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Karnal doctor police misconduct: ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर के साथ पुलिस दुर्व्यवहार का आरोप, डीएमए ने सरकार से कार्रवाई की मांग

Byadmin

Mar 6, 2026
डॉ अमित व्यास राष्ट्रीय प्रमुख एवं अध्यक्ष डेमोक्रेटिक मेडिकल एसोसिएशन (डीएमए इंडिया)

 घरौंडा में ड्यूटी कर रहे डॉक्टर को पुलिस ने कथित रूप से थाने ले जाकर किया दुर्व्यवहार

हरियाणा के करनाल जिले के घरौंडा में ड्यूटी पर तैनात एक सरकारी चिकित्सक के साथ पुलिस द्वारा कथित दुर्व्यवहार और अवैध हिरासत का मामला सामने आया है। इस घटना को लेकर डेमोक्रेटिक मेडिकल एसोसिएशन (DMA India) ने हरियाणा सरकार से तत्काल हस्तक्षेप और सख्त कार्रवाई की मांग की है।

जानकारी के अनुसार 4 मार्च 2026 को सुबह लगभग 7 से 8 बजे के बीच घरौंडा में कार्यरत डॉ. प्रशांत चौहान (चिकित्सा अधिकारी, HCMS-1) को कथित रूप से थाना घरौंडा के SHO दीपक कुमार और अन्य पुलिस कर्मियों द्वारा अस्पताल से जबरन थाने ले जाया गया।


 बिना विधिक प्रक्रिया के हिरासत में रखने का आरोप

बताया गया है कि डॉ. प्रशांत चौहान को बिना किसी कानूनी प्रक्रिया का पालन किए हिरासत में रखा गया। परिजनों को भी इसकी सूचना नहीं दी गई। आरोप है कि पुलिस कर्मियों ने उन पर दबाव बनाकर माफीनामा लिखवाया और कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर भी करवाए।

यह मामला इसलिए भी संवेदनशील हो गया है क्योंकि संबंधित चिकित्सक अनुसूचित जाति समुदाय से संबंध रखते हैं।


 चिकित्सकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांगडॉ अमित व्यास राष्ट्रीय प्रमुख एवं अध्यक्ष डेमोक्रेटिक मेडिकल एसोसिएशन (डीएमए इंडिया)

डीएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अमित व्यास ने इस घटना पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि यदि ड्यूटी पर तैनात सरकारी चिकित्सकों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की गई तो इसका नकारात्मक प्रभाव पूरे स्वास्थ्य तंत्र पर पड़ेगा।

डीएमए के अन्य पदाधिकारियों—राष्ट्रीय महासचिव डॉ. शुभ प्रताप सोलंकी, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. भानु कुमार और राष्ट्रीय महिला प्रकोष्ठ सचिव डॉ. प्रियंशु शर्मा—ने भी इस घटना की निंदा करते हुए दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।


 कार्रवाई नहीं हुई तो चिकित्सा समुदाय में बढ़ेगा आक्रोश

डॉ. अमित व्यास ने कहा कि यदि इस मामले में जल्द निष्पक्ष जांच और कार्रवाई नहीं हुई तो चिकित्सा समुदाय में व्यापक असंतोष पैदा हो सकता है।

डीएमए ने सरकार से मांग की है कि इस मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए, सभी साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाए और भविष्य में चिकित्सकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

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