Hansi Fort History
- -हरियाणा सरकार ने हांसी को एक नया जिला बनाया
- -आयरलैंड के जार्ज थाॅमस ने वर्ष 1797 में हांसी को अपने नवगठित राज्य हरियाणा की राजधानी बनाया था
- -प्राचीन किले में उसने सिक्के ढालने के वास्ते टकसाल भी स्थापित की थी
- -चार वर्षों बाद 1801 में एक लम्बे लड़े गए युद्ध के बाद उसको हांसी से प्रस्थान करना पड़ा
यशपाल गुलिया
हरियाणा सरकार ने हांसी को एक नया जिला बनाकर इस ऐतिहासिक नगर के गौरवमयी रुतबे को पुनर्जीवित कर दिया है। सदियों पुराने इस ऐतिहासिक नगर का प्राचीन नाम आसिका होता था जो शाही सुलेमान मार्ग पर स्थित था। यहां के ऐतिहासिक किले का निर्माण सम्राट पृथ्वीराज द्वारा िकया गया था। इसका समय-समय पर शासकों ने भरपूर उपयोग किया था। आयरलैंड वासी जार्ज थाॅमस द्वारा वर्ष 1797 में हांसी को अपने नवगठित राज्य हरियाणा की राजधानी बना लिया था। प्राचीन किले में उसने सिक्के ढालने के वास्ते टकसाल भी स्थापित की थी, लेकिन चार वर्षों बाद 1801 में एक लम्बे लड़े गए युद्ध के बाद उसको हांसी से प्रस्थान करना पड़ा। फिर अंग्रेजों ने 1809-10 में हांसी में अपनी नई रिसाला छावनी स्थापित की तथा कुछ वर्षों बाद हांसी क्षेत्र कर्नल स्कीनर को जागीर के तौर पर प्रदान किया गया। स्कीनर की मृत्यु के बाद अंग्रेजों ने फिर एक बार हांसी के रुतबे को कम कर दिया था, लेकिन वही हांसी का किला 1857 में अंग्रेजों का महत्वपूर्ण मुख्यालय भी बना। इसमंे पंजाब के फिरोजपुर से कोर्टलैन्ड अंग्रेज के नेतृत्व में एक नवगवित सेना हांसी में पहुंच गई तथा हरियाणा क्षेत्र के क्रांतिकारियों को दिल्ली जाने से रोकने में सफल भी रही। दिल्ली स्थित अंग्रेज सेना को कवच प्रदान करने वाली उस सेना को हरियाणा फील्ड फोर्स का नाम दिया गया था जो हांसी के किले में लगभग एक वर्ष तक जमी रही और वहीं से उस सेना ने ओढ़ां, खैरिका व जमालपुर आदि स्थानों पर क्रांतिकारियों से भीषण युद्ध किए थे।
यहां चार कुतुब विराजमान
मुस्िलम समुदाय के विख्यात धार्मिक चार कुतुबों के यहां विराजमान रहने के कारण भी हांसी प्रसिद्ध नगर रहा था। नगर के चारों तरफ खिलजी सुलतान ने वर्ष 1300 के आसपास एक दीवार भी निर्मित करवाई थी जिसमें पांच प्रवेशद्वार थे। उन्हीं में से एक बड़सी गेट पर शिलालेख भी मौजूद है। ऐसे प्राचीन ऐतिहासिक नगर को अब एक जिले का दर्जा देकर मुख्यमन्त्री नायब सैनी ने सराहनीय कार्य किया है।
हिसार में घोड़ा फार्म स्थापित हुआ
इसी हांसी नगर में अंग्रेजों का ज्यादातर वास्ता रहने के कारण ही हिसार में घोड़ा फार्म स्थापित हुआ था। हांसी नगर में चार कुतुब परिसर के पास अली- तज्जार व लखी बनजारे के विशाल मकबरे स्थित हैं। वहीं पर स्कीनर की दो बेगमों के जुड़वां मकबरे भी बने हुए हैं। इनमें फारसी भाषा में शिलालेख अंकित हैं। यद्यपि एेतिहासिक किला संरक्षित होने के बावजूद खंडहर बन चुका है, लेकिन जार्ज थाॅमस द्वारा निर्मित हौज, बारूद खाना व बाह्य चौकियां आज भी दर्शनीय हैं, जोकि हांसी के प्राचीन इतिहास के साक्षी हैं।


