Actor Manoj kumar
- 87 साल की उम्र में मुंबई के अस्पताल में ली अंतिम सांस
- 1960 और 70 के दशक में बॉक्स ऑफिस पर पर छाए रहे
- दादा साहेब फाल्के और पद्मश्री अवॉर्ड से नवाजे गए
- देशभक्ति वाली फिल्में बनाने वाले बॉलीवुड के पहले अभिनेता
- बेटा कुणाल बोला, अब उन्हें दर्द से मुक्ति मिल गई
- शाहरुख खान और सलमान ने जताया शोक
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भारत कुमार’ को अंतिम प्रणाम करने पहुंचे प्रेम चोपड़ा और धर्मेंद्र
Actor Manoj kumar : मुंबई। ‘उपकार’, ‘पूरब और पश्चिम’, ‘रोटी, कपड़ा और मकान’ जैसी फिल्मों में उदीयमान ‘भारत’ के आक्रोश और आकांक्षाओं को मूर्त रूप देने वाले अभिनेता-फिल्मकार मनोज कुमार का शुक्रवार सुबह मुंबई के एक अस्पताल में निधन हो गया। वह 87 वर्ष के थे। देशभक्ति पर आधारित कई फिल्मों में अपनी भूमिकाओं के लिए ‘भारत कुमार’ के रूप में लोकप्रिय अभिनेता कुछ समय से बीमार थे। कुमार का उम्र संबंधी समस्याओं के कारण कोकिलाबेन अंबानी अस्पताल में तड़के करीब साढ़े तीन बजे निधन हो गया। फिल्म निर्माता के बेटे कुणाल ने कहा, अब उन्हें दर्द से मुक्ति मिल गई है। कुणाल ने बताया कि उनके पिता कई स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे और पिछले कुछ वर्षों से शय्याग्रस्त थे। पिछले कई सालों से शांत जीवन जी रहे कुमार को कई बार अस्पताल में भर्ती कराया गया।
अंतिम संस्कार आज
1960 और 1970 के दशक में बॉक्स ऑफिस पर राज करने वाले अभिनेता का अंतिम संस्कार शनिवार को मुंबई के पवन हंस श्मशान घाट में होगा। उनके परिवार में दो बेटे और पत्नी शशि हैं। देशभक्तिपूर्ण फिल्मों की दमदार भूमिकाओं के अलावा ‘हिमालय की गोद में’ और ‘पत्थर के सनम’ समेत कई फिल्मों में रोमांटिक अभिनेता के रूप में भी अपनी छाप छोड़ने वाले कुमार को हर वर्ग ने श्रद्धांजलि दी।
राष्ट्र ने किया नमन
-राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ‘एक्स’ पर लिखा, “उन्होंने जिन राष्ट्रीय नायकों, किसानों और सैनिकों के चरित्रों को जीवंत किया, वे हमारी सामूहिक स्मृति में अंकित रहेंगे। उनकी फिल्में राष्ट्रीय गौरव की भावना जगाती रहेंगी और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेंगी।”
-पीएम नरेन्द्र मोदी ने कहा, ‘दिग्गज अभिनेता एवं फिल्म निर्माता मनोज कुमार जी के निधन से बहुत दु:खी हूं। वह भारतीय सिनेमा के आदर्श थे, जिन्हें देशभक्ति की उनकी भावना के लिए विशेष रूप से याद किया जाता था और यह उनकी फिल्मों में भी झलकता था।’ उनकी फिल्मों ने राष्ट्रीय गौरव की भावना को जगाया और ये पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी।
पंजाबी हिंदू परिवार में जन्मे
अविभाजित भारत के एबटाबाद शहर (अब पाकिस्तान) में एक पंजाबी हिंदू परिवार में जन्मे कुमार का जन्म का नाम हरिकृष्ण गोस्वामी था। उनका परिवार 1947 में दिल्ली आ गया और कुमार ने हिंदू कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई की। इसके बाद वह फिल्मों में करियर बनाने के लिए मुंबई आ गए। राज्यसभा टीवी (अब संसद टीवी) पर गुफ्तगू कार्यक्रम के लिए दिए गए एक पुराने साक्षात्कार में कुमार ने बताया था कि वह 1956 में करियर बनाने के लिए मुंबई चले गए थे और अपनी चाची से कहा था कि एक दिन उनके पास सफेद बंगला, सफेद कार व सफेद कपड़े होंगे और सब कुछ हासिल करने के बाद वह चुपचाप सितार बजाएंगे।