Hospital Scam Exposed
चंडीगढ़ मामला: डीएमए ने उठाई आवाज,डॉक्टर के इस्तीफे से निजी अस्पतालों पर सवाल
चंडीगढ़,15 अप्रैल। स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में नैतिकता और मानवता को शर्मसार करने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। चंडीगढ़ की एक युवा चिकित्सक, डॉ. प्रभलीन कौर, ने एक प्रतिष्ठित निजी अस्पताल में जॉइनिंग के पहले ही दिन इस्तीफा देकर पूरे चिकित्सा जगत में हलचल मचा दी है।
डॉ. कौर द्वारा लगाए गए आरोप बेहद चिंताजनक हैं। उन्होंने कहा कि अस्पताल प्रबंधन मरीजों को बेहतर इलाज देने के बजाय उन्हें मुनाफा कमाने का माध्यम मानता है। सोशल मीडिया पर वायरल अपने वीडियो में उन्होंने बताया कि एक फिजिशियन के रूप में कार्य शुरू करने के पहले ही दिन उन्हें यह अहसास हो गया कि अस्पताल को उनकी सेवाओं से अधिक उनके नाम और डिग्री की आवश्यकता थी, ताकि उनकी आड़ में कथित रूप से अनैतिक एवं अवैध गतिविधियों को अंजाम दिया जा सके।
इस पूरे प्रकरण को लेकर डेमोक्रेटिक मेडिकल एसोसिएशन (डीएमए इंडिया) ने गहरी चिंता व्यक्त की है। यह घटना स्वास्थ्य सेवाओं में बढ़ते व्यावसायीकरण,नैतिक गिरावट तथा चिकित्सकों पर बढ़ते दबाव का स्पष्ट संकेत है।
डीएमए इंडिया ने डॉ. प्रभलीन कौर के इस साहसिक कदम की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने अपने पेशे की गरिमा और मरीजों के हित को सर्वोपरि रखते हुए किसी भी प्रकार के समझौते से इंकार किया। यह घटना केवल एक अस्पताल तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर में निजी स्वास्थ्य क्षेत्र में व्याप्त कुछ चिंताजनक प्रवृत्तियों को उजागर करती है, जहाँ कई स्थानों पर उपचार से अधिक “रेवेन्यू टारगेट” को प्राथमिकता दी जा रही है।
डीएमए राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अमित व्यास एवं राष्ट्रीय महासचिव डॉ. शुभ प्रताप सोलंकी ने बताया-
1. अनावश्यक ICU भर्ती व इलाज का व्यावसायीकरण अनैतिक है।
2. डॉक्टरों पर Revenue Targets का दबाव पेशेवर स्वतंत्रता के खिलाफ है।
3. ऐसी प्रथाएं मरीजों के शोषण व विश्वास में कमी का कारण बनती हैं।
डीएमए इंडिया की मांगें:
- इस पूरे मामले की निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कराई जाए।
- दोषी व्यक्तियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
- डॉक्टरों को सुरक्षित कार्य वातावरण एवं नैतिक चिकित्सा अभ्यास की स्वतंत्रता प्रदान की जाए।
- निजी अस्पतालों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने हेतु कड़े दिशानिर्देश लागू किए जाएं।
डीएमए इंडिया ने सभी चिकित्सकों से अपील की है कि वे अपने पेशे की शपथ और नैतिक मूल्यों को सर्वोपरि रखें तथा किसी भी प्रकार के अनैतिक दबाव का सामूहिक रूप से विरोध करें।
डीएमए अध्यक्ष डॉ व्यास एवं महासचिव डॉ सोलंकी ने कहा कि संगठन डॉ. प्रभलीन कौर के साथ पूरी मजबूती से खड़ा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि निजी स्वास्थ्य क्षेत्र में सक्रिय कुछ “मेडिकल माफिया” जैसी प्रवृत्तियों पर सरकार का पर्याप्त ध्यान नहीं है, जिससे इस प्रकार की घटनाएं सामने आ रही हैं।
डीएमए ने यह भी स्पष्ट किया कि वह हर उस डॉक्टर के साथ खड़ा रहेगा जो सत्य, नैतिकता और मरीजों के हित में आवाज उठाता है।
