 2026

Haryana , करियर और मनोरंजन की ख़बरें - Vartahr

हरियाणा, देश विदेश, करियर, खेल, बाजार और मनोरंजन की ख़बरें

CDSCO का बड़ा प्रस्ताव: अलग-अलग दवाओं पर एक ही ब्रांड नाम लगाने पर लग सकती है रोक, मरीजों की सुरक्षा होगी मजबूत

Byadmin

Jul 10, 2026
CDSCO दवा ब्रांड नाम नियम

CDSCO दवा ब्रांड नाम नियम

देश में दवाओं की गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा को और बेहतर बनाने के लिए केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव जारी किया है। इस प्रस्ताव के तहत ऐसी दवाओं पर रोक लगाने की तैयारी है, जिनमें अलग-अलग सक्रिय तत्व (Active Ingredients) होने के बावजूद एक ही ब्रांड नाम का इस्तेमाल किया जाता है।

CDSCO का मानना है कि इस तरह की ब्रांडिंग से मरीजों, डॉक्टरों और फार्मासिस्टों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है, जिससे गलत दवा दिए जाने या लेने का खतरा बढ़ जाता है। फिलहाल इस प्रस्ताव पर 17 जुलाई 2026 तक आम जनता, चिकित्सा विशेषज्ञों और दवा कंपनियों से सुझाव मांगे गए हैं।

क्या है पूरा मामला?

देश की कई दवा कंपनियां एक ही ब्रांड नाम के तहत अलग-अलग बीमारियों की दवाएं बेच रही हैं। इन दवाओं के नाम तो समान होते हैं, लेकिन उनके सक्रिय रासायनिक तत्व (API) और उपयोग पूरी तरह अलग होते हैं।

CDSCO का कहना है कि यदि किसी मरीज या डॉक्टर को दवा के नाम के आधार पर भ्रम हो जाए, तो इससे इलाज प्रभावित हो सकता है और गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं।

क्यों जरूरी है यह बदलाव?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार दवा का ब्रांड नाम उसकी स्पष्ट पहचान होना चाहिए। यदि अलग-अलग दवाओं का नाम एक जैसा होगा तो कई प्रकार की गलतियां हो सकती हैं।

संभावित जोखिम

  • मरीज गलत दवा खरीद सकता है।
  • डॉक्टर अनजाने में दूसरी दवा लिख सकते हैं।
  • मेडिकल स्टोर पर गलत दवा दी जा सकती है।
  • स्वयं दवा लेने वाले लोगों में भ्रम बढ़ सकता है।
  • गंभीर मरीजों के इलाज में देरी या दुष्प्रभाव का खतरा बढ़ सकता है।

कब एक ही ब्रांड नाम स्वीकार्य माना जाता है?

विशेषज्ञों के अनुसार यदि दवा का सक्रिय तत्व (Active Ingredient) समान हो और केवल उसकी मात्रा, शक्ति या रूप (जैसे टैबलेट, सिरप या इंजेक्शन) अलग हो, तब एक ही ब्रांड नाम का उपयोग उचित माना जा सकता है।

लेकिन यदि दवा के रासायनिक तत्व पूरी तरह अलग हैं, तो समान ब्रांड नाम का इस्तेमाल मरीजों की सुरक्षा के लिहाज से सही नहीं माना जाता।

दवा कंपनियों पर क्या होगा असर?

यदि CDSCO इस प्रस्ताव को लागू करता है, तो कई दवा कंपनियों को अपने उत्पादों की ब्रांडिंग में बदलाव करना पड़ सकता है।

इसके तहत कंपनियों को:

  • कई दवाओं के नाम बदलने पड़ सकते हैं।
  • नई पैकेजिंग और लेबल तैयार करने होंगे।
  • डॉक्टरों और मेडिकल स्टोर संचालकों को नई जानकारी देनी होगी।
  • मार्केटिंग रणनीति में बदलाव करना पड़ेगा।

मरीजों को क्या फायदा मिलेगा?

नई व्यवस्था लागू होने के बाद मरीजों के लिए सही दवा की पहचान आसान होगी। इससे दवा से जुड़ी गलतियों में कमी आएगी और उपचार अधिक सुरक्षित एवं प्रभावी बन सकेगा।

फिलहाल सुझाव आमंत्रित

CDSCO ने इस प्रस्ताव को अंतिम रूप देने से पहले सभी संबंधित पक्षों से सुझाव मांगे हैं। प्राप्त सुझावों की समीक्षा के बाद अंतिम दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।

VartaHR – हरियाणा का नंबर-1 डिजिटल हिन्दी न्यूज़ प्लेटफॉर्म।”

facebook

पीजीआईएमएस रोहतक में पहली बार बनी नॉन-टीचिंग कर्मचारियों की क्रिकेट टीम, कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल ने दी शुभकामनाएं

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *