World Clubfoot Day
- -डॉ. रूप सिंह बोले, 1000 से अधिक बच्चों को मिला नया जीवन
- -विश्व क्लबफुट दिवस पर पीजीआईएमएस में जागरूकता कार्यक्रम
- -पोंसेटी विधि से निशुल्क इलाज, हर क्लिनिक दिवस पर 20 बच्चों को मिल रही नई उम्मीद
रोहतक। क्लबफुट यानी जन्मजात मुड़े हुए पैरों की समस्या समय पर पहचान और सही उपचार से पूरी तरह ठीक की जा सकती है। इसी संदेश के साथ विश्व क्लबफुट दिवस पर पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय, रोहतक के हड्डी रोग विभाग ने विशेष जागरूकता एवं प्रेरणा कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम में क्लबफुट से पीड़ित बच्चों, उनके अभिभावकों और चिकित्सकों ने भाग लिया। इस अवसर पर कुलसचिव एवं हड्डी रोग विभागाध्यक्ष डॉ. रूप सिंह ने कहा कि क्लबफुट कोई लाइलाज बीमारी नहीं है और जन्म के तुरंत बाद उपचार शुरू होने पर अधिकांश बच्चे सामान्य जीवन जी सकते हैं। पीजीआईएमएस रोहतक की समर्पित क्लबफुट क्लिनिक में अब तक 1000 से अधिक बच्चों का सफल उपचार किया जा चुका है। कार्यक्रम में बच्चों के साथ केक काटकर विश्व क्लबफुट दिवस मनाया गया तथा उन्हें उपहार वितरित किए गए।
यह कोई लाइलाज बीमारी नहीं
कुलसचिव ओर हड्डी रोग विभाग अध्यक्ष डॉ रूप सिंह ने बताया कि क्लबफुट कोई लाइलाज बीमारी नहीं है। अगर जन्म के तुरंत बाद इलाज शुरू कर दिया जाए और नियमित फॉलोअप किया जाए तो बच्चा पूरी तरह सामान्य जीवन जी सकता है। माता-पिता को घबराने की जरूरत नहीं है, बस समय पर अस्पताल पहुंचना जरूरी है। क्लबफुट यानी जन्मजात मुड़े हुए पैर, सबसे आम हड्डी व मांसपेशी विकृति है। हर 1000 नवजात में से एक बच्चा इस समस्या के साथ पैदा होता है। इलाज न मिलने पर बच्चा जीवनभर के लिए दिव्यांग हो सकता है और चलने-फिरने में दिक्कत आती है। लेकिन समय पर इलाज और सही देखभाल से 95% बच्चों के पैर पूरी तरह ठीक हो जाते हैं।
पीजीआईएमएस की क्लबफुट क्लिनिक
पीजीआईएमएस रोहतक में क्लबफुट क्लिनिक चलाया जा रहा है। यह क्लिनिक हर सोमवार, बुधवार और शनिवार को लगता है। यहां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य पोंसेटी विधि से इलाज किया जाता है। इसमें क्रमबद्ध प्लास्टर, जरूरत पड़ने पर छोटी शल्य प्रक्रिया, विशेष जूते-ब्रेस, काउंसलिंग और लंबे समय तक फॉलोअप शामिल हैं। क्लिनिक के समन्वयक डॉ. जितेन्द्र वाधवानी ने बताया कि हर क्लिनिक दिवस पर करीब 20 बच्चे प्लास्टर, जांच, ब्रेस और पुनर्वास के लिए आते हैं। यह कार्यक्रम क्योर इंडिया के सहयोग से क्लबफुट इंडिया प्रोग्राम के तहत चल रहा है, जिसमें इलाज, ब्रेस, काउंसलिंग और फॉलोअप पूरी तरह निशुल्क है। अब तक यहां 1000 से अधिक बच्चों का सफल पंजीकरण और इलाज हो चुका है। हरियाणा ही नहीं, आसपास के राज्यों से भी मरीज यहां आते हैं।
धैर्य रखें और इलाज बीच में न छोड़ें
डॉ. रूप सिंह ने कहा कि एक बच्चे का ठीक होना सिर्फ पैर सीधा करना नहीं है, बल्कि उसे आत्मविश्वास देना है। वह स्कूल जा सके, खेल सके, दौड़ सके, यही हमारी सबसे बड़ी जीत है। अभिभावक धैर्य रखें और इलाज बीच में न छोड़ें। डॉ जितेंद्र वाधवानी ने बताया कि नवजात के एक या दोनों पैर अंदर की तरफ मुड़े होना ,एड़ी का छोटा दिखना , पैर सामान्य से अलग दिशा में मुड़ा होना जैसे लक्षण दिखते ही तुरंत हड्डी रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें।
ये टीम कर रही काम
क्लबफुट कार्यक्रम से डॉ. रूप सिंह, डॉ. उमेश यादव, डॉ. जितेन्द्र वाधवानी और डॉ. सुनील कुमार के साथ रेजिडेंट चिकित्सक, प्लास्टर तकनीशियन, काउंसलर और पुनर्वास कार्यकर्ता लगातार जुड़े हैं। यह टीम बच्चों को चलने-फिरने लायक बनाने के लिए दिन-रात काम कर रही है।
क्या है क्लबफुट
क्लबफुट एक जन्मजात विकृति है, जिसमें नवजात शिशु का एक या दोनों पैर अंदर और नीचे की ओर मुड़े हुए होते हैं। इस स्थिति में पैर की बनावट सामान्य से अलग दिखाई देती है तथा एड़ी छोटी या ऊपर उठी हुई लग सकती है। यह हड्डियों, मांसपेशियों, टेंडन और लिगामेंट्स के असामान्य विकास के कारण होता है। अनुमानतः हर 1000 नवजात शिशुओं में से एक बच्चा क्लबफुट के साथ जन्म लेता है। यदि समय पर उपचार न मिले तो बच्चे को चलने-फिरने में गंभीर परेशानी हो सकती है और वह स्थायी दिव्यांगता का शिकार हो सकता है।
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