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661 करोड़ घोटाला: सप्लीमेंट्री चार्जशीट से पहले CBI की ताबड़तोड़ छापेमारी, हरियाणा-चंडीगढ़-दिल्ली NCR में कई ठिकानों पर कार्रवाई

661 करोड़ घोटाले

661 crore Ghotala

चंडीगढ़। 661 करोड़ रुपये के कथित सरकारी धन दुरुपयोग मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल करने से पहले हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली-एनसीआर में बड़े स्तर पर छापेमारी की है। जांच एजेंसी ने वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों और एक निजी कंसल्टेंसी कंपनी से जुड़े कई ठिकानों की तलाशी लेकर महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल साक्ष्य और संपत्ति संबंधी रिकॉर्ड जब्त किए हैं।

CBI Raid Haryana: कई ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई

सीबीआई ने शनिवार देर रात हरियाणा कैडर के वरिष्ठ अधिकारियों के आवासों और नोएडा स्थित मैसर्स विपम कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े परिसरों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई हरियाणा सरकार के आठ विभागों और चंडीगढ़ प्रशासन के दो विभागों में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच का हिस्सा है।

जांच एजेंसी का कहना है कि सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल करने से पहले सबूतों को मजबूत करने और नए तथ्यों को जुटाने के लिए यह कार्रवाई की गई है।

जब्त दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच जारी

छापेमारी के दौरान सीबीआई ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, बैंकिंग रिकॉर्ड और संपत्ति से जुड़े दस्तावेज जब्त किए हैं। अधिकारियों के अनुसार इन सभी सामग्रियों की फॉरेंसिक और वित्तीय जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

सरकारी अधिकारियों और बैंक कर्मियों की मिलीभगत की जांच

जांच का केंद्र IDFC-AU Finance Bank से जुड़े वित्तीय लेन-देन हैं। अब तक सामने आए साक्ष्यों से संकेत मिले हैं कि कुछ सरकारी अधिकारियों और बैंक अधिकारियों ने मिलकर सरकारी खातों के संचालन, धन हस्तांतरण और उसके बाद राशि को अन्य खातों में भेजने में कथित भूमिका निभाई।

सीबीआई यह भी जांच कर रही है कि क्या कुछ अधिकारियों को इन लेन-देन को सुविधाजनक बनाने या रोकने में विफल रहने के बदले किसी प्रकार का अनुचित लाभ प्राप्त हुआ था।

कंसल्टेंसी कंपनी के खातों तक पहुंची सरकारी राशि

जांच में सामने आया है कि कथित घोटाले से जुड़ी धनराशि का एक हिस्सा विपम कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड के खातों तक पहुंचा। आरोप है कि बाद में यह राशि कंपनी के निदेशक के निजी खातों में स्थानांतरित की गई। सीबीआई इस पूरे फंड फ्लो की पड़ताल कर रही है।

661 करोड़ रुपये के सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप

सीबीआई के अनुसार इस मामले में हरियाणा सरकार के आठ विभाग और चंडीगढ़ प्रशासन के दो विभाग प्रभावित हुए हैं। जांच लगभग 661 करोड़ रुपये के सरकारी धन के कथित दुरुपयोग और गबन से संबंधित है। मामले को राज्य की सबसे बड़ी वित्तीय अनियमितताओं में से एक माना जा रहा है।

तीन अलग-अलग मामलों की जांच कर रही CBI

इस घोटाले से जुड़े तीन मामलों की जांच सीबीआई कर रही है। इनमें से एक मामला हरियाणा राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से सीबीआई को सौंपा गया था, जबकि दो मामले पहले चंडीगढ़ के आर्थिक अपराध थाना में दर्ज किए गए थे।

इन मामलों में आपराधिक साजिश, सरकारी धन के गबन, वित्तीय धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच की जा रही है।

पहली चार्जशीट पहले ही हो चुकी है दाखिल

जांच के शुरुआती चरण के बाद पंचकूला स्थित विशेष सीबीआई अदालत में पहली चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। इसमें हरियाणा पावर जनरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPGCL) और हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद (HSSPP) से जुड़े कुछ अधिकारियों की कथित भूमिका का उल्लेख किया गया है।

किन अधिकारियों के खिलाफ हुई कार्रवाई?

सीबीआई ने हरियाणा कैडर के आईएएस अधिकारियों पंकज अग्रवाल, मोहम्मद शाइन, प्रदीप कुमार तथा आईएफएस अधिकारी नवनीत कुमार श्रीवास्तव के आवासों पर तलाशी अभियान चलाया।

वहीं हरियाणा सरकार पहले ही आर.के. सिंह और प्रदीप कुमार को निलंबित कर चुकी है। जांच एजेंसी अब जब्त किए गए दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर आगे की कार्रवाई की तैयारी कर रही है।

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