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Sports Injury : खिलाड़ियों में विटामिन डी के स्तर को जांचा, डॉ. रोहिल्ला बोले, अलर्ट रहें खिलाड़ी

Sports Injury : खेल चिकित्सा विभाग एवं खेल चोट केंद्र पीजीआईएमएस रोहतक  की टीम ने छोटू राम स्टेडियम में खिलाड़ियों के सैंपल लिए और कई अहम जानकारी दी।

  • -डॉ रोहिल्ला के नेतृत्व में स्टेडियम पहुंची टीम
  • -पीजीआईएमस ओपीडी के कमरा नंबर 81 में प्रतिदिन चलती है ओपीडी
  • -विटामिन डी की कमी से खिलाड़ी हो सकते हैं चोटिल
  • -खिलाड़ियों को स्पार्ट्स इंजरी के बारे में दी जानकारी

रोहतक। खेल चिकित्सा विभाग एवं खेल चोट केंद्र पीजीआईएमएस (PGIMS) रोहतक की एक टीम ने मंगलवार को सर छोटू राम स्टेडियम रोहतक का दौरा किया। इस टीम ने स्टेडियम में अभ्यास कर रहे खिलाड़ियों के सैंपल लिए और उन्हें कई अहम जानकारियां दी। पीजीआई की टीम ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से उन्हें निर्देश मिलें है कि प्रदेश के खिलाड़ियों में विटामिन डी के स्तर का आकलन करें। इस लक्ष्य का ध्यान में रखते हुए खेल चिकित्सा विभाग एवं खेल चोट केंद्र की टीम सर छोटूराम स्टेडियम पहुंची और खिलाड़ियों के सैंपल लिए और उन्हें खेल चोट (Sports Injury) से संबंधित दिक्कतों से उभरने के बारे में बताया। हरियाणा के खिलाड़ियों में विटामिन डी के स्तर का आकलन करने के लिए स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय रोहतक द्वारा एक परियोजना को मंजूरी दी गई है।

ऐसे मिलता है विटामिन डी

सूर्य के प्रकाश के संपर्क में आने से शरीर में विटामिन डी का उत्पादन होता है। विटामिन डी के अन्य महत्वपूर्ण शाकाहारी स्रोत मशरूम और फोर्टिफाइड दूध हैं। खिलाड़ियों में अक्सर विटामिन डी की कमी पाई जाती है और इसके कम स्तर से खिलाड़ियों का प्रदर्शन स्तर कम हो जाता है और प्रतिरक्षा कम हो जाती है, जिसके परिणामस्वरूप बार-बार चोटिल होने का खतरा बना रहता है। Sports Injury खिलाड़ी करियर खराब कर देती है।

यह बोले डॉ. रोहिल्ला

स्टेडियम में पहुंची टीम में वरिष्ठ प्रोफेसर और खेल चिकित्सा विभाग के प्रमुख डॉ. राजेश रोहिल्ला, डॉ. सोनू, डॉ. मंदीप, खेल मनोवैज्ञानिक और डॉ. दीपशिखा खेल फिजियोथेरेपिस्ट शामिल थे। डॉ. रोहिल्ला ने बताया कि पीजीआईएमस ओपीडी के कमरा नंबर 81 में प्रतिदिन बाह्य रोगी सेवाएं प्रदान की जाती हैं। यहां आकर कोई भी खिलाड़ी अपनी चिकित्सा संबंधित जांच करवा सकता है। इस मौके पर डॉ. राजेश रोहिल्ला ने हरियाणा के खिलाड़ियों में विटामिन डी के स्तर का आकलन करने की महत्वपूर्ण परियोजना को मंजूरी देने के लिए विश्वविद्यालय के अधिकारियों को धन्यवाद दिया।

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