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Indo-china : 52 महीने बाद चीन के होश आए ठिकाने, अब एलएसी से हटाएगा सेना, भारत भी राजी

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  • ब्रिक्स समिट से पहले भारत को बड़ी सफलता
  • एलएसी पर पेट्रोलिंग को लेकर चीन से बनी बात
  • यह समझौता देपसांग और डेमचोक क्षेत्रों में पेट्रोलिंग व्यवस्था से संबंधित
  • विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि एलएसी पर सफलता एक अच्छी घटना है, जो धैर्य और दृढ़ कूटनीति के कारण हुई
  • आज 16 वें ब्रिक्स सम्मेलन में भाग लेने रूस के कजान करवाना होंगे पीएम मोदी
  • कजान में प्रधानमंत्री मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात संभव
  • नेताओं से उम्मीद की जा रही है कि वे कजान घोषणा को अपनाएंगे, जो ब्रिक्स के लिए आगे का मार्ग प्रशस्त करेगा

 

Indo-china : नई दिल्ली। ब्रिक्स समिट के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रूस रवाना होने से पहले भारत को बड़ी सफलता मिली है। भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर 52 महीनों से जारी गतिरोध के हल का अब रास्ता साफ होता दिख रहा है। पीएम मोदी रूस के कजान शहर में होने वाली 16 वीं ब्रिक्स (ब्राजील-रूस-भारत-चीन-दक्षिण अफ्रीका) समिट में शामिल होने के लिए मंगलवार को रवाना होने वाले हैं। पीएम मोदी की इस रूस यात्रा से पहले विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके बताया कि भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी एलएसी पर पेट्रोलिंग को समझौता हुआ है। इस समझौते के बाद एलएसी से सैनिकों की वापसी और फिर इस मुद्दे के समाधान का रास्ता साफ हो सकेगा। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने इस फैसले की घोषणा करते हुए कहा कि 2020 में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर हुई घटनाओं के बाद से हम चीनी पक्ष के साथ सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर लगातार संपर्क में थे। डब्ल्यूएमसीसी और सैन्य कमांडर स्तर पर दोनों देशों के बीच कई दौर की बातचीत हुई है। उन्होंने कहा कि वार्ता की इन कवायदों के कारण कई मोर्चों पर टकराव और तनाव मिटाने में कामयाबी मिली है। फिर भी असहमति के कुछ बिंदु बाकी थे। विदेश सचिव के मुताबिक पिछले कुछ हफ्तों में हुई वार्ताओं के बाद भारत-चीन सीमा क्षेत्र में सैन्य गश्त की व्यवस्था को लेकर सहमति बन गई है। इसके चलते सैन्य आमने-सामने की स्थिति अब सुलझ गई है।

 

चार बफर पॉइंट पर भी पेट्रोलिंग होगी शुरू

 

एलएसी विवाद पर भारत और चीन के बीच हुए समझौते के तहत अब देपसांग और डेमचॉक पर भारतीय सैनिक एक बार फिर से पेट्रोलिंग कर सकेंगे। इसके अलावा बाकी चार बफर पॉइंट पर भी पेट्रोलिंग शुरू होगी। यहां सबसे पहले पैंगोग के फिंगर एरिया और गलवान के पीपी-14 से डिसइंगेजमेंट हुआ। इसके बाद गोगरा में पीपी-17 से चीनी सैनिक हटे और फिर हॉट स्िप्रंग एरिया में पीपी-15 से सैनिकों की वापसी हुई। अभी तक ये बफर जोन बने हुए थे, जिनमें न तो भारत के सैनिक पेट्रोलिंग कर रहे थे न ही चीन के सैनिक। हालांकि, अब इन पेट्रोलिंग पॉइंट्स पर भी फिर से पेट्रोलिंग शुरू करने को लेकर दोनों देशों के बीच सहमति बन गई है।

 

चीन को मिला उसी की भाषा में जवाब

 

भारत-चीन सीमा तनाव पर समझौते की यह खबर ऐसे समय आई है जब इस हफ्ते रूस के कजान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक साथ होंगे। दोनों नेताओं की बीच मुलाकात की अटकलें भी लगाई जा रही थीं। विदेश सचिव ने ब्रिक्स शिखर बैठक के हाशिए पर पीएम मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात की पुष्टि तो नहीं की लेकिन इस संभावना को खारिज भी नहीं किया। सैन्य टकराव और तनाव के कारण गश्त कहां तक हो? इसको लेकर ही दोनों पक्षों के बीच गहरे मतभेद थे। लगातार भारत की जमीन पर अपना कब्जा बढ़ाने की जुगत में लगे चीन की नीयत को लेकर भी सवाल थे। ऐसे में भारत ने सैन्य पैंतरों का उसी भाषा में जवाब देने के साथ ही चीन को समझौते की मेज पर रजामंदी की दस्तखत करने की नौबत तक ला ही दिया।

आज शाम को राष्ट्राध्यक्षों का रात्रि भोज

विदेश सचिव ने बताया कि इस सम्मेलन का विषय वैश्विक विकास और सुरक्षा के लिए बहुपक्षवाद को मजबूत करना है। भारत ब्रिक्स में अहम स्थान रखता है और उसके योगदान ने आर्थिक और सतत विकास, वैश्विक शासन सुधार जैसे क्षेत्रों में ब्रिक्स के प्रयासों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पिछले साल जोहान्सबर्ग में ब्रिक्स के विस्तार के बाद यह पहला शिखर सम्मेलन होगा। उन्होंने बताया कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में संस्थापक सदस्यों के साथ-साथ नए सदस्य भी शामिल होंगे। शिखर सम्मेलन 22 अक्तूबर से शुरू होगा और पहले दिन की शाम को केवल नेताओं के लिए रात्रिभोज होगा। सम्मेलन का मुख्य दिन 23 अक्तूबर है। दो मुख्य सत्र होंगे। मिस्त्री ने कहा कि नेताओं से उम्मीद की जा रही है कि वे कजान घोषणा को अपनाएंगे, जो ब्रिक्स के लिए आगे का मार्ग प्रशस्त करेगा। शिखर सम्मेलन 24 अक्तूबर को समाप्त होगा। लेकिन प्रधानमंत्री 23 अक्तूबर को नई दिल्ली लौटेंगे। शिखर सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री की कुछ द्विपक्षीय बैठकें भी हो सकती हैं।

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