रोहतक, 5 जुलाई 2026। पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय एवं PGIMS Rohtak के एनेस्थीसिया विभाग ने अपने 63 वर्षों के गौरवशाली सफर को यादगार अंदाज में मनाया। “रूट्स एंड विंग्स – यादों से फिर मुलाकात” थीम पर आयोजित इस विशेष मिलन समारोह में 1960 के दशक से लेकर वर्तमान तक के करीब 200 डॉक्टर, शिक्षक और पूर्व छात्र एक मंच पर एकत्र हुए।
सुश्रुत सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम ने पुराने दिनों की यादें ताजा कर दीं। वर्षों बाद अपने शिक्षकों और साथियों से मिलकर कई डॉक्टर भावुक हो गए। किसी ने अपने गुरु को गले लगाया तो किसी ने दशकों पुराने बैचमेट से मिलकर छात्र जीवन के अनुभव साझा किए।
कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल बोले- एनेस्थीसिया विभाग पीजीआई की जान
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल रहे। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया और कहा कि एनेस्थीसिया विभाग किसी भी अस्पताल की रीढ़ होता है।
उन्होंने कहा कि ऑपरेशन थिएटर (OT) और आईसीयू में मरीजों की सुरक्षा की पहली जिम्मेदारी इसी विभाग की होती है। आज इस विभाग से निकले डॉक्टर देश और दुनिया के विभिन्न हिस्सों में उत्कृष्ट सेवाएं दे रहे हैं और संस्थान का नाम रोशन कर रहे हैं।
कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय का लक्ष्य विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा उपलब्ध कराना है। उन्होंने आयोजन सचिव डॉ. प्रशांत कुमार और निदेशक डॉ. एस.के. सिंघल के प्रयासों की भी सराहना की।
1963 में 5 फैकल्टी से शुरू हुआ सफर, आज 54 विशेषज्ञ
PGIMS Rohtak Anesthesia Department के इतिहास को साझा करते हुए निदेशक डॉ. एस.के. सिंघल ने बताया कि विभाग की स्थापना वर्ष 1963 में डॉ. जी.एल. कामरा ने की थी। उस समय विभाग में केवल 5 फैकल्टी सदस्य थे, जबकि आज यह संख्या बढ़कर 54 हो चुकी है।
उन्होंने बताया कि शुरुआती दौर में सीमित संसाधनों के बावजूद विभाग ने निरंतर प्रगति की। वर्तमान में विभाग के पास आधुनिक ऑपरेशन थिएटर, आईसीयू, पेन क्लिनिक और एडवांस मॉनिटरिंग सिस्टम जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
डॉ. सिंघल ने कोविड-19 महामारी के दौरान एनेस्थीसिया विभाग की भूमिका को भी याद किया और कहा कि उस कठिन समय में विभाग की टीम ने फ्रंटलाइन वॉरियर्स की तरह काम कर देशभर में मिसाल कायम की।
पुराने दिनों की यादों से भावुक हुए डॉक्टर
कार्यक्रम के दौरान कई वरिष्ठ डॉक्टरों ने अपने छात्र जीवन की यादें साझा कीं। डॉ. किरणप्रीत ने बताया कि 1985 बैच के सबसे अधिक छात्र एनेस्थीसिया विभाग से जुड़े थे और इस कार्यक्रम में भी उसी बैच की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही।
डॉ. दीपक ने कहा कि वर्षों बाद सभी साथियों को एक मंच पर देखकर ऐसा लगा जैसे समय फिर पीछे लौट गया हो। वहीं कोविड काल में अपनी सेवाओं के लिए पहचान बनाने वाली डॉ. कामना कक्कड़ ने अपनी सफलता का श्रेय अपनी गुरु डॉ. सुशीला तक्षक को दिया।
क्विज, रैंप वॉक और सांस्कृतिक कार्यक्रम बने आकर्षण का केंद्र
Anesthesia Department Reunion को यादगार बनाने के लिए कई रोचक गतिविधियों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के पहले चरण में पुरानी तस्वीरों पर आधारित “फोटो पहचानो क्विज” आयोजित की गई। जैसे ही स्क्रीन पर दशकों पुरानी तस्वीरें दिखाई गईं, पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा।
दूसरे चरण में फैकल्टी सदस्यों की रैंप वॉक आयोजित की गई, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। इसके अलावा सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में वरिष्ठ प्रोफेसरों और छात्रों ने मिलकर शानदार प्रदर्शन किया।
विभागीय दौरे ने ताजा कीं पुरानी यादें
कार्यक्रम के अंतिम चरण में सभी अतिथियों को विभाग का विशेष दौरा कराया गया। इस दौरान 1963 से लेकर 2026 तक के विभागीय सफर को तस्वीरों और वीडियो क्लिप्स के माध्यम से प्रदर्शित किया गया।
पुराने दिनों की यादों को ताजा करने के लिए प्रतिभागियों को उसी स्थान पर चाय और समोसे भी परोसे गए, जहां कभी वे छात्र जीवन के दौरान समय बिताया करते थे।
उत्कृष्ट शिक्षकों का हुआ सम्मान
समारोह में बेस्ट टीचर के रूप में डॉ. बलबीर छाबड़ा, डॉ. सविता सैनी और डॉ. सी.वी. सिंह को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में पंडित भगवत दयाल शर्मा की नातिन गरिमा शर्मा भी विशेष रूप से उपस्थित रहीं और संस्थान के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम के अंत में सभी डॉक्टरों ने एक साथ “यारों की यारी” गाते हुए ग्रुप फोटो खिंचवाई। इस अवसर पर सभी की जुबान पर एक ही बात थी— “PGIMS सिर्फ एक संस्थान नहीं, बल्कि एक परिवार है।”
63 वर्षों की यह यात्रा केवल एक विभाग की प्रगति की कहानी नहीं, बल्कि गुरु-शिष्य परंपरा, मित्रता और चिकित्सा सेवा के प्रति समर्पण की प्रेरणादायक गाथा है।
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