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RSS Shatabdi Varsh देश के लोग एकजुट होकर पंच परिवर्तन पर करें काम : आलोक कुमार

Byadmin

Jan 18, 2026

RSS Shatabdi Varsh

  • सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी, कुटुम्ब प्रबोधन, कर्त्तव्य बोध से विश्व गुरु के पथ पर आगे बढ़ेगा देश
  • खिलाड़ी होते हैं देश की धरोहर : रवि दहिया

पानीपत। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह आलोक कुमार ने कहा कि संघ के 100 वर्ष पूरे होने पर संघ आज शताब्दी वर्ष मना रहा है लेकिन संघ द्वारा शताब्दी वर्ष मनाने का उद्देश्य अपना गुणगान या अपना महिमामंडन करना नहीं है। संघ चाहता है कि देश को आगे बढ़ाने के लिए पंच परिर्वतन का जो संकल्प है उस पर देश के लोग एकजुट होकर उस पर काम करें। सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी, कुटुम्ब प्रबोधन, कर्त्तव्य बोध को अपना कर ही देश पुन: विश्व गुरु के पथ पर आगे बढ़े पाएगा। आलोक कुमार रविवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा पानीपत के एसडी कॉलेज में “राष्ट्र निर्माण में खेल-खिलाड़ी की भूमिका” विषय पर एक विचार संगोष्ठी को सम्बोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में मुख्यातिथि के तौर पर ओलम्पिक पदक विजेता रवि दहिया ने शिरकत की। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हरियाणा के प्रांत संघचालक प्रताप, प्रांत प्रचारक डॉ सुरेंद्र पाल, खेल विश्वविद्यालय राई के कुलपति एवं उत्तराखंड के पूर्व डीजीपी डॉ अशोक, अंतर्राष्ट्रीय पहलवान योगेश्वर दत्त, भारत की पहली महिला पैरा ओलम्पिक पदक विजेता दीपा मलिक, सुनील डबास सहित पदमश्री, द्रोणाचार्य अवार्डी, अर्जुन अवार्डी, भीम अवार्डी सहित भारी संख्या में अंतर्राष्ट्रीय व राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी मौजूद रहे।

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140 करोड़ की जनसंख्या का है हमारा देश

आलोक कुमार ने कहा कि आज हमारा देश 140 करोड़ की जनसंख्या का देश है और यह जनसंख्या हमारी ताकत बने इसके लिए हम सबको एक साथ मिलकर सकारात्मक दिशा में काम करना होगा। इतनी बड़ी जनसंख्या के रहने व अन्य मूलभूत जरुरतों के पूरा करने के लिए पर्यावरण संतुलन बिगड़ गया है। इसका मुख्य कारण हमारे अंदर बढ़ रही उपभोक्तावाद की भावना है। इससे हमारी हवा, जल, खानपान सब दूषित हो गया है। इस बिगड़ते पर्यावरण संतुलन को रोकने के लिए हमें पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना होगा। इसमें हर नागरिक को अपना सहयोग करना होगा। उन्होंने कहा कि परिवारों से मिलकर देश बनता है और हमारे यहां पहले संयुक्त परिवारों की परंपरा थी लेकिन आधुनिकतावाद व पाश्चात्य संस्कृति के बढ़ते प्रभाव के कारण यह परंपरा रुक न जाए। अब संयुक्त परिवार का स्थान एकल परिवारों ने ले लिया है। पश्चिम देश हमारे पूर्वजों की संयुक्त परिवार की परंपरा को अपना रहे हैं और हम सब इससे दूर न हों। अन्यथा इसके चलते समाज में लड़ाई-झगड़े, तनाव, कुरीतियां बढ़ जाएंगी। इसे रोकने के लिए हमें परिवार प्रबोधन को बढ़ावा देना होगा। कम से कम सप्ताह में एक दिन परिवार को जरुर दें। परिवार के साथ बैठ कर खाना खाएं, परिवार के सभी सदस्यों के साथ बातचीत करें इससे परिवार में भावनात्मक लगाव पैदा होगा और परिवार एकजुट होगा।

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जाति-पाति, छुआछूत बड़ी समस्या

आलोक कुमार ने कहा कि जाति-पाति, छुआछूत देश की बहुत बड़ी समस्या है और संघ इस समस्या को खत्म करने के लिए प्रयासरत है। देश को अगर तरक्की के रास्ते पर लेकर जाना है तो हमें जातिय भेद को खत्म करना होगा और यह तभी संभव है जब हम सामाजिक समरसता को बढ़ावा देंगे। उन्होंने कहा कि देश को आर्थिक तौर पर समृद्ध करने के लिए हमें स्वदेशी को अपनाना होगा। अक्सर घर में नई चीज आने के बाद हमें पुरानी चीजें बेकार लगने लगती हैं लेकिन ऐसा नहीं है कि पुरानी चीजें खराब हैं। 15वीं शताब्दी में जब अंग्रेज शिक्षण संस्थान खड़े कर रहे थे तो उस समय हमारे पास नालनंदा, तक्षशिला जैसे विश्वविद्यालय थे। हमारी शिक्षा व्यवस्था उनसे कहीं ज्यादा बेहतर थी। हरियाणा तो इस बात का गवाह है। हरियाणा के पास तो 10 हजार साल पुरानी सिंधु घाटी की सभ्यता है। यहां आज भी कई स्थानों पर सिंधु घाटी के अवशेष मिलते हैं। इसलिए हमें स्व का बोध करना होगा और हमें नई परंपराओं के साथ-साथ अपनी प्राचीन परंपराओं को भी आगे बढ़ाना होगा। नई व प्राचीन परंपराओं में तालमेल बिठाना होगा। तभी हम एक समृद्ध राष्ट्र बना पाएंगे।

हमारे यहां कानून काफी लचीला

विदेशों की बजाए हमारे यहां कानून काफी लचीला है इसलिए हमारे यहां कर्त्तव्यबोध पर अधिकारबोध हावी है। हम अधिकारों को लेकर तो जागरुक हैं लेकिन कर्त्तव्य की बात आने पर हम पीछे हट जाते हैं। ऐसा नहीं है कि हमारे अंदर मानवता नहीं है। हमारी मानवता का जीता जागता उदाहरण कोरोना काल है। कोरोना काल में लोगों की मदद के लिए समाज ने सरकार के बजट से कई गुणा खर्च कर दिया था। अपनी जान पर खेलकर लोगों की मदद की थी। हमारे लोग बड़े संवेदनशील हैं लेकिन इनमें कर्त्तव्यबोध की कमी है। इसलिए हमें लोगों में नागरिक कर्त्तव्य का भाव पैदा करना होगा। क्योंकि कोई भी देश जब तक तरक्की नहीं करता जब तक उसके देश के लोग जिम्मेदारी के साथ अपने कर्त्तव्यों का निर्वहन नहीं करते। उन्होंने युवाओं में बढ़ते नशे के प्रचलन पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि युवाओं को नशे से बचाना है तो हमें कुटुंब प्रबोधन को अपनाना होगा। संयुक्त परिवार ही इस समस्या का हल है।

ख्याति प्राप्त खिलाड़ी बने युवाओं के प्रेरणा स्त्रोत

आलोक कुमार ने खिलाड़ियों के सवालों के जवाब देते हुए खिलाड़ियों से आह्वान किया कि खिलाड़ी भी युवाओं को नशे से दूर रहने व खेलों के क्षेत्र में आगे आने के लिए प्रेरित करें। ख्याति प्राप्त खिलाड़ी रोल मॉडल बनकर युवाओं को सामाजिक बुराइयों के प्रति जागरुक करें और अधिक से अधिक युवाओं को सामाजिक कार्यों के साथ जोड़ें। उन्होंने कहा कि आज सोशल मीडिया का दौर है और ख्याति प्राप्त खिलाड़ी के सोशल मीडिया पर अच्छे फालोवर हैं। इसलिए ऐसे खिलाड़ियों को अपने सोशल मीडिया हैंडल से भारतीय परंपराओं, रीति-रिवाजों को आगे बढ़ाना चाहिए। लोगों को सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी वस्तुओं का प्रयोग, कुटुम्ब प्रबोधन तथा नागिरक कर्त्तव्यों के बारे में जागरुक करें। ताकि अगली पीढ़ी तक हमारे संस्कार जा सकें।

खिलाड़ी होते हैं देश की धरोहर

ओलम्पिक पदक विजेता रवि दहिया ने कहा कि आज समय बहुत बदल गया है इसलिए खिलाड़ियों को बहुत सचेत रहने की आवश्यकता है। क्योंकि खिलाड़ी देश की धरोहर होते हैं। उन्होंने खिलाड़ियों से आह्वान किया कि जो खिलाड़ी सच्ची नीयत के साथ मेहनत करता है तो वह जीवन में सफल अवश्य होता है।

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