moon eclipse 2026
- होली पर बना दुर्लभ संयोग, दोपहर 3:20 से शाम 6:46 बजे तक रहेगा ग्रहण
- ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह योग अत्यंत विशेष
- कुछ मंदिरों में परंपरा के अनुसार विशेष व्यवस्था की गई
देशभर में मंगलवार को साल का पहला चंद्रग्रहण दिखाई देगा। खास बात यह है कि इस बार फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा यानी होली के दिन चंद्रग्रहण का दुर्लभ संयोग बन रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह योग अत्यंत विशेष माना जाता है, क्योंकि होली जैसे पर्व पर चंद्रग्रहण बहुत कम अवसरों पर पड़ता है। ग्रहण का सूतक काल सुबह 6:20 बजे से शुरू हो जाएगा। सूतक काल लगते ही मंदिरों में दर्शन, हवन-पूजन, जप, अनुष्ठान और अन्य धार्मिक गतिविधियां पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेंगी। हालांकि कुछ मंदिरों में परंपरा के अनुसार विशेष व्यवस्था भी की गई है।
चंद्रग्रहण का समय
- शुरुआत: दोपहर 3:20 बजे
- पूर्ण ग्रहण प्रारंभ: शाम 4:34 बजे
- पूर्ण ग्रहण समाप्त: शाम 5:33 बजे
- ग्रहण का समापन: शाम 6:46 बजे
- ग्रहण समाप्त होने के बाद शाम लगभग 7 बजे शुद्धि प्रक्रिया के पश्चात अधिकांश मंदिरों के पट खोले जाएंगे।
सूतक काल के दौरान ये प्रतिबंधित
- मंदिरों के पट बंद रहेंगे
- मूर्तियों का स्पर्श वर्जित रहेगा
- हवन, पूजन, अनुष्ठान नहीं होंगे
- भोजन पकाने और खाने से परहेज किया जाता है
- गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है
- सूतक काल समाप्त होने के बाद स्नान, घर की शुद्धि और पूजा-पाठ करने की परंपरा है।
होली पर चंद्रग्रहण का दुर्लभ संयोग
- -प्रख्यात ज्योतिषाचार्य गुरु पं. रामजीवन दुबे के अनुसार फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा पर चंद्रग्रहण का यह संयोग अत्यंत विरल है। इससे पहले:
- 3 मार्च 2007 को होली पर चंद्रग्रहण लगा था
- 13 मार्च 1979 को भी यह संयोग बना था
- अब अगला ऐसा योग 25 मार्च 2043 को बनेगा
- इस बार ग्रहण दोपहर 3:20 बजे से शाम 6:46 बजे तक रहेगा। यह समय धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है, इसलिए श्रद्धालुओं को संयम और सावधानी बरतनी चाहिए।
श्रीजी मंदिर रहेगा खुला
जहां एक ओर अधिकांश मंदिर सूतक काल के दौरान बंद रहेंगे, वहीं शहर के लखेरापुरा स्थित श्रीजी मंदिर में अलग परंपरा का पालन किया जाएगा। मंदिर के मुखिया श्रीकांत शर्मा ने बताया कि प्रभु श्री वल्लभाचार्य द्वारा स्थापित पुष्टिमार्गीय परंपरा में ग्रहण को संकटकाल माना जाता है, लेकिन इस समय भक्तों को भगवान से दूर नहीं रहना चाहिए, बल्कि उनकी शरण में रहना चाहिए। इसी मान्यता के अनुसार श्रीजी मंदिर के पट ग्रहण काल में भी खुले रहेंगे, ताकि श्रद्धालु प्रभु के दर्शन कर सकें और प्रार्थना कर सकें। यह परंपरा पुष्टिमार्गीय संप्रदाय की विशिष्ट पहचान मानी जाती है।
मां चामुंडा दरबार में विशेष व्यवस्था
भोपाल के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक मां चामुंडा दरबार में भी ग्रहण को लेकर विशेष प्रबंध किए गए हैं। हालांकि सूतक काल के दौरान नियमित धार्मिक गतिविधियां स्थगित रहेंगी, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।
धार्मिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण
धार्मिक मान्यता के अनुसार चंद्रग्रहण को आध्यात्मिक दृष्टि से संवेदनशील समय माना जाता है। इस दौरान मंत्र जाप, ध्यान और ईश्वर स्मरण को शुभ बताया गया है। वहीं वैज्ञानिक दृष्टिकोण से चंद्रग्रहण एक खगोलीय घटना है, जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है, जिससे पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है। हालांकि वैज्ञानिक रूप से यह एक सामान्य खगोलीय प्रक्रिया है, लेकिन भारतीय संस्कृति में इसका धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व भी उतना ही गहरा है।
प्रशासन की अपील
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और शांति एवं संयम बनाए रखें। ग्रहण के दौरान अनावश्यक भीड़ से बचने और सुरक्षा नियमों का पालन करने की सलाह दी गई है।
ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष महत्व
होली के दिन पड़ रहा यह चंद्रग्रहण धार्मिक, सांस्कृतिक और ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। जहां एक ओर मंदिरों में सूतक काल के चलते पाबंदियां रहेंगी, वहीं कुछ स्थानों पर परंपरा के अनुसार दर्शन जारी रहेंगे। श्रद्धालुओं के लिए यह समय संयम, साधना और आस्था का प्रतीक माना जा रहा है।
