- -विशेषज्ञों की चेतावनी, रिकवरी की कमी से भी बढ़ रहा इंजरी का खतरा
- 40-50% धावक हर साल हो रहे चोटिल, क्या गलत कर रहे खिलाड़ी
- माइक्रोट्रॉमा से स्ट्रेस फ्रैक्चर तक खिलाड़ियों के लिए सबसे बड़ा खतरा
रोहतक। आधुनिक खेल प्रतिस्पर्धा में जहां खिलाड़ी नए कीर्तिमान बना रहे हैं, वहीं चोटों का खतरा भी तेजी से बढ़ रहा है। खासतौर पर धावकों और एथलीटों में घुटने, टखने व मांसपेशियों से जुड़ी समस्याएं आम हो गई हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, जल्द परिणाम पाने की होड़, ओवरट्रेनिंग और सही तकनीक की अनदेखी खिलाड़ियों के करियर पर भारी पड़ रही है यानी जीत की अंधाधुंध दौड़ में हमारे खिलाड़ी टूट रहे हैं। रोहतक के वरिष्ठ चिकित्सकों और खेल कोचों ने इन बढ़ती चोटों के कारणों और उनसे बचाव के वैज्ञानिक तरीकों पर विस्तार से प्रकाश डाला है।
रनर्स नी भी बेहद गंभीर
घुटने के दर्द को रनर्स नी भी कहा जाता है। कुछ खिलाड़ियों को रनिंग करते समय अक्सर घुटनों में दर्द होने लग जाता है, जिसकी वजह से वह अपने खेल पर ध्यान नहीं दे पाते। जो लोग प्रोफेशनल एथलीट होते हैं या जो रोजाना रनिंग करना पसंद करते हैं उनको रनिंग करने से पहले सही टिप्स फॉलों करने चाहिए और कुछ बातों को ध्यान में रखते हुए दौड़ना चाहिए।
क्षमता से अधिक दबाव मुख्य कारण : डॉ. राजेश रोहिल्ला
पीजीआईएमएस रोहतक के खेल चिकित्सा एवं खेल चोट केंद्र के विभागाध्यक्ष और वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. राजेश रोहिल्ला के अनुसार खिलाड़ी अक्सर अपनी शारीरिक क्षमता से अधिक अभ्यास करते हैं, जिससे शरीर पर अत्यधिक दबाव पड़ता है। दौड़ के दौरान शरीर पर बार-बार पड़ने वाला दबाव ‘रिपीटेड माइक्रोट्रॉमा’ पैदा करता है, जो आगे चलकर स्ट्रेस फ्रैक्चर जैसी गंभीर समस्या बन सकता है। आंकड़ों के अनुसार, हर साल 40-50% धावक किसी न किसी चोट का शिकार होते हैं।

तकनीक और धैर्य की कमी : कोच
एथलेटिक कोच रमेश सिंधु का कहना है कि आजकल एथलीटों में ‘शॉर्टकट’ अपनाने की प्रवृत्ति बढ़ी है। खिलाड़ी अक्सर अचानक ज्यादा दूरी तय करने या बहुत तेज गति से अभ्यास शुरू कर देते हैं। इसमें गलत तकनीक, मांसपेशियों की कमजोरी और पर्याप्त आराम (रिकवरी) की कमी ‘आग में घी’ का काम करती है। कई बार ‘ओवरकॉन्फिडेंस’ के कारण खिलाड़ी शुरुआती दर्द को मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जो बाद में उनके करियर पर पूर्णविराम लगा सकता है। दौड़ने वाले खिलाड़ियों में सबसे ज्यादा प्रभाव घुटने, टखने और पैर के निचले हिस्से पर पड़ता है।

फिजियोथेरेपी और वैज्ञानिक तकनीक का महत्व
पीजीआईएमएस रोहतक की स्पोर्ट्स फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. हेमलता ने बताया कि ट्रेनिंग से पहले वॉर्म-अप और बाद में कूल-डाउन न करना मांसपेशियों में ‘स्ट्रेन’ का मुख्य कारण है। शिन स्प्लिंट (एमटीएसएस) अक्सर शुरुआती खिलाड़ियों में ओवरट्रेनिंग के कारण होता है। वहीं, ‘एचिल्स टेंडिनाइटिस’ में कैल्फ मांसपेशियां इतनी टाइट हो जाती हैं कि चलना भी दूभर हो जाता है। हाई इंटेंसिटी स्प्रिंट के दौरान ‘हैमस्ट्रिंग स्ट्रेन’ एक गंभीर समस्या बनकर उभरती है।
रोहतक पीजीआई का सेंटर बना वरदान
-स्पोर्ट्स इंजरी का विशेषज्ञ इलाज
-स्पोर्ट्स साइकोलॉजिस्ट द्वारा काउंसलिंग
-अर्ली रिहेबिलिटेशन की सुविधा
-एक्स-रे, सर्जरी और फिजियोथेरेपी उपलब्ध
-तेजी से मैदान में वापसी की तैयारी
-पीजीआई में कमरा नंबर 81 में रोजाना ओपीडी।
ये बड़ी समस्याएं

-रनर्स नी (घुटने का दर्द)
-शिन स्प्लिंट (पैर के आगे दर्द)
-आईटी बैंड सिंड्रोम
-स्ट्रेस फ्रैक्चर
यह करें खिलाड़ी
-पूर्ण विश्राम के बजाय ‘सीमित गतिविधि’
-‘गाइडेड फिजियोथेरेपी’
-ठंडी सिकाई
-सही जूतों का चुनाव
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
-10% नियम का पालन : अभ्यास की तीव्रता या दूरी को हर सप्ताह 10% के अनुपात में बढ़ाएं।
-आहार पर ध्यान : हड्डियों की मजबूती के लिए कैल्शियम, विटामिन-डी और प्रोटीन युक्त आहार (दूध, दही, दाल, अंडा, हरी सब्जियां) लें।
-वॉर्म-अप और स्ट्रेचिंग : ट्रेनिंग से पहले वॉर्म-अप और बाद में कूल-डाउन को दिनचर्या का अनिवार्य हिस्सा बनाएं।
-आइसोमेट्रिक एक्सरसाइज : घुटने और टखने की मजबूती के लिए नियमित रूप से आइसोमेट्रिक व्यायाम और कैल्फ स्ट्रेचिंग करें।
-चेतावनी संकेत पहचानें : यदि दर्द आराम के समय भी बना रहे, सूजन आए या चलने में कठिनाई हो, तो उसे नजरअंदाज न करें और तुरंत विशेषज्ञ की सलाह लें।

चोट, शादी और बच्चे के बाद ट्रैक पर लौटीं धाविका पूनम
-23 किलो वजन घटाकर पेश की मिसाल
जुनून और अटूट इच्छाशक्ति हो तो मंजिल हासिल करने से कोई नहीं रोक सकता। एक महिला एथलीट ने शादी और मातृत्व के सुखद पड़ाव के बाद न केवल मैदान पर वापसी की है, बल्कि महज चार महीने के भीतर 23 किलो वजन घटाकर सबको हैरान कर दिया है। महिला खिलाड़ी पूनम ने बताया कि उनके खेल करियर में कई उतार-चढ़ाव आए। साल 2016 में उन्हें पहली बड़ी इंजरी हुई, जिसके बाद 2017 में शानदार वापसी की और 2018 में नेशनल क्रॉस कंट्री में कांस्य पदक और ऑल इंडिया पुलिस गेम्स में रजत पदक जीता। इसके बाद 2019 में एंकल ट्विस्ट होने से फिर खेल से दूर होना पड़ा।
उपलब्धियों भरा सफर
-1500 मीटर और 5 किलोमीटर की दौड़ मुख्य स्पर्धाएं।
-10 किलोमीटर दौड़ में उन्होंने 35.2 मिनट का सर्वश्रेष्ठ समय निकाला।
-खेलो इंडिया वुमन लीग में तीसरा स्थान हासिल किया। ‘डीजी डिस्क’ से भी सम्मानित किया।
यहां करवाया इलाज
दिल्ली के सफदरजंग स्पोर्ट्स इंजरी सेंटर गुड़गांव और रोहतक में उपचार लिया। एंकल की पुरानी चोट के लिए उन्होंने रोहतक के वैद्य से भी सहायता ली।
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