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Street Vendor Struggle

  • एक घंटे तक चला हाई-वोल्टेज ड्रामा
  • फड़ी हटाने पहुंचे पार्षद, बोले, यहां नहीं लगेगी ठेली
  • फड़ी वालों का पलटवार, 20 साल से यहीं कमा रहे, बच्चे भूखे मर जाएंगे
  • दूसरी जगह पर न ग्राहक, न कमाई कहकर किया विरोध

रोहतक। सेक्टर-2-3 मार्केट शनिवार को किसी टीवी डिबेट शो से कम नहीं लगी। फर्क बस इतना था कि यहां एंकर नहीं था, लेकिन आवाजें ऊंची थीं, तर्क तेज थे और भावनाएं फुल ऑन। करीब एक घंटे तक पार्षद और फड़ी लगाने वालों के बीच जमकर हंगामा चला। कभी हाथ हवा में लहराए गए, कभी “हम नहीं हटेंगे” के नारे लगे, तो कभी “नियम सबके लिए एक हैं” की रट सुनाई दी। मामला फड़ी लगाने को लेकर था। पार्षद मौके पर पहुंचे और साफ शब्दों में कहा कि सेक्टर-2-3 की मार्केट में अब फड़ी नहीं लगेगी। नगर निगम की ओर से इनके लिए दूसरी जगह तय कर दी गई है और सभी को वहीं जाकर ठेली लगाने के निर्देश दिए गए हैं। इस फैसले से करीब 100 फड़ी लगाने वालों की रोजी-रोटी पर सीधा असर पड़ा है। बस यही बात फड़ी लगाने वालों को नागवार गुजरी और देखते ही देखते माहौल गरमा गया।


20 साल से यहीं हैं, अब कहां जाएं

फड़ी लगाने वालों ने एक सुर में कहा कि वे पिछले करीब 20 साल से इसी मार्केट में सब्जी, फल और छोटे-मोटे सामान की फड़ी लगा रहे हैं। यही उनकी रोजी-रोटी है। एक फड़ी वाले ने भावुक अंदाज में कहा, “साहब, यहीं से बच्चों की फीस जाती है, घर का चूल्हा जलता है। अगर यहां से हटा दिया तो हमारे बच्चे भूखे मर जाएंगे।
किसी ने कहा कि दूसरी जगह पर न तो ग्राहक आते हैं और न ही काम चलता है। वहां दिनभर बैठे रहो, एक सब्जी भी नहीं बिकती, ऐसा कहकर फड़ी वालों ने नई जगह को सिरे से खारिज कर दिया।

पार्षद का दो टूक जवाब

पार्षद भी अपने स्टैंड पर अड़े रहे। उन्होंने कहा कि बाजार में फड़ी लगने से ट्रैफिक जाम होता है, दुकानदारों को दिक्कत होती है और पैदल चलने वालों के लिए रास्ता तक नहीं बचता। पार्षद का कहना था कि नगर निगम ने वैकल्पिक व्यवस्था कर दी है, इसलिए नियम मानना सबके लिए जरूरी है। पार्षद बोले कि यहां रोज झगड़े होते हैं, शिकायतें आती हैं। व्यवस्था बनाए रखने के लिए फड़ी यहां नहीं लगने दी जाएगी। दूसरी जगह दी गई है, वहीं लगाओ।

बाजार बना अखाड़ा, लोग बने जज

हंगामा बढ़ता देख आसपास के दुकानदार, ग्राहक और राहगीर भी रुक गए। कोई फड़ी वालों के समर्थन में बोलता दिखा, तो कोई पार्षद की बात को सही ठहराता नजर आया। किसी ने कहा, “फड़ी वालों की भी मजबूरी है,” तो किसी का तर्क था, “मार्केट में चलना मुश्किल हो जाता है। करीब एक घंटे तक बहस, नोक-झोंक और भावनात्मक संवाद चलता रहा। बीच-बीच में माहौल इतना गर्म हो गया कि लोग मोबाइल निकालकर वीडियो बनाने लगे, मानो कोई लाइव शो चल रहा हो।

समाधान नहीं, लेकिन संदेश साफ

हंगामे के बाद फिलहाल कोई ठोस समाधान तो नहीं निकला, लेकिन पार्षद ने साफ कर दिया कि नियमों का पालन करना ही होगा। वहीं फड़ी वालों ने भी दो टूक कहा कि वे अपनी रोजी-रोटी छोड़कर दूसरी जगह जाने को तैयार नहीं हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि शहर की सुंदरता और व्यवस्था बनाम गरीब की रोजी-रोटी के बीच संतुलन कैसे बने। सेक्टर-2-3 मार्केट में आज भले ही हंगामा शांत हो गया हो, लेकिन यह मुद्दा अभी ठंडा पड़ता नजर नहीं आ रहा।

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