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Somnath Festival ऐतिहासिक क्षणों का साक्षी बन रहा सोमनाथ पर्व

Somnath Festival

  • आस्था का महासागर, 4 दिन में करीब 5 लाख श्रद्धालु आएंगे
  • चार दिन तक सांस्कृतिक चेतना का उत्सव

सनातन आस्था, राष्ट्र गौरव और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक सोमनाथ मंदिर इन दिनों ऐतिहासिक क्षणों का साक्षी बन रहा है। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अवसर पर चार दिनों तक चलने वाले इस भव्य आयोजन में देशभर से लाखों श्रद्धालु उमड़ रहे हैं। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पर्व में शामिल होकर इसे राष्ट्रीय गौरव से जोड़ दिया है। मंदिर प्रांगण और समुद्र तट क्षेत्र को भव्य रूप से सजाया गया है। “ॐ नमः शिवाय” और “हर-हर महादेव” के जयघोष से पूरा वातावरण शिवमय हो गया है। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व को देखते हुए जामनगर के काशी विश्वनाथ मंदिर में 72 घंटों से लगातार अखंड मंत्रोच्चारण चल रहा है।

Somnath Festival

संस्कृति, संगीत और स्वाभिमान का संगम

सोमनाथ पर्व केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की संस्कृतिक आत्मा का उत्सव बन गया है। देश के प्रसिद्ध भजन गायक, लोक कलाकार और सांस्कृतिक मंडलियां यहां अपनी प्रस्तुतियां दे रही हैं। समुद्र की लहरों के साथ गूंजते भजन, दीपों की रोशनी में सजा मंदिर परिसर और हर आयु वर्ग के श्रद्धालुओं की उपस्थिति से सोमनाथ इन दिनों जीवंत इतिहास बन चुका है।

Somnath Festival

चार दिन, लाखों श्रद्धालु

प्रशासन के अनुसार, पर्व के दौरान चार दिनों में करीब 5 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। सुरक्षा, यातायात, दर्शन व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर विशेष इंतजाम किए गए हैं। मंदिर ट्रस्ट, जिला प्रशासन और पुलिस पूरी तरह मुस्तैद है।

Somnath Festival

राष्ट्र स्वाभिमान का प्रतीक

सोमनाथ मंदिर केवल एक तीर्थ नहीं, बल्कि भारत की अटूट आस्था और पुनर्जागरण का प्रतीक है। इतिहास में कई बार आक्रमणों के बावजूद हर बार यह मंदिर फिर खड़ा हुआ और हर बार पहले से अधिक भव्य होकर सामने आया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यहां आना इस संदेश को और मजबूत करता है कि सोमनाथ केवल अतीत नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य की प्रेरणा है।

 

सोमनाथ मंदिर की कुछ खासियतें

सोमनाथ भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम माना जाता है और अरब सागर के तट पर स्थित है, जहां धरती और आस्था का संगम होता है। प्राचीन मान्यता के अनुसार यहां से दक्षिण में कोई भूमि नहीं है, इसे शून्य रेखा से जोड़ा जाता है। वहीं मंदिर की शिल्पकला में चालुक्य स्थापत्य शैली की झलक है।

शौर्य यात्रा मार्ग पर बनाए 20 मंच, कर्नाटक, पश्चिमी बंगाल के कलाकारों ने जमाया रंग
अलग अलग राज्यों से आए कलाकार दे रहे एकता का संदेश
सोमनाथ।

‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ में ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ को चरितार्थ करते हुए शंख सर्कल से हमीरजी सर्कल तक शौर्य यात्रा मार्ग पर कुल लगभग 20 मंच बनाए गए हैं। इन मंचों पर कर्नाटक, पश्चिम बंगाल सहित विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी जा रही हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आगमन से पूर्व शौर्य यात्रा मार्ग पर राज्य भर के कलाकारों द्वारा यक्षगान, कुचिपुड़ी नृत्य, मणियारो रास, भरतनाट्यम सहित विविधता में एकता को दर्शाने वाले कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए।

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