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Cabinet : पीएम धन-धान्य कृषि योजना भरेगी किसानों की झोली, हर साल खर्च होंगे 24,000 करोड़

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  • केंद्रीय कैबिनेट के अहम फैसले : कम कृषि उत्पादन वाले 100 जिलों पर फोकस
  • इस योजना में 11 विभागों की 36 मौजूदा योजनाओं को समाहित किया
  • 1.7 करोड़ से अधिक किसानों को होगा बड़ा फायदा
  • कृषि उत्पादकता बढ़ेगी, फसल विविधीकरण और टिकाऊ कृषि पद्धतियों रहेगा ध्यान
  •  योजना का मकसद किसानों को किफायती कर्ज देना
  •  किसानों को गेहूं, धान की बजाए दूसरी फसलों के लिए प्रेरित करेंगे

Cabinet : नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने किसानों की झोली भरने के लिए 100 जिलों में कृषि क्षेत्र के प्रोत्साहन के लिए सालाना 24,000 करोड़ रुपये के आवंटन वाली ‘प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना’ को बुधवार को मंजूरी दे दी। छह साल तक चलने वाली इस योजना से करीब 1.7 करोड़ किसान लाभान्वित होंगे। यह योजना 2025-26 के बजट में कृषि उत्पादकता बढ़ाने, फसल विविधीकरण और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए 100 जिलों के विकास की घोषणा के अनुरूप है। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में लिए गए इस निर्णय की जानकारी दी। वैष्णव ने कहा कि ‘प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना’ 11 विभागों की 36 मौजूदा योजनाओं, अन्य राज्य योजनाओं और निजी क्षेत्र के साथ स्थानीय भागीदारी को समाहित कर कार्यान्वित की जाएगी। योजना 2025-26 से शुरू होकर अगले 6 साल तक चलेगी। इसके तहत देश के 100 कम कृषि उत्पादन वाले जिलों के किसानों को विशेष सुविधाएं दी जाएंगी। इस योजना का उद्देश्य कृषि उत्पादकता बढ़ाना, फसल विविधीकरण और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाना, पंचायत एवं ब्लॉक स्तर पर फसलों की कटाई के बाद अनाज भंडारण बढ़ाना, सिंचाई सुविधाओं में सुधार और किसानों के लिए दीर्घकालिक एवं अल्पकालिक ऋण की उपलब्धता को सुगम बनाना है।

योजना के तहत यह किया जाएगा

-फसल विविधता पर फोकस : प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना में ज्यादा पैदावार, फसल विविधता पर फोकस किया जाएगा। इससे खेती की उत्पादकता बढ़ेगी। किसानों को अब गेहूं-धान के बजाय दूसरी फसलों और टिकाऊ कृषि तरीकों को भी अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा ।

-पंचायत और ब्लॉक स्तर पर भंडारण : कटाई के बाद उपज के सुरक्षित भंडारण के लिए पंचायत-स्तर और ब्लॉक-स्तर पर गोदाम, कोल्ड स्टोरेज और वैल्यू ऐडिशन यूनिट्स बनाई जाएंगी।

-बेहतर सिंचाई और ऋण व्यवस्था : हर किसान तक लंबी और छोटी अवधि का सस्ता कर्ज और सिंचाई सुविधाएं पहुंचेंगी।
-प्राकृतिक और ऑर्गेनिक खेती : मिट्टी-पानी संरक्षण, जैविक खेती और जल की बचत पर खास फोकस होगा, जिससे किसान के खर्च घटें और आमदनी बढ़े।
36 केंद्रीय योजनाओं का एकीकरण : प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना में कुल 11 मंत्रालयों की 36 योजनाओं को मिलाया जाएगा, साथ में राज्य की योजनाएं और निजी क्षेत्र की भागीदारी भी जोड़ी जाएगी।

-हर जिले की अपनी धन-धान्य समिति : प्लानिंग और मॉनिटरिंग के लिए हर जिले, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर विशेषज्ञों और प्रगतिशील किसानों को जोड़कर समिति बनाई जाएगी।

-डिजिटल डैशबोर्ड : 117 महत्वपूर्ण बिंदुओं पर महीने-दर-महीने हर जिलें के प्रोग्रेस की निगरानी होगी। नीति आयोग और केंद्रीय अधिकारी भी समय-समय पर समीक्षा करेंगे।

-जिला कृषि समिति : हर जिले का अपना ‘डिस्ट्रिक्ट एग्रीकल्चर एंड अलाइड एक्टिविटीज प्लान तैयार होगा, उसमें स्थानीय जरूरत और ताकत के हिसाब से फसल, सिंचाई, भंडारण आदि की रणनीति तय होगी।

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