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हरियाणा सरकार ने स्क्रूटनी फीस, लाइसेंस फीस और इंफ्रास्ट्रक्चर चार्ज में किया संशोधन, राजस्व में 25% बढ़ोतरी की उम्मीद
चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने शहरी विकास से जुड़े नियमों में बड़ा और अहम बदलाव करते हुए विभिन्न वैधानिक फीस और चार्ज में संशोधन को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई। यह संशोधन वर्षों बाद किया गया है, जिससे राज्य के राजस्व में 22 से 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की उम्मीद जताई जा रही है।
शहरी विकास नियमों में वर्षों बाद बड़ा अपडेट
कैबिनेट के फैसले के तहत हरियाणा शहरी क्षेत्र विकास एवं विनियमन नियम, 1976 तथा हरियाणा अनुसूचित सड़कें एवं नियंत्रित क्षेत्र अनियमित विकास प्रतिबंध नियम, 1965 के अंतर्गत निर्धारित फीस और शुल्कों में बदलाव किया जाएगा। इसके लिए संबंधित नियमों के शेड्यूल में संशोधन का रास्ता साफ हो गया है।
सरकार का कहना है कि मौजूदा फीस संरचना लंबे समय से अपडेट नहीं की गई थी, जबकि निर्माण लागत, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और शहरी विस्तार से जुड़े खर्चों में लगातार वृद्धि हो रही है। ऐसे में फीस संरचना को वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप तर्कसंगत बनाना जरूरी हो गया था।
किन शुल्कों में किया गया संशोधन
सरकार द्वारा मंजूर प्रस्ताव के अनुसार हरियाणा शहरी क्षेत्र विकास एवं विनियमन नियम, 1976 के तहत निम्नलिखित शुल्कों में संशोधन किया गया है—
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स्क्रूटनी फीस
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लाइसेंस फीस
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राज्य अवसंरचना विकास शुल्क (State Infrastructure Development Charges – SIDC)
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अवसंरचना संवर्धन शुल्क (Infrastructure Augmentation Charges – IAC)
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IAC-TOD (Transit Oriented Development)
इसके अलावा हरियाणा अनुसूचित सड़कें एवं नियंत्रित क्षेत्र अनियमित विकास प्रतिबंध नियम, 1965 के अंतर्गत—
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जांच शुल्क
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परिवर्तन शुल्क
में भी संशोधन को मंजूरी दी गई है।
सरकार का फोकस: नियोजित और संतुलित शहरी विकास
हरियाणा सरकार का कहना है कि संशोधित फीस दरें संतुलित, व्यावहारिक और विकासोन्मुख दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए तय की गई हैं। इन बदलावों से शहरी बुनियादी ढांचे के विकास के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध होंगे, जिससे सड़क, सीवरेज, जल आपूर्ति और अन्य नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाया जा सकेगा।
सरकार का मानना है कि यह कदम अनियोजित विकास पर नियंत्रण लगाने और लाइसेंसिंग प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने में भी सहायक होगा।
राज्य के राजस्व में 22–25% बढ़ोतरी की संभावना
कैबिनेट के फैसले के बाद अनुमान लगाया जा रहा है कि नई फीस संरचना लागू होने से राज्य सरकार की आय में 22 से 25 प्रतिशत तक की वृद्धि हो सकती है। इससे न केवल सरकारी खजाने को मजबूती मिलेगी, बल्कि शहरी विकास परियोजनाओं को भी नई गति मिलेगी।
सरकार का दावा है कि संशोधित शुल्क से प्राप्त राजस्व का उपयोग शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर, नियोजित विकास और सार्वजनिक सुविधाओं के विस्तार में किया जाएगा।
क्यों अहम है यह फैसला
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वर्षों बाद शहरी विकास फीस में व्यापक संशोधन
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बढ़ती निर्माण लागत के अनुरूप शुल्क संरचना
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राज्य के राजस्व में उल्लेखनीय बढ़ोतरी
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शहरी विकास परियोजनाओं को मिलेगा अतिरिक्त वित्तीय समर्थन
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नियोजित और संतुलित शहरी विकास को बढ़ावा
हरियाणा सरकार का यह निर्णय शहरी विकास नीति में एक महत्वपूर्ण सुधार माना जा रहा है, जिसका असर आने वाले समय में राज्य के इंफ्रास्ट्रक्चर और राजस्व दोनों पर साफ दिखाई देगा।
