Vijay Nadan of Baliyali
- एक्टर के साथ निर्माता-निदेशक के भूमिका में उभर कर आए सामने
- जुनून इतना की हिसार पुलिस ने पाकिस्तानी एजेंट होने पर किया था गिरफ्तार
- पूछताछ के बाद लगाया था गले, नहीं साबित हुए आरोप
- सामाजिक बुराइयों के प्रति फिल्म, नाटक बनाकर जागरूकता लाने का कार्य किया
बवानीखेड़ा। आदर्श गांव बलियाली के विजय सिंह ‘नादान‘ आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। अपनी मेहनत के बलबूते पर नई-नई इबारत लिखने का काम किया है विजय सिंह ‘‘नादान‘। जैसे दहेज प्रथा पाखंड, शिक्षा बिना पशु, बाल विवाह, ओपरी पराई सहित अनेक सामाजिक बुराइयों के प्रति फिल्म, नाटक बनाकर जागरूकता लाने का कार्य किया है और हालिया लीव-इन-रिलेशनशिप पर फिल्म बनाने का कार्य कर रहे हैं। जिसे समाज मंे वाहवाही मिल रही है। गांव की रामलीला में 6 वर्ष तक राम की भूमिका अदा की जिसे खूब सराहा गया।
आखिरकार कौन हैं विजय सिंह नादान
गांव बलियाली में बारू राम के घर शीला देवी की कौख से पहली संतान के रूप में जन्में विजय सिंह जिन्हें घर मे प्यार से नादान पुकारते थे जिन्होंने 10वीं तक की पढ़ाई की और उषा रानी इनकी जीवन संगीनी बनी। नादान तीन भाई व एक बहन हैं। बचपन से ही पढ़ाई के साथ पेंटिग का शौक था और वर्ष 2001 में हिसार में पेंटिंग की दुकान की। मिताथल के मास्टर राजपाल जो नुक्कड़ नाटक करने में मशहूर थे उनसे मुलाकात हुई और दहेज प्रथा पाखंड, शिक्षा बिना पशु, बाल विवाह, ओपरी पराई आदि में बारीकियां सीखी।
नरेन्द्र बल्हारा के नाटकों से ली प्रेरणा
विजय सिंह नादान की मानें तो हरियाणा की शान रहे नरेन्द्र बल्हारा के हरियाणवी नाटकों से उन्हें बहुत कुछ सीखने का मौका मिला और डीओपी निदेशक विजय सारसर के साथ कार्य करने का अवसर मिला। जिनसे कैमरे व फ्रेमिंग, करेक्टर डायरेक्शन, वीडिया डायरेक्शन शूटिंग की बारिकियां सीखी। प्रदेश केक अनेक कलाकारों के साथ काम किया व 400 नाटक चैनलों पर डी-ओपी और आर्ट पेज बनकर काम किया। उच्च स्तर के कलाकारों में रामेहर मेहला, विजय वर्मा, केडी, नरेन्द्र भगाना, सतीश कौशिक, यशपाल शर्मा, सुभाष फौजी, प्रहलाद फागणा, दीपक कपूर, कोला नाई, फौजन, लाला जी, रमेश वर्मा, अमित सैनी, गजेंद्र फोगाट आदि कलाकारों के साथ काम किया।
किसान यौद्धा अवार्ड से सम्मानित हुए नादान
विजय सिंह नादान को अलग-अलग 9 संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया गया। सिरसा जिले के गांव जमाल में आयोजित लेखन कला में ताज-ए-हरियाणा अवार्ड 2017 में सैकिंड अवार्ड जीता। इसके अलावा भी अनेक अवार्डों से नवाजे गए। नादान के 9 जनवरी पर जन्मदिन मनाने का तरीका भी हटकर है। ये केक काटकर नहीं बुजुर्गों को कंबल बांटकर, गरीब बच्चों को जूते चप्पल, बच्चों को स्टेशनरी देकर, महिलाओं को शाॅल बांटकर बनाते हैं व सभी के चहिते बने हुए हैं।
