Mamta Kulkarni
पूर्व अभिनेत्री ममता कुलकर्णी के आध्यात्मिक खुलासे
पूर्व अभिनेत्री से साध्वी बनीं ममता कुलकर्णी (Mamta Kulkarni) ने एक बार फिर अपने आध्यात्मिक बयानों के कारण सुर्खियाँ बटोरी हैं। उन्होंने अमित प्रजापति द्वारा निर्देशित फिल्म ‘गोदान’ (Godan) का समर्थन किया और न सिर्फ फिल्म की तारीफ की, बल्कि अपने आध्यात्मिक अनुभवों के बारे में बड़ा दावा किया।
ममता के अनुसार, 25 वर्षों की कठिन साधना, ध्यान और तपस्या के बाद वे समाधि की अवस्था तक पहुँच चुकी हैं। इसी दौरान उन्होंने भगवान विष्णु के दसवें अवतार ‘कल्कि’ (Kalki) के दर्शन का अनुभव किया, जो उनके अनुसार आने वाले समय के संकेत भी देते हैं।
भविष्य की चेतावनी: मानवता संकट में
ममता कुलकर्णी ने चेतावनी दी कि मानवता एक बड़े संकट की ओर बढ़ रही है। उनका कहना है कि भविष्य में गाय दूध देना बंद कर देंगी, जो प्रकृति और समाज के असंतुलन का स्पष्ट संकेत है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि अभी भी समय है। समाज को जागना होगा और अपने कर्मों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
फिल्म ‘गोदान’: केवल मनोरंजन नहीं, संदेश भी है
ममता ने बताया कि फिल्म ‘गोदान’ सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह समाज को आईना दिखाने वाली फिल्म है। फिल्म में गाय के वैज्ञानिक, सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व को प्रभावशाली ढंग से दर्शाया गया है।
उन्होंने यह स्पष्ट किया कि इस फिल्म को किसी एक धर्म से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। इसे हर धर्म और हर वर्ग के लोगों को देखना चाहिए।
गाय का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
ममता कुलकर्णी का कहना है कि गाय का उल्लेख केवल वेदों और पुराणों तक सीमित नहीं है। बाइबिल और कुरान जैसे अन्य धार्मिक ग्रंथों में भी गाय का जिक्र मिलता है। उनका मानना है कि किसी भी धर्म में गाय की हत्या सही नहीं ठहराई जाती, बल्कि सभी धर्म करुणा और सह-अस्तित्व का संदेश देते हैं।
उन्होंने भगवद्गीता का हवाला देते हुए कहा कि आज विश्व में जो हिंसा, युद्ध और अशांति दिखाई दे रही है, वह मानव के अपने कर्मों का परिणाम है।
ममता कुलकर्णी के बयानों का सामाजिक और फिल्म पर प्रभाव
ममता कुलकर्णी के ये बयानों ने आध्यात्मिक बहस को जोर दिया है और साथ ही फिल्म ‘गोदान’ पर चर्चा तेज़ कर दी है। उनके अनुसार यह फिल्म केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि चेतावनी और आत्ममंथन का माध्यम है, जिसे नजरअंदाज करना भविष्य के लिए खतरनाक हो सकता है।
