हरियाणा के हजारों गेस्ट टीचर्स और व्याख्याताओं के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। Punjab Haryana High Court ने Haryana Guest Teacher Regularization मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वर्ष 2014 की नियमितीकरण नीति के तहत पात्र शिक्षकों की सेवाओं को नियमित किया जाए और उन्हें सभी सेवा एवं रिटायरमेंट लाभ दिए जाएं। इस हाई कोर्ट के बड़े फैसले के बाद हरियाणा गेस्ट टीचर नियमितीकरण की मांग कर रहे शिक्षकों में खुशी की लहर है।
Punjab Haryana High Court ने क्या कहा?
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट की जस्टिस संदीप मोदगिल की पीठ ने कहा कि हरियाणा सरकारी स्कूल शिक्षक के रूप में करीब 20 वर्षों से सेवाएं दे रहे गेस्ट फैकल्टी और व्याख्याताओं को केवल अस्थायी कर्मचारी नहीं माना जा सकता। अदालत ने साफ किया कि Haryana Guest Teacher Regularization के पात्र शिक्षकों की नियुक्ति किसी बैकडोर एंट्री से नहीं हुई थी, बल्कि सार्वजनिक प्रक्रिया और मेरिट के आधार पर की गई थी।
हरियाणा कोर्ट समाचार के अनुसार कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि सरकार की दलील मान ली जाए तो 2014 की नियमितीकरण नीति का उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा। अदालत ने कहा कि संविदा शिक्षक समाचार में बार-बार उठ रहे मुद्दों को देखते हुए सरकार को शिक्षकों के भविष्य को सुरक्षित करना चाहिए।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला सुखविंदर सिंह एवं अन्य द्वारा दायर याचिका से जुड़ा हुआ था। याचिकाकर्ताओं ने Haryana Teacher Regularization Policy 2014 के तहत अपनी सेवाएं नियमित करने की मांग की थी। उन्होंने अदालत को बताया कि वर्ष 2005-06 में उन्हें सरकारी स्कूलों में रिक्त पदों पर गेस्ट फैकल्टी शिक्षक और व्याख्याता के रूप में नियुक्त किया गया था।
नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान विज्ञापन जारी किए गए, चयन समितियां बनाई गईं, आवेदन जांचे गए और मेरिट सूची तैयार करने के बाद चयन किया गया। Haryana Guest Faculty News में यह मामला लंबे समय से चर्चा में था।
सरकार की दलील कोर्ट ने क्यों खारिज की?
हरियाणा शिक्षा विभाग की ओर से अदालत में कहा गया कि ये नियुक्तियां केवल अस्थायी व्यवस्था के लिए की गई थीं और याचिकाकर्ता नियमित भर्ती प्रक्रिया के तहत नियुक्त नहीं हुए थे। हालांकि Haryana Court News में सामने आए फैसले में हाई कोर्ट ने इस दलील को खारिज कर दिया।
कोर्ट ने कहा कि यदि स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी नहीं होती तो सरकार इतने लंबे समय तक इन शिक्षकों की सेवाएं नहीं लेती। अदालत ने टिप्पणी की कि करीब 20 साल तक लगातार काम लेने के बाद अब इन शिक्षकों को “स्टॉप गैप अरेंजमेंट” कहना पूरी तरह अनुचित और अन्यायपूर्ण है।
शिक्षकों की भूमिका पर कोर्ट की बड़ी टिप्पणी
हरियाणा शिक्षक समाचार के अनुसार अदालत ने कहा कि शिक्षक समाज और राष्ट्र निर्माण की आधारशिला होते हैं। उन्हें जरूरत के समय इस्तेमाल कर बाद में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। Haryana Education News में इस टिप्पणी को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कोर्ट ने कहा कि सरकार स्वयं स्वीकार कर चुकी है कि हरियाणा स्कूल शिक्षा व्यवस्था में शिक्षकों की भारी कमी थी, जिसके कारण इन गेस्ट टीचर्स की नियुक्ति की गई थी। ऐसे में अब Haryana Guest Teachers Relief देना सरकार की जिम्मेदारी है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी हुआ जिक्र
फैसले में सुप्रीम कोर्ट के “मदन सिंह बनाम हरियाणा राज्य” मामले का भी उल्लेख किया गया। सर्वोच्च अदालत पहले ही 2014 की नियमितीकरण नीति की वैधता को बरकरार रख चुकी है। हाई कोर्ट का बड़ा फैसला आने के बाद अब Haryana Guest Teacher Regularization प्रक्रिया को और मजबूती मिली है।
दो महीने में नियमितीकरण के निर्देश
अंततः Punjab Haryana High Court ने हरियाणा सरकार को निर्देश दिया कि दो महीने के भीतर पात्र शिक्षकों की सेवाओं को नियमित किया जाए और उन्हें सभी सेवा एवं रिटायरमेंट लाभ प्रदान किए जाएं। हरियाणा अतिथि अध्यापक समाचार में इस फैसले को ऐतिहासिक बताया जा रहा है।
हरियाणा शिक्षा समाचार और Haryana Teacher News में यह फैसला हजारों संविदा शिक्षकों के भविष्य से जुड़ा बड़ा निर्णय माना जा रहा है। Haryana Guest Teacher Regularization को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रहे शिक्षकों के लिए यह फैसला राहत और उम्मीद दोनों लेकर आया है।
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