Doctors
- -जी.बी. पंत अस्पताल प्रशासन से जवाब तलब किया
- -जी.बी. पंत के रेज़िडेंट डॉ. अमित कुमार (कार्डियोलॉजी) के मानवीय ड्यूटी आवर्स की मांग
- -डीएमए इंडिया ने दिल्ली की मुख्यमंत्री को लिखा पत्र
- -जी.बी. पंत अस्पताल विवाद —डॉ व्यास ने कहा -1992 के ड्यूटी ऑवर्स नियमों का हो सख़्त पालन
नई दिल्ली। डेमोक्रेटिक मेडिकल एसोसिएशन (डीएमए इंडिया) ने जी.बी. पंत अस्पताल के प्रथम वर्ष डीएम (कार्डियोलॉजी) रेज़िडेंट डॉ. अमित कुमार के मामले पर गहरी चिंता व्यक्त की है।इसके लिए डीएमए की तरफ़ से दिल्ली के मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिख न्याय की बात की है। इसके हस्ताक्षरकर्ता डॉ. अमित व्यास(राष्ट्रीय अध्यक्ष),डॉ. शुभ प्रताप सोलंकी(राष्ट्रीय महासचिव),डॉ. भानु कुमार(राष्ट्रीय उपाध्यक्ष) एवं डॉ. प्रियांशु शर्मा(राष्ट्रीय महिला प्रकोष्ठ सचिव) हैं। डॉ. अमित कुमार को लगातार 36 घंटे की ड्यूटी, नींद की कमी, मानसिक उत्पीड़न और असहनीय कार्य परिस्थितियों का सामना करना पड़ा, जिसके परिणामस्वरूप उन्होंने 23 अक्टूबर 2025 को अपना इस्तीफ़ा सौंप दिया। यह स्थिति न केवल मानवीय मूल्यों के विरुद्ध है बल्कि भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा 1992 में जारी “रेज़िडेंसी ड्यूटी ऑवर्स निर्देशों” का स्पष्ट उल्लंघन भी है, जिसमें रेज़िडेंट डॉक्टरों के लिए साप्ताहिक 48 घंटे और अधिकतम 12 घंटे की लगातार ड्यूटी की सीमा तय की गई है।
यह कहा डीएमए ने
डॉ शुभ एवं डॉ प्रियांशु ने बताया कि नेशनल टास्क फोर्स रिपोर्ट (2024) जो सर्वोच्च न्यायालय के मार्गदर्शन में तैयार की गई थी ने यह स्पष्ट किया था कि अत्यधिक कार्य घंटे और मानसिक शोषण, डॉक्टरों में मानसिक स्वास्थ्य संकट के प्रमुख कारण हैं। डीएमए का कहना है कि दो अलग-अलग RTI आवेदन (संख्या GBP&H/R/2025/60034 दिनांक 13.09.2025 एवं GBP&H/R/2025/60041 दिनांक 12.10.2025) के बावजूद अस्पताल प्रशासन द्वारा निर्धारित 48 घंटे की समयसीमा में कोई जानकारी नहीं दी गई, जो पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही की गंभीर कमी को दर्शाता है।
डीएमए इंडिया की मांगें
1. डॉ. अमित कुमार को तुरंत मानवीय कार्य घंटे (Humanitarian Duty Hours) प्रदान किए जाएं।
2. अस्पताल में कार्यरत सभी रेज़िडेंट डॉक्टरों के लिए 1992 के दिशा-निर्देशों एवं 2024 की राष्ट्रीय टास्क फोर्स की सिफ़ारिशों का सख़्ती से पालन किया जाए।
3. राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ व्यास ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि डॉक्टरों के शोषण, अत्यधिक कार्यभार और मानसिक स्वास्थ्य की उपेक्षा जैसी प्रथाएँ किसी भी मेडिकल संस्थान में अस्वीकार्य हैं।रे ज़िडेंट डॉक्टर स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ हैं — उन्हें गरिमा, सम्मान और न्याय मिलना ही चाहिए।

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