The Environmentalist Created a Small Forest
- पॉलीथिन मुक्त फार्म हाउस में लगे हैं विभिन्न किस्मों के 2500 पेड़
- फलों तो तोड़कर बेचते नहीं, उन्हें पक्षियों को खाने देते हैं
समीपस्थ ग्राम नंदूपुरा में बेतवा नदी के किनारे करीब 13 बीघा के फार्म हाउस में एक छोटा जंगल रूप लेता जा रहा है। पॉलीथिन मुक्त और पूरी तरह रसायन मुक्त इस फार्म हाउस में विभिन्न किस्मों के करीब 2500 वृक्ष लगे हुए हैं। जिनमें से कई अब फल, फूल और छाया देने लायक हो गए हैं। इस फार्म हाउस में मिट्टी के कटाव को रोकने के लिए देशी किस्मों के भी सैकडों पौधे लगाए गए थे जो अब विकसित होते जा रहे हैं। यह फार्म हाउस पर्यावरणविद स्व अनिल यादव के छोटे भाई मनोज यादव का है। मनोज बताते हैं कि करीब छह वर्ष पूर्व अपने फार्म हाउस पर सघन पौधारोपण शुरू किया था। बेतवा नदी के किनारे पर स्िथत इस फार्म हाउस में सबसे पहले उन्होंने मिट्टी का कटाव रोकने के लिए एक हजार बांस के पौधों सहित अर्जुन, कंजी, खिन्नी आदि के सैकडों पौधे लगवाए, जो अब पूरी तरह विकसित हो चुके हैं।
फलदार पौधे भी खिलखिला रहे
दूसरी ओर फार्म हाउस में जंगल जलेबी, अंजीर, कबीट, खिन्नी, करोंदा, अचार, स्टार फ्रूट, नींबू, अमरूद, ग्रीन एपल, लीची के पौधे भी लगवाए थे इनमें से भी अिधकांश अब फल देने लगे हैं। मनोज के अनुसार वे इन फलाें को तोड़कर बेचते नहीं हैं, बल्िक पक्षियों के खाने के लिए लगे रहने देते हैं। साथ ही खेत में पक्षियों के दाने के लिए ज्वार, मक्का भी बाेते हैं। साथ ही दो देशी गाय भी पाल रखी हैं, जिनके गोबर से बर्मी कंपोस्ट, गोबर खाद बनाते हैं। पक्षियों के पानी के लिए कुंड भी बना रखा है, जगह जगह पक्षियों के घोंसले बनाए गए हैं। पौधों में पानी देने के लिए डि्रप सिस्टम लगवाया है। मनोज के अनुसार उनका फार्म हाउस पूरी तरह पॉलीथिन मुक्त और रासायनिक दवाओं से मुक्त क्षेत्र है।
पक्षियों ने भी बसेरा बनाया
इसलिए अनुकूल पर्यावरण पाकर वहां दर्जनों किस्म के पक्षियों ने बसेरा बना रखा है। इस तरह एक फार्म हाउस में छोटा जंगल विकसित कर वे मृदा संरक्षण, जल संरक्षण, पक्षी संरक्षण करते हुए पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन में अपना योगदान दे रहे हैं। वे अपने पूरे परिवार सहित आए दिन इस फार्म हाउस में पहुंचकर प्रकृति के बीच समय बिताते हैं और फार्म हाउस में उगी सब्िजयाें एवं भाजी से चूल्हे कंडे पर देशी तरीके से खाना बनाकर खाते भी हैं।

