International Textile
- पानीपत के ढाई सौ टेक्सटाइल एक्सपोर्टर ले रहे हैं भाग
- यूरोप, एशिया, ऑस्ट्रेलिया महाद्वीपों के बायर्स से टेक्सटाइल उत्पादों के ऑर्डर्स मिलने की संभावना
पानीपत। जर्मनी के फ्रैंकफर्ट शहर में इंटरनेशनल टेक्सटाइल फेयर का शुभारंभ हो गया है। वही इस बार 16 जनवरी तक चलने वाले इस इंटरनेशनल टेक्सटाइल फेयर को आयोजकों ने हेमटेस्किटल-2026 नाम दिया है। टेक्सटाइल मेला में पानीपत के करीब ढाई सौ एक्सपोर्टर भाग ले रहे हैं। एक्सपोर्टर, मेला में अपने स्टॉल्स लगाकर अपने टेक्सटाइल उत्पादों का प्रदर्शन विदेशी बायर्स के समक्ष करेंगे। स्मरणीय है कि टेक्सटाइल के इस इंटरनेशनल फेयर में पूरी दुनिया के टेक्सटाइल बायर्स भाग लेते हैं और विभिन्न टेक्सटाइल उत्पादों को देखते हैं, माल पसंद आने पर विदेशी बायर्स टेक्सटाइल उत्पाद के ऑर्डर खाका तैयार करते हैं। यदि इंपॉर्टेंट और एक्सपोर्टर के बीच टेक्सटाइल उत्पाद पर बात बन जाती है, तो फिर बायर, उसे देश के एक्सपोर्टर के पास जाकर माल की खरीदफिरोख्त की सौदेबाजी का ऑर्डर दे देते हैं।
चीन, पाकिस्तान, बांग्लादेश, तुर्की के टेक्सटाइल एक्सपोर्टर भी भाग ले रहे
वही इंटरनेशनल टेक्सटाइल फेयर में भारत के कंपीटीटर देश चीन, पाकिस्तान, बांग्लादेश, तुर्की के टेक्सटाइल एक्सपोर्टर भी भाग ले रहे हैं। इधर आने की अमेरिका द्वारा भारत के उत्पादों पर टैरिफ लगाने के चलते पानीपत के एक्सपोर्टस को अमेरिका से टेक्सटाइल उत्पादन के नामचारे के आर्डर मिलने आशंका सता रही है। स्मरणीय है कि अमेरिका में टैरिफ बढ़ने से वहां पर टेक्सटाइल उत्पादों की कीमत बढ़ जाती है, ऐसे तनावपूर्ण आर्थिक माहौल में इंपॉर्टेंट और एक्सपोर्टर की सोदेबाजी सीरे नहीं चढ़ पाती। वहीं अमेरिका और भारत के बीच अकेले पानीपत से करीब 10 हजार करोड रुपए का टेक्सटाइल कारोबार होता रहा है। वहीं अमेरिका और भारत के बीच चल रहे आर्थिक तनाव का पूरा फायदा भारत के कंपीटीटर देश जैसे पाकिस्तान, बांग्लादेश, तुर्की और चीन उठा सकते हैं।
पानीपत का पूरा फोकस ऑस्ट्रेलिया, साऊथ अमेरिका, एशिया पर ज्यादा
दूसरी ओर, पानीपत एक्सपोर्टर एसोसिएशन के पूर्व चेयरमैन प्रोफेसर रामनिवास गुप्ता ने बताया कि अमेरिका से चल रहे आर्थिक तनाव के चलते पानीपत के टेक्सटाइल एक्सपोर्टर का पूरा फोकस ऑस्ट्रेलिया, साऊथ अमेरिका, एशिया, अफ्रीका महाद्वीपों के देशों के टेक्सटाइल बायर्स पर ज्यादा रहने की संभावना है। पानीपत कारपेट मैन्युफैक्चरर एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेंद्र मलिक ने बताया कि वर्तमान में पूरी दुनिया में राजनीतिक उथल-पुथल और वैश्विक आंशिक युद्धक अशांति, आर्थिक तनाव के दौर से गुजर रही। ऐसी हालत में जर्मनी में चल रहे टेक्सटाइल फेयर में विदेशी बायर्स के साथ पानीपत के एक्सपोर्टर का कोई लंबा चौड़ा कारोबारी खाका तैयार होने की उम्मीद नहीं है। हरियाणा चैंबर्स ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री, पानीपत चैप्टर के चेयरमैन विनोद धमीजा ने बताया कि उम्मीद पर दुनिया कायम है।
बायर्स से अच्छा रिस्पॉन्स मिलेगा
वहीं पानीपत के एक्सपोर्टर फ्रैंकफर्ट में चल रहे हैं इंटरनेशनल टेक्सटाइल फेयर में बढ़-चढ कर भाग ले रहे हैं और उन्हें पूरी उम्मीद है कि इस बार मेला में उन्हें गैर अमरीकी विदेशी बायर्स से अच्छा रिस्पॉन्स मिलेगा। उन्होंने बताया कि यूरोप, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया महाद्वीपों के देशों से, एशिया महाद्वीप के खाड़ी देशों से, जापान, थाईलैंड, वियतनाम, कंबोडिया, फिजी, मलेशिया जैसे बड़े पर्यटन वाले देश के टेक्सटाइल कारोबारियों से उन्हें अच्छा खास रिस्पांस मिलने की उम्मीद है। टेक्सटाइल एक्सपोर्टर धर्मवीर सिंह ने बताया कि भारत और अमेरिका के बीच हजारों करोड़ रुपए का टेक्सटाइल कारोबार होता रहा है। अकेले पानीपत से अमेरिका को करीब 12000 करोड रुपए से अधिक का टेक्सटाइल उत्पादों का निर्यात किया जाता रहा है। वहीं ,अमेरिका सरकार द्वारा भारत से टेक्सटाइल उत्पादों के एक्सपोर्ट पर टैरिफ बढ़ा देने से दोनों के देशों के बीच आर्थिक तनाव लगातार जारी है ऐसे हालात में अमेरिकी बायर्स और पानीपत के एक्सपोर्टर के बीच कारोबार की संभावना नहीं के ही बराबर है।
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