RSDBM Trust
- आरएसडीबीएम ट्रस्ट ने की पहल, घर-घर पहुंचकर उपहार में दिए पौधे
- सैंपल, मायना, बसाना और आनंदपुर गांवों में बुजुर्गों का उनके जन्मिदन पर पौधे भेंट करके उन्हें नए साल और जन्मदिन की शुभकामनाएं दी
रोहतक। राम सरनदास भयाना मेमोरियल ट्रस्ट ( आरएसडीबीएम ट्रस्ट ) की ओर से एक दिन में रिकॉर्ड 950 बुजुर्गों का जन्मदिन मनाया गया। ट्रस्ट की ओर से रोहतक के साथ-साथ भाली, सैंपल, मायना, बसाना और आनंदपुर गांवों में बुजुर्गों का उनके जन्मिदन पर पौधे भेंट करके उन्हें नए साल और जन्मदिन की शुभकामनाएं दी। ट्रस्ट की इस अनोखी पहल से पर्यावरण संरक्षण और बुजुर्गों का सम्मान करने का संदेश दिया गया। श्री राम सरनदास भयाना मेमोरियल ट्रस्ट के चेयरमैन सुमित भयाना ने बताया कि विशेषकर बुजुर्गों की सेवा के लिए ट्रस्ट की शुरुआत की गई थी और इस उद्देश्य को पूरा भी किया जा रहा है। ट्रस्ट में रजिस्ट्रड सदस्यों में से करीब 950 ऐसे बुजुर्ग हैं, जिनका जन्मदिन एक जनवरी को हैं। ट्रस्ट की टीम ऐसे सभी बुजुर्गों के घर पहुंची और एक-एक पौधा भेंट किया। बता दें कि ट्रस्ट की ओर से रोहतक और आसपास के पांच गांवों में मरीजों को निशुल्क एंबुलैंस सेवा उपलब्ध करवाई जा रही है। किसी भी मरीज को अस्पताल में जाना है तो ट्रस्ट के फोन नंबर पर कॉल करके गाड़ी या एंबुलैंस की सेवा ले सकता है। सेवा का यह सिलसिला 7 साल से भी ज्यादा समय से चल रहा है। पहले ट्रस्ट ने एंबुलैंस सेवा सिर्फ रोहतक में शुरू की थी, अब यह शटल सेवा आसपास के पांच गांवों में भी चल रही है।
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कड़कड़ाती ठंड में सेवा का जज्बा
श्री राम सरनदास भयाना मेमोरियल ट्रस्ट की टीम के करीब 16 सदस्य सुबह-सुबह ही बुजुर्गों का जन्मदिन मनाने निकल चुके थे। जनवरी की कड़कड़ाती हाड़ कंपाने वाली ठंड में भी सेवा का जज्बा जारी रहा। टीम के सदस्यों ने सभी 950 बुजुर्गों को घर घर जाकर उनके जन्मदिन की बधाई दी। सुबह-सुबह जन्मदिन पर तोहफा पाकर बुजुर्गों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। टीम में गौरव, धर्मेन्द्र सिंह, प्रमोद, दीपक, दिनेश, परवीन, मुकेश, रविंद्र, मोनू रोज, सतीश, रवि दूहन, धर्मेन्द्र राठी, अमित, आशीष, सुनील और मोनू शामिल रहे।
10 गाड़ियां, 2 एंबुलैंस तैनात
श्री राम सरनदास भयाना मेमोरियल ट्रस्ट के पास कुल 10 गाड़ियां और 2 एंबुलैंस हैं, जो बुजुर्गों की सेवा के लिए तैनात रहती हैं। हालांकि ट्रस्ट में रजिस्टर्ड बुजुर्गों के लिए ही इस सेवा को रखा गया है, लेकिन महिलाओं के लिए ऐसी कोई बाध्यता नहीं है। किसी महिला को अगर अस्पताल इलाज करवाने जाना है तो ट्रस्ट के फोन पर कॉल करके गाड़ी या एंबुलैंस की सुविधा का लाभ उठा सकती हैं।
इलाज में देरी नहीं होने देंगे : सुमित भयाना
मेरे पिता श्री राम सरनदास भयाना के निधन के बाद मैंने बुजुर्गों की सेवा करने का संकल्प लिया। कारण यह था कि मेरे पिता जी जब बाथरूम में गिरे तो उन्हें अस्पताल ले जाने में थोडी देरी हो गई, यानी डॉक्टर के पास पहुंचने का उनका गोल्डन पीरियड खत्म हो गया था। उन्हें अस्पताल में मृत घोषित कर दिया। तभी से मैंने ठान लिया कि किसी भी बुजुर्ग की जान इलाज में देरी के कारण नहीं जान दूंगा। इसी लक्ष्य के साथ ट्रस्ट शुरू किया और हम अब बुजुर्गों की सेवा कर रहे हैं। सेवा से ही मन को शांति मिलती है।
सुमित भयाना, चेयरमैन, आरएसडीबीएम ट्रस्ट



