रोहतक स्थित Maharshi Dayanand University के सेंटर फॉर बायोइंफॉर्मेटिक्स (CBINF) ने सत्र 2026 के लिए एमएससी बायोइंफॉर्मेटिक्स और पीजी डिप्लोमा इन कम्प्यूटेशनल बायोलॉजी (PGDCB) में एडमिशन प्रक्रिया शुरू कर दी है। आधुनिक तकनीकों पर आधारित यह कोर्स युवाओं को बायोटेक्नोलॉजी, जीनोमिक्स, मशीन लर्निंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कंप्यूटर आधारित ड्रग डिजाइनिंग जैसे हाई-डिमांड क्षेत्रों में करियर बनाने का मौका देगा।
यह कोर्स खासतौर पर उन छात्रों के लिए फायदेमंद है जो लाइफ साइंस, बायोटेक्नोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री या कंप्यूटर आधारित रिसर्च में रुचि रखते हैं। विभाग का दावा है कि यहां से पढ़ने वाले विद्यार्थी भारत के साथ-साथ USA, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और यूरोप के प्रतिष्ठित संस्थानों में रिसर्च और उच्च शिक्षा के अवसर प्राप्त कर रहे हैं।
एमएससी और पीजी डिप्लोमा कोर्स में शुरू हुए एडमिशन
सेंटर फॉर बायोइंफॉर्मेटिक्स द्वारा दो प्रमुख कोर्स ऑफर किए जा रहे हैं:
- एमएससी बायोइंफॉर्मेटिक्स (2 वर्षीय)
- पीजी डिप्लोमा इन कम्प्यूटेशनल बायोलॉजी – PGDCB (1 वर्षीय)
सीबीआईएनएफ निदेशक डॉ. महक डांगी के अनुसार, बीएससी लाइफ साइंस या संबंधित विषयों से ग्रेजुएशन करने वाले छात्र इन कोर्सेज के लिए पात्र हैं।
रेगुलर कोर्स के साथ भी कर सकते हैं PGDCB
PGDCB की सबसे खास बात यह है कि इसे किसी अन्य रेगुलर पीजी कोर्स के साथ भी किया जा सकता है। यानी जो छात्र एमएससी, बायोटेक्नोलॉजी या लाइफ साइंस में पोस्ट ग्रेजुएशन कर रहे हैं, वे अपनी कम्प्यूटेशनल और डेटा एनालिसिस स्किल्स बढ़ाने के लिए इस डिप्लोमा को साथ में कर सकते हैं।
आज के समय में बायोइंफॉर्मेटिक्स और AI आधारित रिसर्च तेजी से बढ़ रही है, इसलिए यह कोर्स छात्रों को इंडस्ट्री रेडी बनाने में मदद करेगा।
ब्लेंडेड मोड में होगी पढ़ाई
यह डिप्लोमा प्रोग्राम पिछले तीन वर्षों से सफलतापूर्वक संचालित किया जा रहा है और छात्रों के बीच इसका क्रेज लगातार बढ़ रहा है। कोर्स को ब्लेंडेड मोड यानी ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से संचालित किया जाता है।
कोर्स में सिखाई जाने वाली मुख्य तकनीकें
- कंप्यूटर आधारित ड्रग डिजाइनिंग
- प्रोटीन विश्लेषण
- जीनोमिक्स और जीन डेटा एनालिसिस
- मशीन लर्निंग और AI
- बायोलॉजिकल डेटा प्रोसेसिंग
- कम्प्यूटेशनल बायोलॉजी टूल्स और सॉफ्टवेयर
विदेशों में रिसर्च और पीएचडी के अवसर
विभाग के कई विद्यार्थी विदेशों के टॉप संस्थानों में पीएचडी और पोस्ट-डॉक रिसर्च कर रहे हैं। USA, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और यूरोप की यूनिवर्सिटीज में बायोइंफॉर्मेटिक्स विशेषज्ञों की भारी मांग है।
मशीन लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को बायोइंफॉर्मेटिक्स के साथ जोड़कर छात्र हेल्थकेयर, जेनेटिक्स और ड्रग रिसर्च में नई खोजों पर काम कर रहे हैं।
बायोइंफॉर्मेटिक्स में करियर की अपार संभावनाएं
1. अकादमिक और शिक्षण क्षेत्र
- असिस्टेंट प्रोफेसर / लेक्चरर
- बायोटेक्नोलॉजी और लाइफ साइंस फैकल्टी
- स्कूल पीजीटी बायोलॉजी टीचर
2. रिसर्च और डेवलपमेंट सेक्टर
- रिसर्च साइंटिस्ट
- बायोइंफॉर्मेटिक्स रिसर्च एसोसिएट
- जीनोमिक डेटा एनालिस्ट
- पीएचडी और पोस्ट-डॉक रिसर्च
3. कॉर्पोरेट और इंडस्ट्री सेक्टर
- फार्मास्युटिकल कंपनियों में ड्रग डिजाइनिंग एक्सपर्ट
- क्लीनिकल डेटा एनालिस्ट
- हेल्थकेयर डेटा साइंटिस्ट
- जेनेटिक टेस्टिंग स्पेशलिस्ट
4. सरकारी और प्रशासनिक अवसर
- पेटेंट ऑफिसर
- क्लीनिकल डेटा मैनेजर
- सरकारी हेल्थ प्रोजेक्ट्स में रिसर्च पद
- बायोटेक स्टार्टअप और हेल्थकेयर उद्यमिता
क्यों बढ़ रही है बायोइंफॉर्मेटिक्स की डिमांड?
आज हेल्थकेयर, फार्मा और AI सेक्टर तेजी से डिजिटल हो रहे हैं। ऐसे में बायोलॉजिकल डेटा को समझने और उसका विश्लेषण करने वाले विशेषज्ञों की मांग लगातार बढ़ रही है।
मशीन लर्निंग, डेटा साइंस और जीनोमिक्स का कॉम्बिनेशन भविष्य के सबसे तेजी से बढ़ते करियर विकल्पों में शामिल माना जा रहा है।
