• Thu. Apr 23rd, 2026

Haryana , करियर और मनोरंजन की ख़बरें - Vartahr

हरियाणा, देश विदेश, करियर, खेल, बाजार और मनोरंजन की ख़बरें

विश्व पुस्तक दिवस 2026: नई पीढ़ी को पौराणिक कथाओं से जोड़ रहे लेखक निलेश पाठक

Byadmin

Apr 23, 2026

विश्व पुस्तक दिवस 2026

 

भारतीय पौराणिक कथाओं को आधुनिक अंदाज़ में प्रस्तुत करने की कोशिशों के बीच लेखक निलेश पाठक का नाम तेजी से उभर रहा है। परंपरा और कल्पना के संतुलन के साथ वे ऐसी कहानियां लिख रहे हैं जो युवा पाठकों को आकर्षित करती हैं और साथ ही भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों से भी जोड़े रखती हैं।
उत्तर प्रदेश के जौनपुर में जन्मे और इंदौर में शिक्षित निलेश पाठक पेशे से ऑटोमोबाइल सेल्स ट्रेनर हैं। पेशेवर जीवन के साथ-साथ उन्होंने लेखन को भी निरंतर जारी रखा।जबलपुर रिड्स समूह द्वारा आमंत्रित किए जाने पर जबलपुर आए नीलेश पाठक ने बताया कि
छात्र जीवन से ही उन्हें लिखने का शौक था। शुरुआत छोटी कविताओं और संक्षिप्त रचनाओं से हुई। धीरे-धीरे यह रुचि एक नियमित अभ्यास में बदल गई।
साल 2015 के आसपास उन्होंने लेखन को गंभीरता से लेना शुरू किया और कविता, मोनोलॉग सहित कई रचनात्मक प्रयोग किए। इसी दौरान एक ऐसे कथानक की कल्पना आकार लेने लगी जिसने आगे चलकर आयुध माइथोवर्स का रूप लिया।
सनातन परंपरा से मिली प्रेरणापारंपरिक ब्राह्मण परिवार में पले-बढ़े निलेश पाठक पर धार्मिक और सांस्कृतिक वातावरण का गहरा प्रभाव रहा। बचपन से ही महाभारत, रामायण और शिव पुराण जैसे

ग्रंथों से उनका जुड़ाव रहा है।

विशेष रूप से भगवान शिव की निष्पक्ष दृष्टि और व्यापक चिंतन ने उनके विचारों को प्रभावित किया, जिसकी झलक उनके लेखन में दिखाई देती है।
आयुध श्रृंखला पर काम शुरू करने से पहले उन्होंने प्राचीन ग्रंथों का अध्ययन भी किया। उनका मानना है कि पौराणिक कथाओं को बदले बिना उनके आसपास नए काल्पनिक कथानक रचे जा सकते हैं, जिससे पाठकों को नई कहानी भी मिले और परंपरा का सम्मान भी बना रहे।

सात-आठ साल की तैयारी से बना ‘आयुध माइथोवर्स’

निलेश पाठक की पहली प्रमुख कृति “भस्मांग पर्व” को पूरा होने में लगभग तीन वर्ष लगे। वहीं पूरे आयुध माइथोवर्स की अवधारणा को आकार देने में करीब सात से आठ वर्षों का समय लगा।
यह श्रृंखला पांच भागों में नियोजित है और खासतौर पर युवा पाठकों को ध्यान में रखकर लिखी गई है। इसमें एक्शन, भावनात्मक तत्व और पौराणिक संदर्भों को आधुनिक

शैली में प्रस्तुत किया गया है।

पाठकों के बीच इसकी सिनेमाई शैली और सरल भाषा की सराहना की जा रही है। श्रृंखला का अगला भाग “आयुध– निगस पर्व” जल्द आने की संभावना है। इसके साथ ही इसे अंग्रेज़ी संस्करण और ऑडियोबुक के रूप में भी लाने की योजना है।
निलेश पाठक की रचनाओं को पाठकों तक पहुंचाने में विचार प्रकाशन की भी महत्वपूर्ण भूमिका है, जो नए और मौलिक लेखन को मंच देने का प्रयास कर रहा है।

“मेरा प्रयास यह नहीं है कि पौराणिक कथाओं को बदला जाए, बल्कि उनके आधार पर नई कहानियां रची जाएं, ताकि युवा पाठक अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहते हुए आधुनिक शैली में उन्हें पढ़ सकें।”

— निलेश पाठक

सारे निश्चय पूर्ण कर जाऊंगा मैं,
उस के बाद ही नीरवता से मर पाऊंगा मैं,

लाख जंजीरे मुझे रोकें भले ही,
जग की सारी भीड़ मुझको टोंके भले ही,

पैर के छाले भले ही फूट जाएं
पर कृपा हो, सारे बन्धन टूट जाए,

मुक्त होकर मैं करूँ सर्वत्र विचरण
मार दू ऊंची छलांगे बन कर हिरण

प्राप्त वो हो जो सदा पर्याप्त हो,
साथ परमानंद भी सम्प्राप्त हो

सम्भवतः तभी अविमुक्त हो पाऊंगा मैं
उसी के बाद ही नीरवता से मर पाऊंगा मैं ।।।

मुझे अब केवल क्षितिज का सूर्य दिखता है,
और उसी की लालिमा की लालसा है

विस्मरण कैसे करूँ अपमान को,
सर्वस्व अर्पण है प्रतिष्ठा मान और सम्मान को,

उठ कर खड़ा हो जाऊं पापा की नज़र में,
हो नाम उनका भी मेरे सारे शहर में,

सम्भवतः तभी विश्राम कर पाउंगा मैं,
उसी के बाद ही नीरवता से मर पाऊंगा मैं ।।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *