कराटे और जूडो
कराटे और जूडो जैसे कॉम्बैट खेलों में जीत का जुनून, मजबूत तकनीक और मानसिक दृढ़ता जितनी महत्वपूर्ण है, उतनी ही जरूरी खिलाड़ियों की सुरक्षा भी है। मुकाबले के दौरान सिर, कंधे, घुटने और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोट लगने का खतरा हमेशा बना रहता है। विशेषज्ञों का मानना है कि कराटे और जूडो में चोट से बचाव के लिए सही तकनीक, वैज्ञानिक प्रशिक्षण, पर्याप्त वार्मअप, समय पर इलाज और धैर्यपूर्ण रिकवरी बेहद जरूरी है।
एक छोटी सी लापरवाही खिलाड़ी के प्रदर्शन के साथ-साथ उसके पूरे करियर को भी प्रभावित कर सकती है। इसलिए कनकशन (सिर की चोट), फ्रैक्चर, शोल्डर डिस्लोकेशन और लिगामेंट इंजरी जैसी समस्याओं को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
कराटे और जूडो खिलाड़ियों को होने वाली आम चोटें
कॉम्बैट स्पोर्ट्स में खिलाड़ियों को सबसे अधिक खतरा इन चोटों से होता है:
- सिर की चोट (Concussion)
- फ्रैक्चर (हड्डी टूटना)
- शोल्डर डिस्लोकेशन
- लिगामेंट इंजरी
- घुटने और टखने की चोट
- मांसपेशियों में खिंचाव
इन चोटों से बचने के लिए सही तकनीक और प्रशिक्षित कोच की निगरानी बेहद जरूरी है।
सिर की चोट (Concussion) को हल्के में न लें
खेल चिकित्सा विभाग, पीजीआईएमएस रोहतक के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. राजेश रोहिल्ला के अनुसार कराटे में हेड किक या पंच और जूडो में गलत तरीके से गिरने के कारण कनकशन हो सकता है। यह मस्तिष्क की एक गंभीर कार्यात्मक चोट है, जिसमें तेज झटके के कारण दिमाग खोपड़ी के अंदर तेजी से हिलता है।
कनकशन के तत्काल लक्षण
- सिरदर्द
- चक्कर आना
- भ्रम की स्थिति
- संतुलन बिगड़ना
- याददाश्त में अस्थायी कमी
लंबे समय के प्रभाव
- लगातार सिरदर्द
- चिड़चिड़ापन
- ध्यान केंद्रित करने में परेशानी
- नींद संबंधी समस्याएं
- तेज रोशनी और आवाज से परेशानी
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि यदि किसी खिलाड़ी में ये लक्षण दिखाई दें तो उसे तुरंत ट्रेनिंग या प्रतियोगिता से हटाकर डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।
फ्रैक्चर और शोल्डर डिस्लोकेशन में कितना समय लगता है?
फ्रैक्चर रिकवरी
अधिकांश मामलों में हड्डी को पूरी तरह जुड़ने में लगभग 6 से 8 सप्ताह लगते हैं। हालांकि खिलाड़ी को दोबारा मैट पर लौटने में 3 से 6 महीने तक का समय लग सकता है।
शोल्डर डिस्लोकेशन
शोल्डर डिस्लोकेशन होने पर शुरुआत में 3 से 4 सप्ताह तक हाथ को स्लिंग में रखा जाता है। इसके बाद फिजियोथेरेपी और पुनर्वास शुरू किया जाता है। आमतौर पर खिलाड़ी 3 से 4 महीने में दोबारा मुकाबले के लिए तैयार हो जाता है।
इंटरनल ब्लीडिंग के संकेत जिन्हें नजरअंदाज न करें
मैच के दौरान पेट या छाती पर जोरदार प्रहार से आंतरिक रक्तस्राव का खतरा हो सकता है। निम्न संकेत दिखने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें:
- पेट में अचानक तेज दर्द
- पेट का असामान्य रूप से फूलना
- बार-बार उल्टी होना
- चक्कर आना या बेहोशी
- नाड़ी की गति तेज होना
- ब्लड प्रेशर गिरना
- पेशाब में खून आना
खिलाड़ियों की सुरक्षा में वार्मअप और कूलडाउन की भूमिका
स्पोर्ट्स फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. हेमलता के अनुसार मैच या हाई-इंटेंसिटी ट्रेनिंग से पहले वार्मअप और बाद में कूलडाउन करना बेहद जरूरी है।
कूलडाउन के फायदे
- मांसपेशियों की जकड़न कम होती है
- रक्त संचार बेहतर होता है
- हार्ट रेट सामान्य होता है
- चोट का जोखिम कम होता है
- रिकवरी तेज होती है
इसके अलावा, खेल के बाद आइस बाथ लेने से सूजन, दर्द और थकान कम करने में मदद मिलती है।
बच्चों को चोट का ज्यादा खतरा क्यों?
जूडो कोच अजय के अनुसार शुरुआती खिलाड़ियों को तकनीक की पूरी जानकारी नहीं होती, इसलिए चोट लगने की संभावना अधिक रहती है। यही कारण है कि ट्रेनिंग शुरू करने से पहले स्ट्रेचिंग, रनिंग और रोलिंग जैसी गतिविधियों पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
किस उम्र में शुरू करें जूडो?
विशेषज्ञों के अनुसार बच्चे को लगभग 8 वर्ष की उम्र से जूडो की ट्रेनिंग शुरू करनी चाहिए। इस उम्र में बच्चे सही तरीके से गिरने (फॉलिंग और रोलिंग तकनीक) सीख जाते हैं, जिससे भविष्य में गंभीर चोटों का खतरा काफी कम हो जाता है।
जोड़ों को मजबूत बनाने वाली एक्सरसाइज
- Squats
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