• Wed. Feb 25th, 2026

Haryana , करियर और मनोरंजन की ख़बरें - Vartahr

हरियाणा, देश विदेश, करियर, खेल, बाजार और मनोरंजन की ख़बरें

SGT University

SGT University

हर दौर में राष्ट्र अपनी पहचान शब्दों, विचारों और मूल्यों से गढ़ता है। बदलते वैश्विक परिदृश्य में यह प्रक्रिया और भी महत्वपूर्ण हो गई है। इसी संदर्भ में Shree Guru Gobind Singh Tricentenary University (SGT University) में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ने “Changing Dynamics of India’s Narrative” विषय पर व्यापक चर्चा का मंच प्रदान किया।

गुरुग्राम स्थित इस विश्वविद्यालय में देश-विदेश के विचारकों, शिक्षाविदों और नीति विशेषज्ञों ने एक स्वर में कहा—स्पष्ट और सुसंगत नैरेटिव ही अंतरराष्ट्रीय साझेदारी और राष्ट्रीय मनोबल को सुदृढ़ करने की कुंजी है।


सम्मेलन का उद्देश्य: भारत के नैरेटिव की बदलती दिशा

आज का दौर केवल सैन्य या आर्थिक शक्ति का नहीं, बल्कि नैरेटिव कूटनीति (Narrative Diplomacy) का है। राष्ट्र अब:

  • डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपनी छवि गढ़ रहे हैं

  • सांस्कृतिक विरासत को सॉफ्ट पावर में बदल रहे हैं

  • वैश्विक जनमत को रणनीतिक संप्रेषण से प्रभावित कर रहे हैं

SGT University में आयोजित यह सम्मेलन इन्हीं पहलुओं पर केंद्रित था।

सहयोग और प्रायोजन

इस सम्मेलन का आयोजन फैकल्टी ऑफ ह्यूमैनिटीज, सोशल साइंसेज एंड लिबरल आर्ट्स द्वारा किया गया। इसमें प्रमुख सहयोगी रहे:

  • Indian Council of World Affairs

  • Indian Council of Social Science Research

यह सहयोग दर्शाता है कि विषय केवल अकादमिक चर्चा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय नीति विमर्श का हिस्सा है।


पैनल चर्चा: Narrative Diplomacy – Theory and Praxis

पहले दिन की शुरुआत “Narrative Diplomacy: Theory and Praxis” विषय पर पैनल चर्चा से हुई।

चर्चा के प्रमुख बिंदु

  • 21वीं सदी में कथानक और धारणा-निर्माण की बढ़ती भूमिका

  • डिजिटल मीडिया का कूटनीति में प्रभाव

  • सांस्कृतिक स्मृति और प्रतीकों की ताकत

  • रणनीतिक संप्रेषण की अनिवार्यता

विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि आज राष्ट्र केवल पारंपरिक शक्ति-राजनीति से नहीं, बल्कि वैधता की प्रतिस्पर्धा से भी अपनी जगह बना रहे हैं।


डिजिटल युग में भारत का नैरेटिव

वक्ताओं ने कहा कि भारत के पास:

  • प्राचीन सभ्यतागत विरासत

  • सांस्कृतिक पूंजी

  • प्रवासी भारतीय नेटवर्क

  • लोकतांत्रिक ढांचा

ये सभी मिलकर भारत को एक विशिष्ट ग्लोबल नैरेटिव एडवांटेज देते हैं।

लेकिन इसके लिए आवश्यक है:

  • विश्वसनीयता

  • अनुकूलनशीलता

  • नैतिक आधार

  • स्पष्ट नीति संप्रेषण


उद्घाटन सत्र: गरिमा और रणनीतिक सोच

कार्यक्रम का शुभारंभ ‘वंदे मातरम्’ और दीप प्रज्वलन से हुआ। उद्घाटन सत्र में प्रमुख वक्ताओं ने वैश्विक परिदृश्य में भारत की भूमिका पर विचार रखे।

उन्होंने कहा:

“भू-राजनीतिक परिवर्तन और डिजिटल तीव्रता के इस दौर में स्पष्ट नैरेटिव ही अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों को मजबूत करता है।”

यह बात विशेष रूप से प्रासंगिक है जब भारत अपनी विदेश नीति, फॉरेन प्रिंसिपल्स और रणनीतिक हितों को नए सिरे से परिभाषित कर रहा है।


पुस्तक विमोचन: सॉफ्ट पावर पर अकादमिक प्रतिबद्धता

सम्मेलन के दौरान पुस्तक
“Stories, Soft Power and Strategy: India’s Narrative Diplomacy in the 21st Century” का विमोचन भी हुआ।

इस पुस्तक ने यह रेखांकित किया कि:

  • सॉफ्ट पावर केवल सांस्कृतिक प्रदर्शन नहीं

  • बल्कि रणनीतिक उपकरण है

  • और अकादमिक शोध इसकी बौद्धिक आधारशिला है


विशेष सत्र: The Power of Perception

“द पावर ऑफ परसेप्शन: नैरेटिव डिप्लोमेसी एंड ऑपरेशन सिंदूर” विषयक सत्र ने चर्चा को व्यावहारिक आयाम दिया।

इस सत्र में:

  • वडोदरा से सांसद हेमांग जोशी

  • प्रो. (डॉ.) हेमंत वर्मा

ने बताया कि आधुनिक रणनीतिक कार्रवाइयाँ दो स्तरों पर चलती हैं:

  1. सैन्य

  2. डिजिटल और संचार आधारित

ऑपरेशन सिंदूर: प्रतीक और फ्रेमिंग की शक्ति

सत्र में “ऑपरेशन सिंदूर” को एक केस स्टडी की तरह प्रस्तुत किया गया। बताया गया कि:

  • नामकरण (Naming)

  • फ्रेमिंग (Framing)

  • मीडिया प्रस्तुति

जनधारणा को गहराई से प्रभावित करते हैं।

यहाँ “नैरेटिव संप्रभुता” शब्द पर विशेष बल दिया गया—यानी राष्ट्र को अपनी कहानी स्वयं लिखनी चाहिए।


राम बहादुर राय का संबोधन: सॉफ्ट पावर की गहराई

विशेष सत्र में पद्मश्री व पद्मभूषण से सम्मानित Ram Bahadur Rai ने नैरेटिव और सॉफ्ट पावर की व्याख्या की।

उन्होंने विभिन्न ऐतिहासिक संदर्भों में उल्लेख किया:

  • Mahatma Gandhi

  • Indira Gandhi

  • Jawaharlal Nehru

  • Chou En-lai

इन उदाहरणों के माध्यम से उन्होंने बताया कि:

  • विचार और दृष्टिकोण इतिहास बदल सकते हैं

  • जवाबदेही और पारदर्शिता आवश्यक हैं

  • रणनीतिक संप्रेषण और लोकतंत्र में संतुलन जरूरी है


क्यों जरूरी है स्पष्ट और सुसंगत नैरेटिव?

आज का विश्व:

  • बहुध्रुवीय (Multipolar)

  • डिजिटल रूप से जुड़ा

  • सूचना युद्ध से प्रभावित

ऐसे में स्पष्ट नैरेटिव से मिलते हैं:

1. अंतरराष्ट्रीय साझेदारी को मजबूती

स्पष्ट नीति से भरोसा बढ़ता है।

2. राष्ट्रीय मनोबल में वृद्धि

जब नागरिकों को स्पष्ट दृष्टि मिलती है, आत्मविश्वास बढ़ता है।

3. वैश्विक छवि में सुधार

सुसंगत संचार से ब्रांड इंडिया मजबूत होता है।

4. सॉफ्ट पावर में विस्तार

योग, संस्कृति, लोकतंत्र, तकनीक—सब नैरेटिव का हिस्सा बनते हैं।


SGT University

भारत की नैरेटिव रणनीति: आगे का रास्ता

SGT University सम्मेलन ने संकेत दिया कि भविष्य की रणनीति में शामिल होंगे:

  • डिजिटल डिप्लोमेसी

  • थिंक टैंक सहयोग

  • प्रवासी नेटवर्क सक्रियता

  • विश्वविद्यालय आधारित विमर्श

यह केवल सरकारी प्रयास नहीं, बल्कि अकादमिक और सामाजिक भागीदारी का संयुक्त मॉडल है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *