Radon Gas Lung Cancer Risk
रोहतक: धूम्रपान के बाद फेफड़ों के कैंसर का दूसरा सबसे बड़ा कारण मानी जाने वाली खतरनाक गैस Radon को लेकर वैज्ञानिकों ने चिंता जताई है। घरों के अंदर मौजूद यह रंगहीन और गंधहीन गैस सांस के जरिए शरीर में पहुंचकर लंबे समय में फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है।
Maharshi Dayanand University (एमडीयू) रोहतक के कुलसचिव Krishan Kant और उनकी शोध टीम द्वारा किए गए अध्ययन में हरियाणा के दक्षिणी जिलों Palwal और Gurugram के घरों में मौजूद रेडॉन और Thoron गैस के स्तर का आकलन किया गया।
अध्ययन में पाया गया कि घरों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री जैसे मिट्टी, ईंट, पत्थर और कंक्रीट के साथ-साथ जमीन से निकलने वाली प्राकृतिक गैसें घरों के अंदर रेडियोधर्मी गैसों के स्तर को प्रभावित करती हैं।
अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित हुआ शोध
डॉ. कृष्णकांत का यह शोध अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिका Journal of Radioanalytical and Nuclear Chemistry में प्रकाशित हो चुका है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह अध्ययन भविष्य में सुरक्षित आवासीय निर्माण और सार्वजनिक स्वास्थ्य नीतियों के लिए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश प्रदान कर सकता है।
पलवल के घरों में किया गया विस्तृत अध्ययन
वैज्ञानिक परिशिष्ट में डॉ. कृष्णकांत, भूपेंद्र सिंह और डॉ. मनीषा गर्ग द्वारा किए गए अध्ययन
“Radiological Assessment of 222Rn, 220Rn, EERC and EETC in Residential Dwellings of District Palwal, Southern Haryana (2022)” को शामिल किया गया है।
इसके अलावा एक अन्य शोध “Annual Effective Dose due to Inhalation of Indoor Radionuclides and their Progeny Measured by Track-Etched Technique (2023)” भी रिपोर्ट में संदर्भित किया गया है।
यह अध्ययन दक्षिण हरियाणा के पलवल जिले में घरों के अंदर मौजूद रेडियोधर्मी गैसों के स्तर और उनके संभावित स्वास्थ्य प्रभावों के आकलन पर आधारित है।
सर्दियों में बढ़ जाता है रेडॉन और थोरॉन गैस का स्तर
शोध के अनुसार पलवल और गुरुग्राम जिलों में घरों के अंदर रेडियोधर्मी गैसों के स्तर पर मौसम और निर्माण सामग्री का भी प्रभाव पड़ता है।
अध्ययन में सामने आया कि सर्दियों के मौसम में रेडॉन और थोरॉन गैस का स्तर सबसे अधिक होता है। इसका मुख्य कारण यह है कि सर्दियों में घरों की खिड़कियां और दरवाजे लंबे समय तक बंद रहते हैं, जिससे वेंटिलेशन कम हो जाता है और गैसें घर के अंदर जमा होने लगती हैं।
पलवल में थोरॉन गैस का स्तर विश्व औसत से 3.5 गुना अधिक
डॉ. कृष्णकांत के शोध के अनुसार पलवल जिले के घरों में थोरॉन गैस का औसत स्तर World Health Organization के वैश्विक औसत से लगभग साढ़े तीन गुना अधिक पाया गया।
गुरुग्राम में किए गए अध्ययन में यह भी सामने आया कि जिन आधुनिक घरों में मार्बल फ्लोरिंग और दीवारों पर टाइल्स का अधिक उपयोग होता है, वहां रेडॉन गैस का स्तर अपेक्षाकृत ज्यादा पाया गया।
वहीं जिन घरों में मिट्टी की दीवारें या कच्चा फर्श था, वहां थोरॉन गैस का उत्सर्जन अधिक देखा गया, क्योंकि यह गैस सीधे जमीन से निकलती है।
स्वास्थ्य के लिए कितना खतरनाक है रेडॉन गैस
वैज्ञानिकों के अनुसार:
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धूम्रपान के बाद फेफड़ों के कैंसर का दूसरा सबसे बड़ा कारण रेडॉन गैस है
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यह गैस रंगहीन और गंधहीन होती है
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लंबे समय तक संपर्क में रहने से फेफड़ों को गंभीर नुकसान हो सकता है
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सांस के साथ शरीर में प्रवेश कर यह धीरे-धीरे स्वास्थ्य को प्रभावित करती है
क्या है रेडॉन गैस
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प्राकृतिक और रेडियोधर्मी गैस
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रंगहीन और गंधहीन, इसलिए आसानी से पहचान में नहीं आती
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मिट्टी, पत्थर और निर्माण सामग्री से निकलकर घरों में जमा हो जाती है
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लंबे समय तक संपर्क से फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकती है
शोध में प्रमुख खुलासे
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पलवल में थोरॉन गैस का स्तर विश्व औसत से 3.5 गुना ज्यादा
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सर्दियों में वेंटिलेशन कम होने से गैस का स्तर बढ़ता है
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मार्बल और टाइल्स वाले आधुनिक घरों में रेडॉन गैस का स्तर अधिक
बचाव के आसान उपाय
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घरों में पर्याप्त वेंटिलेशन रखें
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खिड़कियां और दरवाजे नियमित रूप से खोलें
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फर्श और दीवारों की दरारों की समय-समय पर मरम्मत कराएं
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घर बनाते समय सुरक्षित और प्रमाणित निर्माण सामग्री का उपयोग करें
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