Pradhan Mantri Awas Yojana Scam
रोहतक।
प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना (PMAY-G) में एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। रोहतक जिले के गांव सैमाण में योजना के नियमों की अनदेखी करते हुए अपात्र महिलाओं को सरकारी धन का लाभ दिलाने का मामला उजागर हुआ है। आरटीआई के माध्यम से सामने आए इस मामले की जांच मनरेगा लोकपाल द्वारा की गई, जिसके बाद आठ महिला लाभार्थियों से कुल 8 लाख 46 हजार रुपये की रिकवरी के आदेश जारी किए गए हैं। हालांकि, लोकपाल के इन आदेशों को लेकर अब प्रशासनिक स्तर पर विवाद भी खड़ा हो गया है।
आरटीआई से हुआ आवास योजना घोटाले का खुलासा
यह मामला गांव सैमाण के एक आरटीआई कार्यकर्ता प्रदीप कुमार द्वारा उजागर किया गया। जानकारी के अनुसार, वर्ष 2017-18 में गांव की कुछ महिलाओं ने प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत मकान निर्माण के लिए आवेदन किया था। इन आवेदनों की पात्रता जांच सरपंच, ग्राम सचिव, पटवारी, जेई और बीडीपीओ महम द्वारा की गई। हैरानी की बात यह रही कि जांच प्रक्रिया पांच बार होने के बावजूद अपात्र महिलाओं के नाम सरकार को भेज दिए गए।
जब आरटीआई कार्यकर्ता को इस अनियमितता की भनक लगी, तो उन्होंने अपने सहयोगी सुभाष के साथ प्रशासन में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद मनरेगा लोकपाल डॉ. एस.एस. रंगा ने मामले की जांच शुरू की।
लोकपाल जांच के बाद रिकवरी के आदेश
लोकपाल द्वारा की गई जांच सितंबर 2025 में पूरी हुई। जांच रिपोर्ट के आधार पर लोकपाल ने बीडीपीओ महम को पत्र भेजकर आठ महिला लाभार्थियों से कुल 8.46 लाख रुपये की रिकवरी के निर्देश दिए। इन महिलाओं को योजना के तहत मकान निर्माण के लिए राशि जारी की गई थी, जबकि वे पात्रता की शर्तों को पूरा नहीं करती थीं।
पहले से पक्का मकान होने के बावजूद मिला लाभ
जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि जिन महिलाओं को प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना का लाभ दिया गया, उनके पास पहले से पक्के मकान मौजूद थे। एक मामले में तो महिला के पास दो मंजिला मकान होने के बावजूद उसे योजना के तहत 1.38 लाख रुपये की राशि जारी कर दी गई।
सूत्रों के अनुसार, पहचान छिपाने के लिए एक महिला ने आवेदन में पति के स्थान पर पिता का नाम दर्ज कराया। यह भी सामने आया है कि संबंधित महिला एक पूर्व निर्वाचित जनप्रतिनिधि की पत्नी है, जिससे मामले ने और गंभीर रूप ले लिया है।
प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के नियम क्या कहते हैं
प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत महिला मुखिया को तीन किस्तों में 1.38 लाख रुपये नकद, मनरेगा के अंतर्गत 90 दिन की मजदूरी, तथा शौचालय निर्माण के लिए 12 हजार रुपये की अतिरिक्त सहायता दी जाती है। योजना का स्पष्ट प्रावधान है कि इसका लाभ केवल उन्हीं परिवारों को दिया जाएगा, जिनके पास रहने के लिए अपना कोई पक्का मकान नहीं है।
इन आठ महिलाओं से होगी राशि की वसूली
लोकपाल की रिपोर्ट के आधार पर जिन आठ महिलाओं से रिकवरी प्रस्तावित की गई है, उनमें—
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सोनिया से ₹45,000
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इन्द्रो से ₹1,38,000
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संतरा से ₹1,05,000
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बिमला से ₹1,05,000
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दयावंती से ₹1,05,000
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रामिला से ₹1,38,000
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कमलेश से ₹1,05,000
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सुनीता से ₹1,05,000
कुल मिलाकर ₹8.46 लाख की वसूली के आदेश दिए गए हैं।
लोकपाल के अधिकारों पर उठे सवाल
इस पूरे मामले में जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी (डीडीपीओ) राजपाल चहल ने लोकपाल की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि लोकपाल को जांच करने का अधिकार तो है, लेकिन रिकवरी के आदेश जारी करने का अधिकार नहीं है। उनके अनुसार, यदि अनियमितता सिद्ध होती है तो वसूली की अंतिम कार्रवाई अतिरिक्त उपायुक्त (ADC) स्तर से की जानी चाहिए। साथ ही, पंचायत का पक्ष सुने बिना आदेश जारी करना भी नियमों के खिलाफ बताया जा रहा है।
पंचायत और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल
यह मामला न केवल गांव सैमाण की पंचायत की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है, बल्कि सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर चिंताएं पैदा करता है। प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना जैसी महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य जरूरतमंदों को पक्का मकान उपलब्ध कराना है, लेकिन इस तरह की अनियमितताएं योजना की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाती हैं।
फिलहाल, यह देखना अहम होगा कि प्रशासन इस विवाद पर क्या रुख अपनाता है और क्या वास्तव में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो पाती है या नहीं।
