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Rohtak : संकट मोचन मंदिर में कार्तिक पूर्णिमा पर हवन यज्ञ

Byadmin

Nov 16, 2024
माता दरवाजा स्थित संकट मोचन मंदिर में कार्तिक पूर्णिमा पर साध्वी मानेश्वरी देवी और भक्तों ने हवन में आहुति डालते हुए ।माता दरवाजा स्थित संकट मोचन मंदिर में कार्तिक पूर्णिमा पर साध्वी मानेश्वरी देवी और भक्तों ने हवन में आहुति डालते हुए ।

Rohtak

  • भक्तों ने हवन में आहुति डाल मांगी मंगल कामनायें
  • साध्वी मानेश्वरी बोलीं, पूर्णिमा पर स्नान-दान, पूजा-पाठ से सुख, समृद्धि व धन की प्राप्ति संभव

Rohtak : रोहतक। माता दरवाजा स्थित संकट मोचन मंदिर में ब्रह्मलीन गुरुमां गायत्री जी की कृपासे शुक्रवार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की कार्तिक पूर्णिमा पर सुबह हवन, कीर्तन और सत्संग का आयोजन हुआ। गद्दीनशीन साध्वी मानेश्वरी देवी और भक्तों ने हवन में आहूति की सामग्री डालकर व पूजा अर्चना करके सुख समृद्धि की मंगल कामनाएं की। साध्वी मानेश्वरी देवी ने बताया कि हवन कराने से देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है और मानव के ग्रह दोष दूर होते हैं। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म में कार्तिक पूर्णिमा पर भगवान विष्‍णु और भगवान शिव की पूजा होती है। इस दिन स्नान-दान, पूजा-पाठ करने और व्रत रखने से साधक को सुख, समृद्धि और धन की प्राप्ति होती है। पंडित अशोक शर्मा ने प्रसाद बांटा। यह जानकारी सचिव गुलशन भाटिया ने दी।

कार्तिक पूर्णिमा पर देवी देवता मनाते हैं दीवाली

साध्वी मानेश्वरी देवी ने कहा कि शास्त्रों में तीन दीपावली का जिक्र है। अश्विन अमावस्या को पित्र दीपावली, कार्तिक अमावस्या को मानव दीपावली और कार्तिक पूर्णिमा अर्थात देव दीपावली पर पर देवी देवता दीवाली मनाते हैं । उन्होंने कहा कि मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नामक राक्षस का वध किया था। त्रिपुरासुर के अंत की खुशी में देवताओं ने संपूर्ण स्वर्गलोक को दीयों से प्रकाशित किया था, जो देवताओं के लिए संकट बन चुका था। तब से इसे देव दीपावली का रूप दे दिया गया। इसलिए कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा या त्रिपुरारी पूर्णिमा भी कहा जाता है।

 

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