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- हाईकोर्ट ने केंद्र व राज्य सरकार और सीबीआई को दिया नोटिस, अगले साल 12 जनवरी को सुनवाई
- शिकायतकर्ता के आरोप, नेताओं, पटवारियों, कानूनगो और अधिकारियों की भी मिलीभगत
- 1935 में मौत के बाद वारिशों के नाम दर्ज हुई पाक के पहले पीएम लियाकत अली खान की पारिवारिक प्रॉपर्टी
- पहले यूपी का रहा गांव डबकौली खुद अब हरियाणा में करनाल जिले का हिस्सा
हरियाणा के करनाल में पाकिस्तान के पूर्व एवं पहले प्रधानमंत्री नवाबजादा लियाकत अली खान की चार हजार की प्रॉपर्टी है। आपको यह सुनने व पढ़ने में भले ही अटपटा लगे, परंतु है सोलहा आन्ने सच। आरोप है कि फर्जी वारिशों ने नेताओं व पटवारी, कानूनगो और अधिकारियों के साथ मिलकर इसे खुद-बुर्द कर दिया। जिसके लिए हाईकोर्ट से मामले की जांच सीबीआई से करवाने की मांग की थी। अब इस मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने केंद्र व राज्य सरकार और सीबीआई को नोटिस जारी किया है। मामले पर अगली सुनवाई अगले साल 12 जनवरी को होगी। अभी करनाल जिले का गांव डबकौली खुर्द पहले यूपी का हिस्सा होता था। 1935 में लिकायत अली खान की मौत के बाद यह प्रॉपर्टी वारिशों के नाम दर्ज हो गई थी। जो बंटवारे के समय ही देश छोड़कर पाकिस्तान चले गए थे। हाईकोर्ट के दखल से अब याचिकाकर्ता को मामले में न्याय की उम्मीद दिखाई देने लगी है।
जिन्ना के करीबी थे लियाकत अली खान, अंग्रेजों ने दी थी उपाधि
लिकायत अली का जन्म गांव डबकौली गांव में मुस्लिम जमींदार नवाब रूकनुद्दौला के घर हुआ। रुकनुद्दौला गांव के बड़े जमीदार थे और अंग्रेजी हुकुमत ने उन्हें यह उपाधि दी थी। लिकायत अली की प्रारंभिक शिक्षा भारत में हुई और उच्च शिक्षा के लिए इंग्लैंड चले गए। जहां ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई पूरी की। इसी परिवार के जमीदार उमरदराज की 1935 में मृत्यु के बाद उनकी 1200 एकड़ जमीन उनके पांच बेटों नवाबजादा शमशाद अली खां, इरशाद अली खां, एजाज अली खां, मुमताज अली खां और इम्तियाज अली खां के नाम हुआ। उनकी बेटी जहांगीर बेगम का विवाह 1918 में नवाबजादा लियाकत अली खान से हुआ। परिवार के पास गांव की जमीन के अलावा करनाल शहर में कई दुकानें व आवासीय संपत्ति हैं। जिसकी कीमत करीब चार हजार करोड़ रुपये बताई जाती है।
ऐसे हुआ खुलासा
बताया जाता है कि गांव डबकौली के ग्रामीणों ने 4 मई 2022 को प्रदेश के तत्कालीन गृहमंत्री को शिकायत दी। ग्रामीण सोनू, धनप्रकाश, वेदप्रकाश, विष्णु, लखमीर, सतपाल सरपंच, विक्रम ने गृहमंत्री को दी अपनी शिकायत में बताया कि 1935 में उम्रदराज अली खान की मौत के बाद जमीन उनके पांच पुत्रों के नाम दर्ज हो गई। जिस पर वह लंबे समय से खेती करते आ रहे हैं। जिस पर कुछ लोग कब्जा करना चाहते हैं तथा कई बार शिकायतों के बावजूद राजनीतिक संरक्षण व अधिकारियों की मिलीभगत से कार्रवाई नहीं हो रही। जिसके बाद ग्रामीणों ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका लगाई। जिसमें केंद्र व राज्य सरकार के अलावा सीबीआई डायरेक्टर, एसपी करनाल, एसएचओ इंद्री को पक्ष बनाया। सोनू एंड अदर्स बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एंड अदर्स टाइटल से इस केस की सुनवाई 12 सितंबर को हुई। जिसके बाद कोर्ट ने केंद्र व राज्य सरकार के साथ सीबीआई को नोटिस भेजकर 12 जनवरी 2026 को मामले की अगली सुनवाई निर्धारित की। यमुना नंदी के पानी में बहने से गांव डबकौली खुर्द उजड़ने के बाद यूपी में चला गया था। परिवार के पाकिस्तान जाने से प्रॉपर्टी को सरकार ने अपने अधीन ले लिया। जनरल कस्टोउियन ऑफ इंडिया ने 1962 में इसे कस्टोडियन के अधीन करने का फैसला दिया।
90 के दशक में शुरू हुआ जमीन हड़पने का खेल
याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि 1990 के दशक में झूठी वसीयत और फर्जी वारिश बनकर जमीन को हड़पने का खेल शुरू हुआ और करीब 1200 एकड़ जमीन पर कब्जा कर लिया। ग्रामीणों का आरोप है कि इस खेल में पटवारियों, कानूनगो, चकबंदी अधिकारियों, राजस्व विभाग के बड़े अधिकारियों, सरकारी वकीलों और कुछ राजनीतिक लोगों की मिलीभगत रही। करीब 200 ग्रामीणों ने 2005 में हरियाणा के मुख्यमंत्री को शिकायत दी। इंद्री थाने में एफआईआर नंबर 291 में धारा 420, 465, 467, 468, 471 और 120-बी
के तहत केस भी दर्ज हुआ। परंतु जांच रिर्पो कभी बाहर नहीं निकली। भूमाफियों ने 2007-08 में फिर जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की, परंतु ग्रामीणों के विरोध से सफल नहीं हुए। 2009-10 में ग्रामीणों ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। 2011-12 में आरोपियों जांच अधिकारियों के सहयोग से करोड़ों की जमीन देकर पांच गवाहों को अपने पक्ष में कर लिया। 2012-13 में भूमाफियाओं ने हाईकोर्ट में केस को रद्द कराने की याचिका डाली, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। 2018 में आई ने शिकायत मिलने से ही इंकार कर दिया।
सतपाल सरपंच ने यह बताया
गांव के सरपंच सतपाल ने बताया कि एफआईआर 291/2005 को कमजोर करना चाहा, ताकि करनाल शहर में उम्रदराज की करीब 800 करोड़ की संपत्ति 100 दुकानें व रिहायशी जमीन को हड़पा जा सके। कुंजपुरा सैनिक स्कूल के पास की 50 दुकानें व देश में उनकी अन्य प्रॉपर्टी पर भी भूमाफियों की नजर है। ग्रामीणों का आरोप है कि जमशेद अली खां, खुर्शीद अली खां, इमित्याज बेगम, मुमताज बेगम और एजाज अली खान के फर्जी वारिसों ने 1813 बीघा 11 बिसवा जमीन की रजिस्ट्री करवा दी।


