पीजीआईएमएस रोहतक
पर्यावरण संरक्षण और ग्रीन कैंपस को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (पीजीआईएमएस), रोहतक में बुधवार को वृहद पौधारोपण अभियान का आयोजन किया गया। अतिरिक्त मुख्य सचिव, चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान, हरियाणा के दिशा-निर्देशों पर आयोजित इस अभियान के तहत न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग परिसर में 151 छायादार एवं फलदार पौधे लगाए गए।
पेड़-पौधे जीवन का आधार हैं : डॉ. एच.के. अग्रवाल
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। पौधारोपण अभियान की शुरुआत करते हुए उन्होंने कहा कि पेड़-पौधे मानव जीवन का आधार हैं और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के बाद लोगों ने ऑक्सीजन और स्वच्छ वातावरण के महत्व को और बेहतर तरीके से समझा है। न्यूक्लियर मेडिसिन जैसे विभागों में हरियाली का विशेष महत्व है क्योंकि यहां रेडिएशन से जुड़े कार्य होते हैं। ऐसे में पौधे वातावरण को शुद्ध करने के साथ-साथ मरीजों, विद्यार्थियों और कर्मचारियों को मानसिक शांति भी प्रदान करेंगे।
हर कर्मचारी और विद्यार्थी लगाए एक पौधा
कुलपति डॉ. अग्रवाल ने सभी विभागाध्यक्षों से अपने-अपने विभागों में खाली स्थान चिन्हित कर अधिक से अधिक पौधे लगाने का आह्वान किया। उन्होंने कर्मचारियों और विद्यार्थियों से अपील की कि इस मानसून में प्रत्येक व्यक्ति कम से कम एक पौधा अवश्य लगाए और उसके वृक्ष बनने तक उसकी देखभाल की जिम्मेदारी निभाए।
ग्रीन कैंपस बनाने की दिशा में बड़ा कदम
विश्वविद्यालय के निदेशक डॉ. एस.के. सिंघल ने बताया कि चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग (DMER Haryana) के निर्देशानुसार प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों को ग्रीन कैंपस के रूप में विकसित किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग में अमलतास, जामुन, गुलमोहर और आंवला सहित 151 पौधे लगाए गए हैं। ये पौधे न केवल परिसर को हराभरा बनाएंगे बल्कि पर्यावरण संरक्षण और औषधीय लाभ भी प्रदान करेंगे।
परिसर को बनाया जाएगा ऑक्सीजन हब
कुलसचिव डॉ. रूप सिंह ने कहा कि पौधारोपण सबसे बड़ा सामाजिक और पर्यावरणीय योगदान है। यदि संस्थान का प्रत्येक सदस्य एक-एक पौधा लगाए तो आने वाले वर्षों में पूरा परिसर ऑक्सीजन हब के रूप में विकसित हो सकता है।
मेडिकल विद्यार्थियों को पर्यावरण के प्रति जागरूक रहने की जरूरत
डीन अकादमिक अफेयर्स डॉ. एम.जी. वशिष्ठ ने कहा कि मेडिकल विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के प्रति भी जागरूक और संवेदनशील होना चाहिए।
वहीं डीन डॉ. अशोक चौहान ने कहा कि न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग में आने वाले कैंसर और थायराइड मरीजों के लिए हरियाली से भरपूर वातावरण सकारात्मक प्रभाव डालेगा।
पौधों की नियमित देखभाल भी होगी सुनिश्चित
डीन स्टूडेंट वेलफेयर डॉ. सविता सिंघल ने छात्र-छात्राओं से हॉस्टल परिसर में भी पौधारोपण करने की अपील की। संपदा अधिकारी दुष्यंत शर्मा ने बताया कि संस्थान को हराभरा और प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं तथा लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल सुनिश्चित की जाएगी।
ये रहे मौजूद
इस अवसर पर न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. रोहित, डॉ. सुनील रोहिल्ला, डॉ. पंकज छिक्कारा, डॉ. विनोद, डॉ. बलजीत, गैर-शिक्षक कर्मचारी संघ प्रधान वजीर सिंह, वरिष्ठ उपप्रधान संजय सिंहमार, अशोक कांगड़ा, जयभगवान शर्मा, कृष्ण सहित अनेक अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।
यह पौधारोपण अभियान पर्यावरण संरक्षण, हरित परिसर निर्माण और स्वच्छ वातावरण की दिशा में विश्वविद्यालय का महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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