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Cricket : ‘किंग’ कोहली का टेस्ट क्रिकेट से संन्यास, कहा आसान नहीं, लेकिन यही सही है

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  • -कोहली ने सोमवार को टेस्ट क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की
  • -टी20 के दौर में भी पारंपरिक क्रिकेट के संकटमोचकों में शुमार महान खिलाड़ी के इस प्रारूप में सुनहरे कैरियर पर विराम
  • -36 वर्षीय कोहली ने पिछले साल ही टी20 अंतरराष्ट्रीय से संन्यास ले लिया था
  • -अब वह सिर्फ एक दिवसीय क्रिकेट खेलेंगे

Cricket : नई दिल्ली। भारत के सफलतम टेस्ट कप्तान और पिछले एक दशक से भारतीय बल्लेबाजी की धुरी रहे विराट कोहली ने सोमवार को टेस्ट क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की, जिससे टी20 के दौर में भी पारंपरिक क्रिकेट के संकटमोचकों में शुमार इस महान खिलाड़ी के इस प्रारूप में सुनहरे कैरियर पर विराम लग गया। 36 वर्षीय कोहली ने पिछले साल ही टी20 अंतरराष्ट्रीय से संन्यास ले लिया था। अब वह सिर्फ एक दिवसीय क्रिकेट खेलेंगे। उन्होंने भारत के लिए 123 टेस्ट मैच खेले हैं, जिसमें उन्होंने 46.85 के औसत से 30 शतकों की मदद से 9230 रन बनाए हैं। जब टी20 क्रिकेट वैश्विक स्तर पर सुर्खियों में था, तब वह टेस्ट प्रारूप को बचाने की मुहिम में सबसे आगे थे। कोहली ने स्वीकार किया कि यह फैसला करना आसान नहीं था, जिससे खेल के लंबे प्रारूप में उनके भविष्य को लेकर अटकलों का दौर खत्म हो गया।

सभी का आभार, स्मिथ, पोंटिंग और स्टीव के बाद सबसे सफल टेस्ट कप्तान

कोहली ने अपने इंस्टाग्राम पेज पर घोषणा की, ‘मैं खेल के लिए, जिन लोगों के साथ मैदान में खेला और हर उस व्यक्ति के लिए दिल में आभार लेकर जा रहा हूं, जिसने मुझे इस खेल के दौरान खेलते हुए देखा है।’ वर्ष 2011 में पदार्पण करने के बाद से कोहली ने भारत को इस प्रारूप में दुनिया की नंबर एक टीम बनाया और 2018-19 में ऑस्ट्रेलिया में ऐतिहासिक श्रृंखला जीत दिलाई। उनकी कप्तानी में भारत ने 68 में से 40 टेस्ट जीते और वह दक्षिण अफ्रीका के ग्रीम स्मिथ, आस्ट्रेलिया के रिकी पोंटिंग और स्टीव वॉ के बाद सबसे सफल टेस्ट कप्तान रहे।

पहली बार 14 साल पहले ‘बैगी ब्लू’ पहनी

‘टेस्ट क्रिकेट में पहली बार 14 साल पहले ‘बैगी ब्लू’ पहनी थी। सच कहूं तो मैंने कभी नहीं सोचा था कि यह प्रारूप मुझे किस सफर पर ले जाएगा। इसने मेरी परीक्षा ली, मुझे गढा और मुझे ऐसे सबक सिखाए, जिन्हें मैं जीवन भर अपने साथ रखूंगा।’ इस मेगास्टार का आखिरी टेस्ट ऑस्ट्रेलिया दौरा था जो काफी निराशाजनक रहा था, जिसमें उन्होंने सिर्फ एक शतक बनाया था। इस तरह उनके करियर का अंत 10,000 रन के आंकड़े से कम रहा, जिसे एक समय औपचारिकता माना जा रहा था।

दिग्गज के रूप में पहचान बनाई

दाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने 7 दोहरे शतकों के साथ इस प्रारूप के दिग्गज के रूप में अपनी पहचान बनाई जो किसी भारतीय खिलाड़ी के लिए सबसे अधिक है। वह महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर (4), सचिन तेंदुलकर (6), वीरेंद्र सहवाग (6) और राहुल द्रविड़ (5) से काफी आगे है।

सर विव रिचर्ड्स ने भी स्वीकारा
ऐसे समय में जब टी20 लीग अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में काफी लोकप्रिय और सबसे ज्यादा देखी जाने वाली लीग बन गईं हैं तब कोहली के जादू ने प्रशंसकों को टेस्ट क्रिकेट से जोड़े रखने में अहम भूमिका निभाई। यह बात सर विव रिचर्ड्स ने भी स्वीकार की जिनके साथ अक्सर उनकी शैली और आक्रामकता की तुलना की जाती थी। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में कोहली यह आक्रामकता कम कर दी थी।

यह लिखा विदाई नोट में

कोहली ने क्रिकेट के इस प्रारूप के लिए अपने विदाई नोट में लिखा, ‘‘सफेद कपड़ों में खेलना अंदरूनी रूप से बहुत ही व्यक्तिगत होता है। शांति से मेहनत करना, लंबे दिन, छोटे-छोटे पल जिन्हें कोई नहीं देखता लेकिन ये पल हमेशा आपके साथ रहते हैं। ‘जब मैं खेल के इस प्रारूप से दूर जा रहा हूं तो यह आसान नहीं है। लेकिन यह सही लगता है। मैंने इसे अपना सबकुछ दिया है और इसने मुझे उम्मीदों से कहीं अधिक दिया है। मैं हमेशा अपने टेस्ट करियर को मुस्कुराते हुए देखूंगा। ‘

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