Cancer cachexia कैंसर से जूझ रहे मरीजों और उनके परिवारों के लिए सबसे चिंताजनक बात सिर्फ ट्यूमर का बढ़ना नहीं होती, बल्कि वह धीरे-धीरे होता शारीरिक क्षय है, जिसमें मरीज का वजन तेजी से गिरने लगता है, भूख कम हो जाती है और मांसपेशियां कमजोर पड़ने लगती हैं। इस गंभीर स्थिति को कैंसर कैशेक्सिया कहा जाता है।
लंबे समय तक इसे सामान्य कमजोरी या कुपोषण समझा जाता रहा, लेकिन अब वैज्ञानिक इसे एक जटिल न्यूरो-मेटाबॉलिक विकार मान रहे हैं। नई रिसर्च में संकेत मिले हैं कि दिमाग और लीवर के बीच बिगड़ा संवाद इस समस्या की मुख्य वजह हो सकता है।
कैंसर कैशेक्सिया क्या है?
कैंसर कैशेक्सिया एक ऐसा मेटाबॉलिक सिंड्रोम है, जिसमें शरीर बिना किसी स्पष्ट कारण के तेजी से टूटने लगता है। इसके प्रमुख लक्षण हैं:
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अचानक और लगातार वजन गिरना
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भूख कम लगना
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मांसपेशियों का क्षय
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अत्यधिक थकान और कमजोरी
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इलाज के प्रति शरीर की कम प्रतिक्रिया
महत्वपूर्ण बात यह है कि यह केवल कम भोजन करने का परिणाम नहीं है। कई मरीज पर्याप्त खाना खाने के बावजूद वजन खोते रहते हैं।
कैंसर में वजन तेजी से क्यों गिरता है?
कई अध्ययनों के अनुसार, कैंसर में वजन गिरने के पीछे कई जटिल जैविक प्रक्रियाएं काम करती हैं। शरीर का मेटाबॉलिज्म असामान्य रूप से तेज हो जाता है। इसका मतलब है कि शरीर आराम की अवस्था में भी अधिक ऊर्जा खर्च करता है।
इसके अलावा:
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मांसपेशियों को तोड़ने वाली प्रक्रियाएं सक्रिय हो जाती हैं
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फैट टिश्यू तेजी से घटता है
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भूख नियंत्रित करने वाले हार्मोन्स प्रभावित होते हैं
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सूजनकारी रसायन शरीर में बढ़ जाते हैं
लेकिन हालिया शोध बताता है कि कहानी यहीं खत्म नहीं होती।
पुरानी धारणा: क्या केवल सूजन जिम्मेदार थी?
पहले वैज्ञानिक मानते थे कि ट्यूमर से उत्पन्न सूजनकारी तत्व (Inflammatory mediators) ही कैशेक्सिया के मुख्य कारण हैं। यह माना जाता था कि ये रसायन शरीर के ऊर्जा संतुलन को बिगाड़ देते हैं और मांसपेशियों को तोड़ने लगते हैं।
हालांकि, सूजन की भूमिका महत्वपूर्ण है, लेकिन नई रिसर्च इसे पूरी तस्वीर नहीं मानती।
नई रिसर्च: न्यूरो-मेटाबॉलिक गड़बड़ी पर फोकस
नए वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, कैंसर कैशेक्सिया केवल सूजन की बीमारी नहीं बल्कि दिमाग और लीवर के बीच संचार प्रणाली में गड़बड़ी का परिणाम हो सकती है।
दिमाग (Brain) शरीर के ऊर्जा संतुलन को नियंत्रित करता है, जबकि लीवर (Liver) ग्लूकोज उत्पादन, ऊर्जा भंडारण और मेटाबॉलिज्म में अहम भूमिका निभाता है। दोनों के बीच तंत्रिका संकेतों का एक जटिल नेटवर्क काम करता है।
जब कैंसर से उत्पन्न सूजन इन तंत्रिका संकेतों को प्रभावित करती है, तो शरीर गलत निर्देशों का पालन करने लगता है।
दिमाग–लीवर संवाद कैसे बिगड़ता है?
सामान्य स्थिति में:
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दिमाग शरीर की ऊर्जा जरूरतों का आकलन करता है
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लीवर ऊर्जा रिलीज और स्टोरेज को नियंत्रित करता है
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तंत्रिका संकेत संतुलन बनाए रखते हैं
लेकिन जब यह संवाद बाधित होता है:
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शरीर जरूरत से ज्यादा ऊर्जा खर्च करता है
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मांसपेशियां तेजी से टूटने लगती हैं
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वजन गिरता रहता है, भले ही मरीज खाना खा रहा हो
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भूख और संतुष्टि संकेत गड़बड़ा जाते हैं
यही वजह है कि कई मरीजों में पोषण बढ़ाने के बावजूद सुधार नहीं दिखता।
क्या ज्यादा खाना खाने से समस्या हल हो सकती है?
सीधा उत्तर है — नहीं।
क्योंकि कैंसर कैशेक्सिया केवल पोषण की कमी नहीं, बल्कि एक गहरी मेटाबॉलिक और न्यूरोलॉजिकल गड़बड़ी है। जब तक शरीर के ऊर्जा नियंत्रण तंत्र को संतुलित नहीं किया जाएगा, तब तक केवल डाइट से स्थिति को पूरी तरह नियंत्रित करना संभव नहीं है।
इलाज की नई संभावनाएं
नई खोजों ने चिकित्सा क्षेत्र में उम्मीद जगाई है। भविष्य में संभावित उपचार दिशाएं हो सकती हैं:
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ब्रेन-लीवर कम्युनिकेशन को मॉड्यूलेट करना
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न्यूरल सिग्नलिंग को संतुलित करने वाली दवाएं
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एंटी-इंफ्लेमेटरी और मेटाबॉलिक थेरेपी का संयोजन
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मल्टी-डिसिप्लिनरी कैंसर केयर मॉडल
हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि यह तंत्र अत्यंत जटिल है और इसे नियंत्रित करने के लिए गहन अनुसंधान की आवश्यकता होगी।
मरीजों और परिवारों के लिए इसका क्या अर्थ है?
यह नई समझ महत्वपूर्ण है क्योंकि:
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इसे एक स्वतंत्र और गंभीर चिकित्सा स्थिति के रूप में पहचाना जा रहा है
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शुरुआती पहचान से जीवन की गुणवत्ता बेहतर की जा सकती है
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इलाज के दौरान बेहतर सपोर्टिव केयर दी जा सकती है
यह शोध भविष्य में कैंसर मरीजों के उपचार परिणामों को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है।
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