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Beekeeping for Unemployed Youth

Beekeeping for Unemployed Youth

  • आईडिया : प्रशिक्षण पूरी तरह फ्री, बॉक्स खरीदने के लिए बागवानी विभाग और बैंक करेगा मदद
  • मधुमक्खी पालन बेरोजगार युवाओं के लिए रोजगार का बेहतर उपाय
  • प्रशिक्षण के लिए हरियाणा में 13 सेंटर खोले गए

नूंह। मधुमक्खी पालन बेरोजगार युवाओं की आमदनी का अच्छा जरिया हो सकता है। इतना ही नहीं जिन किसानों के पास जमीन नहीं है, वह भी जिला बागवानी विभाग की मधुमक्खी पालन योजना का लाभ उठा सकते हैं। यह जानकारी जिला बागवानी अधिकारी डॉक्टर अब्दुल रजाक ने पत्रकारों को दी।

डॉ अब्दुल रजाक ने बताया कि प्रशिक्षण के लिए प्रदेश भर में 13 सेंटर खोले गए हैं। जिनमें के वी के मंडकोला, के वी के भूपानी सहित कई संस्थान है। इसके अलावा पांच दिवसीय इस प्रशिक्षण को करने वाले युवाओं के लिए रहने, खाने से लेकर आने-जाने तक की पूरी व्यवस्था निशुल्क है। इसके अलावा बैंक लोन में भी प्रशिक्षण के बाद मदद मिलती है।

Beekeeping for Unemployed Youth

एक युवा को मलते हैं 50 लकड़ी के बॉक्स

एक युवा को 50 लकड़ी के बॉक्स दिए जाते हैं। जिनमें 85 प्रतिशत अनुदान विभाग के द्वारा दिया जाता है। किसान को महज 21600 ही देने होते हैं। उन्होंने बताया की फैमिली आईडी, आधार कार्ड तथा प्रशिक्षण सर्टिफिकेट को लेकर रामनगर में जाते ही किसानों को डब्बे मिल जाते हैं। एक डब्बे में 8 – 10 फ्रेम होते हैं। इस पर भी तकरीबन 85000 की सहायता बागवानी विभाग के द्वारा दी जाती है। उन्होंने बताया कि 1 साल में एक डिब्बे में तकरीबन 50 किलो शहद तैयार हो जाता है। अगर 50 किलो प्रति डब्बे के हिसाब से 50 डिब्बो में शहर का आकलन किया जाए तो तकरीबन 2500 किलो शहद तैयार होता है।

भावांतर भरपाई योजना में भी शामिल

भावांतर भरपाई योजना में भी हरियाणा सरकार ने मधुमक्खी पालन को शामिल किया है। उन्होंने बताया कि उपकरण जिनमें मशीन, डब्बे, ब्लाउज, टोपी इत्यादि खरीदने के लिए भी बागवानी विभाग मदद करता है। इस समय जिले में पांच किसानों के पास तकरीबन 800 बॉक्स मधुमक्खी पालन के हैं। जिनमें प्रति वर्ष 26000 किलो शहद तैयार किया जाता है।

110 रुपए प्रति किलो बिक रहा शहद

शहर अच्छी गुणवत्ता का है तो 110 रुपए प्रति किलो से अगर ज्यादा भाव मार्केट में बिकता है तो मधुमक्खी पालन करने वाले बेरोजगार युवा उसे बेच सकते हैं और अगर खरीदार नहीं मिलता है तो उन्हें ड्रम व बाल्टी में उसे पैक कर रामनगर ले जाने पर 110 रुपए प्रति किलो के हिसाब से वहां भुगतान किया जाता है। जिला बागवानी अधिकारी डॉक्टर अब्दुल रजाक ने बताया कि तीन नए किसानो के केस बनाकर हरियाणा सरकार को भेजे गए हैं और 6 किसानों के केस पाइपलाइन में है। डॉक्टर दीन मोहम्मद ने बताया कि बेरोजगार युवाओं को तकरीबन 3 लाख रुपए प्रतिवर्ष मधुमक्खी पालन से आसानी से कमाने का अवसर मिल जाता है।

नूंह में अच्छी गुणवत्ता का शहद

हरियाणा के नूँह जिले में सरसों का सीजन है और इन दिनों में अच्छा वह अच्छी गुणवत्ता का शहर तैयार होता है। जिससे अच्छी खासी आमदनी किसान को होती है। उन्होंने कहा कि सरसों की फसल के बाद दूसरी जगह पर इन मधुमक्खी के डब्बो को ले जाया जा सकता है। इसका ट्रांसपोर्ट पूरी तरह से फ्री रखा गया है ताकि बेरोजगार युवाओं को मधुमक्खी पालन से अच्छी आमदनी हो सके। उन्होंने यह भी बताया कि जहां मधुमक्खी के डब्बे रखे होते हैं, उसके एक किलोमीटर दूरी तक सरसों हो या किसी भी प्रकार के फल का बाग हो उसमें अच्छा खासा लाभ होता है, क्योंकि मधुमक्खी परागन का काम करती है और बीमारियों से सरसों इत्यादि चीजों को बचाती है। इससे उत्पादन और गुणवत्ता दोनों बेहतर होते हैं।

रानी मक्खी तीन प्रकार के बच्चे पैदा करती है

डॉक्टर रजाक ने बताया की रानी मक्खी तीन प्रकार के बच्चे पैदा करती है। उन्होंने बताया कि एक सैनिक होता है, एक निखट्टू होता है और एक कमाऊ पूत होता है। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि सैनिक डब्बे के अंदर रहता है और सुरक्षा करता है। निखट्टू जब डब्बे से बाहर जाता है तो या तो मर जाता है या वापस नहीं आता और कमाऊ पूत 1 किलोमीटर दूर से शहद तैयार करके लाता है और जो डब्बे में सैनिक होते हैं वह उसे पहचान लेते हैं और कमाऊ पूत बहुत तेजी से शहद बनाने का काम करता है तो कुल मिलाकर मधुमक्खी पालन से कम पढ़े – लिखे बेरोजगार युवा या जिन किसानों के पास जमीन नहीं है। वह भी अच्छी खासी कमाई कर सकते हैं। जिला बागवानी विभाग इसके लिए ऐसे लोगों की भरपूर मदद करता है।

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