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Modern Weddings: भव्यता की चकाचौंध में खोती आत्मीयता

Byadmin

Feb 22, 2026
Modern Weddings

Modern Weddings और भारतीय विवाह परंपरा

भारतीय समाज में विवाह केवल दो व्यक्तियों का संबंध नहीं, बल्कि दो परिवारों, दो संस्कृतियों और अनेक भावनाओं का संगम माना जाता है। यह एक ऐसा पवित्र संस्कार है जिसमें प्रेम, विश्वास, परंपरा और सामूहिकता की गहरी छाप होती है।
लेकिन बदलते समय के साथ Modern Weddings की अवधारणा तेजी से बदली है। आज विवाह संस्कार से अधिक स्टेटस और प्रदर्शन का माध्यम बनते जा रहे हैं।


पहले की शादियां बनाम Modern Weddings

एक समय था जब विवाह समारोह सादगी, आत्मीयता और पारिवारिक सहयोग का उत्सव होते थे।
वहीं आज की Modern Weddings पूरी तरह अलग स्वरूप ले चुकी हैं।

पहले की शादियों की विशेषताएं:

  • सीमित और परिचित अतिथि

  • रिश्तेदारों का कई दिन पहले पहुंचना

  • घर के आंगन में सामूहिक तैयारी

  • मंगलगीत और पारंपरिक रस्में

  • पंगत में बैठकर सादा भोजन

  • मेजबान का व्यक्तिगत संवाद

उस दौर में विवाह सामूहिक जिम्मेदारी माना जाता था। हर रस्म में अपनत्व और भावनात्मक जुड़ाव स्पष्ट दिखाई देता था।


Modern Weddings: आयोजन या प्रदर्शन?

आज की Modern Indian Weddings में भव्यता केंद्र में आ गई है।

Modern Weddings के प्रमुख संकेत:

  • हजारों मेहमानों को निमंत्रण

  • महंगे बैंक्वेट हॉल और डेस्टिनेशन वेडिंग

  • थीम-बेस्ड सजावट और विदेशी फूल

  • डीजे, लाइटिंग और मंचीय कार्यक्रम

  • दर्जनों व्यंजनों वाली कैटरिंग

अब विवाह की सफलता भावनाओं से नहीं, बल्कि खर्च, सजावट और सोशल मीडिया रील्स से मापी जाने लगी है। Pre-Wedding Shoot और online showcase ने इस trend को और बढ़ा दिया है।


Modern Weddings में आत्मीयता क्यों घट रही है?Modern Weddings

भव्यता की चकाचौंध में Modern Weddings का सबसे बड़ा नुकसान आत्मीय संवाद को हो रहा है।

  • मेजबान आयोजन और प्रबंधन में व्यस्त

  • मेहमान औपचारिक उपस्थिति दर्ज कर लौट जाते हैं

  • रिश्तेदारों का ठहराव सीमित

  • पारंपरिक रस्में केवल प्रतीकात्मक रह गई हैं

जहां पहले हर अतिथि से बैठकर बातचीत होती थी, वहीं आज रिश्ते औपचारिकता तक सिमटते जा रहे हैं।


Modern Weddings का सामाजिक और आर्थिक दबाव

Modern Weddings की बढ़ती फिजूलखर्ची समाज के हर वर्ग को प्रभावित कर रही है।

इसके नकारात्मक प्रभाव:

  • सामाजिक दबाव में अनावश्यक खर्च

  • कर्ज लेकर भव्य शादी

  • प्रतिष्ठा और तुलना की होड़

  • मध्यम और निम्न वर्ग पर आर्थिक बोझ

कई परिवार केवल “लोग क्या कहेंगे” की सोच में अपनी क्षमता से अधिक खर्च कर देते हैं, जिससे मानसिक तनाव और आर्थिक असंतुलन पैदा होता है।


क्या Modern Weddings की यही सफलता है?

यह विचारणीय प्रश्न है कि क्या Modern Weddings की सफलता सजावट, भीड़ और व्यंजनों की संख्या से तय होनी चाहिए?

विवाह का वास्तविक सौंदर्य इनमें है:

  • आत्मीय सत्कार

  • पारिवारिक सहयोग

  • सादगी और गरिमा

  • परंपराओं का सम्मान

  • भावनात्मक जुड़ाव

यदि ये तत्व मौजूद हैं, तो विवाह वास्तव में सफल और स्मरणीय बनता है।


Modern Weddings में संतुलन की आवश्यकता

Modern Weddings को पूरी तरह नकारना समाधान नहीं है, लेकिन संतुलन बेहद जरूरी है।

बेहतर विकल्प:

  • सीमित और आत्मीय अतिथि सूची

  • परंपराओं को प्राथमिकता

  • अनावश्यक खर्च से बचाव

  • सादगीपूर्ण आयोजन

  • विवाह को सामाजिक उत्सव बनाना

जब Modern Weddings में भावनाओं और परंपराओं को जगह दी जाती है, तो वे अधिक सार्थक बनती हैं।


निष्कर्ष: Modern Weddings – संस्कार या प्रदर्शन?

विवाह उत्सव है, प्रतिस्पर्धा नहीं।
संस्कार है, प्रदर्शन नहीं।

Modern Weddings यदि केवल दिखावे तक सीमित रह जाएं, तो आत्मीयता खो जाती है। लेकिन यदि आधुनिकता के साथ सादगी और भावनात्मक जुड़ाव को जोड़ा जाए, तो विवाह अपने वास्तविक अर्थ में पावन और यादगार बन सकता है।

आज आवश्यकता है कि हम Modern Weddings की दिशा पर पुनर्विचार करें और विवाह की मूल भावना को फिर से स्थापित करें।

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