Haryana news
- विधानसभा सत्र के दौरान सीएम सैनी का ऐलान : पीएम आवास, सीएम शहरी आवास और ग्रामीण आवास योजना के लाभपात्रों को होगा फायदा
- सीएम बोले, गरीबों को लाभ मिलेगा, सरकार ने कलेक्टर रेट नहीं, सिर्फ पारदर्शिता बढ़ाई
- गोशालाओं के लिए भी पहले ही खत्म हो चुकी स्टॉम्प ड्यूटी
- 2004 से 2014 तक कलेक्टर रेट में 25% औसत वृद्धि हुई
- मौजूदा सरकार में केवल 9.69% बढ़ोतरी की बढ़ातरी की गई
Haryana news : चंडीगढ़। प्रदेश सरकार ने बुधवार को गरीबों को बड़ी राहत दी है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विधानसभा में ऐलान किया कि प्रधानमंत्री आवास योजना, मुख्यमंत्री शहरी आवास योजना, मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत शहरों में 50 गज और ग्रामीण क्षेत्र में 100 गज तक के रिहायशी प्लॉट की रजिस्ट्री पर स्टाम्प ड्यूटी पूरी तरह से समाप्त कर दी है। बुधवार से ही यह फैसला लागू हो गया है। मुख्यमंत्री सदन में कलेक्टर रेट वृद्धि से संबंधित विपक्ष द्वारा लाए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर वक्तव्य दे रहे थे। विपक्ष पर निशाना साधते हुए सीएम ने कहा कि विपक्ष केवल जनता को गुमराह करने की नाकाम कोशिश कर रहा है। उन्होंने आंकड़े प्रस्तुत करते हुए बताया कि वर्ष 2004-05 से 2014 तक विपक्ष के शासनकाल में कलेक्टर रेट में औसतन 25.11 प्रतिशत वृद्धि की गई थी, जबकि वर्तमान सरकार के 2014 से 2025 तक के कार्यकाल में यह वृद्धि मात्र 9.69 प्रतिशत रही है।
रजिस्ट्री पर कोई नया टैक्स नहीं लगाया
सीएम ने कहा कि हमारी सरकार ने रजिस्ट्री पर कोई नया टैक्स नहीं लगाया। स्टाम्प ड्यूटी 2008 से अब तक पुरुषों के लिए 7 प्रतिशत (जिसमें 2 प्रतिशत विकास शुल्क शामिल है) तथा महिलाओं के लिए 5 प्रतिशत की दर से लागू है और आज भी यही दरें लागू हैं। मुद्दा कलेक्टर रेट बढ़ाने का नहीं, बल्कि उन लोगों का है जो स्टाम्प ड्यूटी चोरी करने के लिए जमीन के सौदों में ब्लैक मनी का सहारा लेते हैं। विपक्ष को गरीब और जरूरतमंद की आवाज उठानी चाहिए, न कि काला धन कमाने वालों का पक्ष लेना चाहिए। गोशाला की जमीन की खरीद-फरोख्त पर 2019 में स्टाम्प ड्यूटी 1 प्रतिशत कर दी थी, जिसे वर्ष 2025 में पूरी तरह माफ कर दिया है।
रेट में संशोधन पारदर्शी प्रक्रिया
सीएम ने कहा कि कलेक्टर रेट में संशोधन एक नियमित और पारदर्शी प्रक्रिया है, जो हर साल बाजार मूल्य के अनुरूप की जाती है। कांग्रेस सरकार के दौरान भी हर वर्ष कलेक्टर रेट बढ़ाए थे। वर्ष 2004-05 से 2013-14 तक हर साल हर जिले में 10 प्रतिशत से लेकर 300 प्रतिशत तक रेट्स बढ़ाए गए। फरीदाबाद में वर्ष 2008 में 300 प्रतिशत और 2011-12 में 220 प्रतिशत, करनाल में 2012-13 में 220 प्रतिशत, महेंद्रगढ़ में 2010-11 और 2011-12 में 100 प्रतिशत तथा झज्जर में 2007-08 में 109 प्रतिशत तक वृद्धि की गई थी।