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Somnath Pride Festival : सोमनाथ स्वाभिमान पर्व : आस्था, संस्कृति और राष्ट्रचेतना का महाआयोजन

Somnath Pride Festival

  • ‘एक भारत–श्रेष्ठ भारत’ की जीवंत अभिव्यक्ति के साथ शौर्य यात्रा मार्ग बना सांस्कृतिक उत्सव
  • सोमनाथ में भक्ति, संगीत, लोककला और राष्ट्रभाव का विराट संगम

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अंतर्गत गुजरात में आयोजित विविध कार्यक्रमों ने आस्था, संस्कृति, आध्यात्म और राष्ट्रभाव का अद्भुत एवं प्रेरणादायी संगम प्रस्तुत किया है। यह पर्व न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक चेतना का उत्सव है, बल्कि भारत की सनातन परंपरा, ऐतिहासिक गौरव और राष्ट्रीय एकता का जीवंत प्रतीक भी बनकर उभरा है। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के माध्यम से ‘एक भारत–श्रेष्ठ भारत’ की भावना को सशक्त रूप से जन-जन तक पहुँचाया जा रहा है।
इस महाआयोजन में देश के विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक विरासत, लोककलाएं, शास्त्रीय परंपराएं, आध्यात्मिक अनुष्ठान और राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत प्रस्तुतियों ने लाखों श्रद्धालुओं और नागरिकों को भावविभोर कर दिया। सोमनाथ, जो स्वयं भारतीय सभ्यता, आस्था और स्वाभिमान का प्रतीक है, इन दिनों सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना के केंद्र के रूप में संपूर्ण देश का ध्यान आकर्षित कर रहा है।

Somnath Pride Festival

शौर्य यात्रा मार्ग पर ‘एक भारत–श्रेष्ठ भारत’ की सजीव झलक

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अंतर्गत आयोजित शौर्य यात्रा के दौरान शंख सर्कल से हमीरजी सर्कल तक का संपूर्ण मार्ग सांस्कृतिक वैभव और राष्ट्रीय चेतना का जीवंत मंच बन गया। इस मार्ग पर लगभग 20 से अधिक सांस्कृतिक मंच स्थापित किए गए हैं, जहाँ देश के विभिन्न राज्यों से आए कलाकार अपनी-अपनी सांस्कृतिक परंपराओं की प्रस्तुति दे रहे हैं।

कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात सहित अनेक राज्यों की लोक एवं शास्त्रीय कलाओं ने इस आयोजन को राष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया है। यक्षगान, कुचिपुड़ी नृत्य, मणियारो रास, भरतनाट्यम, लोकनृत्य, पारंपरिक वाद्य संगीत और रंगारंग प्रस्तुतियों ने दर्शकों को भारत की सांस्कृतिक विविधता से रूबरू कराया।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के आगमन से पूर्व ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु, स्थानीय नागरिक, पर्यटक और युवा वर्ग शौर्य यात्रा मार्ग पर एकत्र होकर इन सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साक्षी बने। इन कार्यक्रमों के माध्यम से यह संदेश स्पष्ट रूप से उभरा कि भारत की विविधता ही उसकी सबसे बड़ी शक्ति है और यही विविधता देश को एक सूत्र में बाँधती है।

शौर्य यात्रा मार्ग पर प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने न केवल मनोरंजन प्रदान किया, बल्कि भारतीय परंपराओं, लोककथाओं, ऐतिहासिक गाथाओं और सांस्कृतिक मूल्यों को भी प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। कलाकारों की प्रस्तुतियों में राष्ट्रभक्ति, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक गौरव की स्पष्ट झलक देखने को मिली।

सोमनाथ में भक्ति, संगीत और राष्ट्रभाव की भव्य सांस्कृतिक संध्या

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अंतर्गत 9 जनवरी को आयोजित भव्य सांस्कृतिक संध्या ने श्रद्धा, भक्ति और राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत वातावरण का निर्माण किया। सोमनाथ मंदिर परिसर में समुद्र की लहरों की गूंज, शिव भक्ति के मंत्र और संगीत की मधुर स्वर-लहरियों ने एक अद्वितीय आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान की।
इस सांस्कृतिक संध्या में प्रसिद्ध गायक श्री कीर्ति सगाथिया और सुप्रसिद्ध लोकगायक श्री करसन सगाथिया ने अपनी भावपूर्ण प्रस्तुतियों से उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने महादेव भजनों, गरबाओं और लोकप्रिय गीतों के माध्यम से शिव भक्ति, लोकसंस्कृति और जनभावनाओं का सुंदर समन्वय प्रस्तुत किया। उनके गायन में जहां एक ओर आध्यात्मिक गहराई थी, वहीं दूसरी ओर लोकसंस्कृति की जीवंतता भी स्पष्ट रूप से दिखाई दी।

कलाकार श्री हार्दिक दवे ने एकतारा के साथ शिव स्तुति, शिव भजन और पनबाई के भजनों की प्रस्तुति देकर भक्तिमय वातावरण को और अधिक गहन कर दिया। उनकी सरल किंतु भावपूर्ण प्रस्तुति ने श्रोताओं को आत्मिक शांति और भक्ति की अनुभूति कराई।

कार्यक्रम के अंतिम चरण में लोक साहित्यकार और कलाकार श्री राजभा गढ़वी ने अपनी प्रभावशाली वाणी के माध्यम से सोमनाथ के गौरवशाली इतिहास, उसके संघर्ष और पुनर्निर्माण की गाथाओं का सजीव वर्णन किया। उनकी प्रस्तुति में शिव भक्ति के साथ-साथ राष्ट्रप्रेम और स्वाभिमान का प्रबल भाव देखने को मिला। उन्होंने अपने कथन और लोकसाहित्य के माध्यम से उपस्थित जनसमूह को भारतीय इतिहास, संस्कृति और आत्मगौरव से जोड़ने का कार्य किया।

इस भव्य सांस्कृतिक संध्या में कैबिनेट मंत्री श्री जीतुभाई वाघाणी, डॉ. प्रद्युमन वाजा, सांसद श्री राजेश चूड़ासमा, विधायक श्री भगवान बराड़, वरिष्ठ नेता श्री शिवा सोलंकी सहित अनेक जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, संतगण और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

सांस्कृतिक आयोजन के माध्यम से सामाजिक समरसता का संदेश

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अंतर्गत आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने सामाजिक समरसता, आपसी सद्भाव और राष्ट्रीय एकता का सशक्त संदेश दिया। विभिन्न राज्यों के कलाकारों ने एक मंच पर आकर अपनी सांस्कृतिक परंपराओं की प्रस्तुति देकर यह दर्शाया कि भारत की विविध संस्कृतियाँ एक-दूसरे की पूरक हैं।
इन कार्यक्रमों के माध्यम से युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, लोकपरंपराओं और ऐतिहासिक विरासत से जोड़ने का भी महत्वपूर्ण कार्य किया गया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ-साथ आध्यात्मिक वातावरण ने लोगों को आत्मचिंतन, मूल्यों और राष्ट्रभाव से जुड़ने का अवसर प्रदान किया।

काशी विश्वनाथ मंदिर में 72 घंटे का अखंड मंत्रोच्चार

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अंतर्गत जामनगर शहर के ऐतिहासिक एवं पौराणिक महत्व वाले काशी विश्वनाथ मंदिर में 72 घंटे तक अखंड वैदिक मंत्रोच्चार का दिव्य, भव्य और भावपूर्ण आयोजन किया गया। यह आयोजन आध्यात्मिक चेतना, शांति और सनातन परंपराओं के संरक्षण का प्रतीक बनकर सामने आया।

10 जनवरी तक आयोजित इस विशेष धार्मिक अनुष्ठान के दौरान मंदिर परिसर में सत्संग, भजन, महाआरती और मंत्रोच्चार के विविध कार्यक्रम संपन्न हुए। विद्वान ब्राह्मणों द्वारा निरंतर वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया गया, जिससे संपूर्ण मंदिर परिसर भक्ति, शांति और सकारात्मक ऊर्जा से ओतप्रोत बना रहा।

प्रतिदिन सायंकाल आयोजित भव्य महाआरती में श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या उपस्थित रही। ‘ॐ नमः शिवाय’ और ‘नमः शिवाय’ के मंत्रोच्चार से समूचा वातावरण आध्यात्मिक चेतना से भर उठा। सत्संग के दौरान शिव भक्ति, जीवन मूल्यों और आध्यात्मिक शांति पर आधारित प्रवचनों ने श्रद्धालुओं को गहन आत्मिक अनुभूति प्रदान की।

इस पावन आयोजन में विधायक श्री दिव्येशभाई अकबरी, उप महापौर श्री कृष्णाबेन सोढा, स्थायी समिति अध्यक्ष श्री नीलेशभाई कथगरा, वरिष्ठ अग्रणी श्री बीनाबेन कोठारी, पार्षदगण, अन्य जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहकर इस दिव्य अनुष्ठान के सहभागी बने।
काशी विश्वनाथ मंदिर में आयोजित यह अखंड मंत्रोच्चार न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक रहा, बल्कि समाज में शांति, सद्भाव और आध्यात्मिक चेतना के प्रसार का माध्यम भी बना।

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व : आस्था से आत्मगौरव तक

कुल मिलाकर, सोमनाथ स्वाभिमान पर्व ने आस्था से आत्मगौरव और संस्कृति से राष्ट्रचेतना तक की यात्रा को प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया है। यह पर्व भारतीय सभ्यता की निरंतरता, सांस्कृतिक विरासत की समृद्धि और राष्ट्र की एकता का जीवंत उदाहरण बनकर उभरा है।
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के माध्यम से यह संदेश स्पष्ट रूप से सामने आया है कि भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जड़ें जितनी गहरी हैं, उसका भविष्य उतना ही उज्ज्वल और सशक्त है।

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