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Epilepsy Treatment Research : पुरानी दवाओं ने जगाई नई उम्मीद: अब मिर्गी का इलाज होगा आसान

Byadmin

Mar 17, 2026
Epilepsy Treatment Research

एमडीयू रोहतक के शोध में ड्रग रीपरपजिंग से मिली बड़ी सफलता

रोहतक। चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। Maharshi Dayanand University (एमडीयू) रोहतक के सेंटर फॉर बायोइन्फॉर्मेटिक्स विभाग के शोधकर्ताओं ने Epilepsy (मिर्गी) के उपचार के लिए नई संभावनाओं का रास्ता खोला है।

विभाग के वैज्ञानिक Dr. Ajit Kumar के नेतृत्व में किए गए इस शोध में ‘Drug Repurposing’ तकनीक का उपयोग करते हुए तीन ऐसी पुरानी दवाओं की पहचान की गई है, जो भविष्य में मिर्गी के दौरों को नियंत्रित करने में प्रभावी साबित हो सकती हैं।

यह शोध अंतरराष्ट्रीय पत्रिका Scientific Reports (नेचर पोर्टफोलियो) में प्रकाशित हुआ है।


मिर्गी: एक गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी

विश्व स्तर पर मिर्गी एक गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी है। World Health Organization के अनुसार दुनिया भर में लगभग 5 करोड़ लोग इससे प्रभावित हैं, जबकि भारत में करीब 1.2 करोड़ मरीज हैं।

चिंताजनक बात यह है कि लगभग 30% मरीजों पर मौजूदा दवाएं असर नहीं करतीं, जिसे ‘ड्रग-रेसिस्टेंट सीजर’ कहा जाता है।


2,769 दवाओं का किया गया विश्लेषण

शोधकर्ताओं ने DrugBank डेटाबेस में मौजूद 2,769 दवाओं का कंप्यूटर आधारित विश्लेषण किया।

इसमें आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया:

  • मशीन लर्निंग

  • कंप्यूटेशनल मॉडलिंग

  • मॉलिक्यूलर डॉकिंग

शोध का उद्देश्य ऐसी दवाओं की पहचान करना था जो ब्लड-ब्रेन बैरियर को पार कर सकें और मिर्गी से जुड़े प्रमुख प्रोटीन पर असर डाल सकें, जैसे:

  • वोल्टेज-गेटेड सोडियम चैनल

  • GABA रिसेप्टर

  • वोल्टेज-गेटेड कैल्शियम चैनल

विश्लेषण के बाद 46 दवाएं प्रभावी पाई गईं, जिनमें से 3 सबसे अधिक संभावनाशील रहीं।


ये हैं तीन संभावित प्रभावी दवाएं

1. ऑक्साप्रोज़िन (Oxaprozin)

  • तीनों प्रमुख प्रोटीनों के साथ सबसे मजबूत बाइंडिंग

  • लंबे समय तक स्थिर रहने की क्षमता

  • सबसे अधिक प्रभावी मानी जा रही है

2. पिजोटिफ़ेन (Pizotifen)

  • मिर्गी के रिसेप्टर्स के साथ मजबूत जुड़ाव

  • दूसरे स्थान पर सबसे प्रभावी

3. साइप्रोहेप्टाडाइन (Cyproheptadine)

  • सुरक्षित दवा

  • जैविक लक्ष्यों को नियंत्रित करने की क्षमता


क्या है ड्रग रीपरपजिंग?

Drug Repurposing का मतलब है कि किसी बीमारी के लिए बनी दवा को दूसरी बीमारी के इलाज में इस्तेमाल करना।

उदाहरण के तौर पर Aspirin को पहले दर्द निवारक के रूप में बनाया गया था, लेकिन अब यह हार्ट और स्ट्रोक के जोखिम को कम करने में भी उपयोगी है।


क्यों खास है यह तरीका?Epilepsy Treatment Research

  • नई दवा बनाने में लगते हैं लगभग 15 साल

  • ड्रग रीपरपजिंग से समय घटकर 6–7 साल रह जाता है

  • दवाओं के साइड इफेक्ट पहले से ज्ञात होते हैं

  • लागत और रिसर्च समय में बड़ी बचत


आधुनिक तकनीक और मशीन लर्निंग की ताकत

यह शोध Machine Learning और बायोइन्फॉर्मेटिक्स की ताकत को भी दर्शाता है।

हालांकि इन दवाओं का परीक्षण अभी सेल लाइन्स पर होना बाकी है, लेकिन शुरुआती परिणाम बेहद सकारात्मक हैं।

यदि आगे के परीक्षण सफल रहते हैं, तो यह खोज खासकर उन मरीजों के लिए उम्मीद की किरण बन सकती है जिन पर मौजूदा दवाएं असर नहीं करतीं।


मिर्गी के खतरे और श्रेणियां

  • शारीरिक चोट: दौरे के दौरान गिरने से चोट का खतरा

  • स्टेटस एपिलेप्टिकस: लगातार दौरे आने पर कोमा या मृत्यु का खतरा

  • SUDEP: (Sudden Unexpected Death in Epilepsy) अचानक मृत्यु का दुर्लभ कारण


उम्मीद की नई किरण

यह शोध न केवल चिकित्सा विज्ञान में एक बड़ी उपलब्धि है, बल्कि लाखों मरीजों के लिए नई उम्मीद भी लेकर आया है। यदि यह दवाएं आगे के परीक्षणों में सफल रहती हैं, तो भविष्य में मिर्गी का इलाज अधिक प्रभावी, सस्ता और सुलभ हो सकता है।

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