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IDFC First Bank Fraud Case India : हरियाणा सरकार ने CBI जांच के लिए मुहर लगाई

Byadmin

Mar 31, 2026
IDFC First Bank Fraud Case India

चंडीगढ़ से आई बड़ी खबर में सामने आया है कि हरियाणा सरकार ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक फ्रॉड (IDFC First Bank fraud case India) मामले की गंभीरता को देखते हुए सीबीआई से जांच कराने का निर्णय ले लिया है। इस फ्रॉड में लगभग ₹590 करोड़ की धनराशि सरकारी खातों से गड़बड़ी का शिकार हुई, जिसके बाद सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को पत्र लिखा है।

यह मामला केवल एक बैंक तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे जुड़े कई सरकारी विभागों के करोड़ों रुपये शामिल हैं। प्रारंभिक जांच के अनुसार, रकम का गलत उपयोग होने और खातों में भारी लेखा अंतर पाया गया है।

घोटाले का प्रारंभिक खुलासा और 590 करोड़ का मामला

हरियाणा सरकार के 18 विभागों ने IDFC First Bank में फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) निवेश के लिए पैसा जमा कराया था, लेकिन जब खातों को बंद करने और राशि ट्रांसफर करने का अनुरोध किया गया, तो वास्तविक बैलेंस और दर्ज राशि के बीच बड़ा अंतर देखा गया। इसके बाद जांच में पता चला कि कई खातों में बैलेंस में अंतर और गड़बड़ी है।

बैंक की तरफ से किए गए खुलासे में यह भी बताया गया कि मामले में चार बैंक कर्मचारियों को निलंबित किया गया है और बैंक ने इस धोखाधड़ी की सूचना बैंकिंग नियंत्रक तथा पुलिस तक पहुंचाई है।

एजीसीबी और ईडी की कार्रवाई

घोटाले के बाद हरियाणा सरकार ने मामला एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) को सौंपा। एसीबी ने बैंक कर्मियों, ज्वैलर्स और सरकारी वित्त अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की, और कई गिरफ्तारियां भी हुईं। वहीं प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 19 स्थानों पर छापेमारी की है, जिसमें दस्तावेजों की जब्ती और खातों की जांच शामिल है।

ये छापेमारी न सिर्फ हरियाणा बल्कि चंडीगढ़, मोहाली, पंचकुला, गुरुग्राम और बैंगलोर में भी की गईं, जिससे पता चलता है कि यह फ्रॉड केवल एक शाखा तक सीमित नहीं रहा।

केंद्रीय एजेंसियों को लिखे गए पत्र और CBI जांच

हरियाणा सरकार ने सीबीआई जांच के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय को पत्र लिखा है ताकि इस घोटाले की गहराई से जांच हो सके। इस कदम के बाद सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वह कोई भी काला धन और भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं करेगी
फ़िलहाल जांच एसीबी कर रहा था, लेकिन अब इसे सीबीआई जांच के दायरे में ले जाने की तैयारी है।

मुख्य आरोपियों और अन्य बैंक शामिल

जांच में पता चला कि कुछ वरिष्ठ आईएएस अफसरों की भूमिका संदिग्ध है और उनके संपर्कों को भी एजेंसियों ने स्कैन किया है। शुरुआती गिरफ्तारियों में शामिल हैं बैंक मैनेजर “रिभव ऋषि”, रिलेशनशिप मैनेजर “अभय”, अभय की पत्नी स्वाति सिंगला और उनके साले अभिषेक। इन पर आरोप है कि उन्होंने सरकारी धन को निजी उपयोग और **शेल कंपनी के माध्यम से अलग खाते में स्थानांतरित किया।”

घोटाले में केवल IDFC First Bank ही नहीं, बल्कि एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक के साथ भी कई गड़बड़ियां सामने आई हैं। सरकार ने दोनों बैंकों को भी सरकारी एफडी निवेश के लिए आतंरिक जांच के दायरे में लिया है।

सरकार की सख्त प्रतिक्रिया और वापस किए गए पैसे

जांच के दौरान बैंक और आरोपी पक्षों के बीच हुए विवाद के बावजूद, सरकार को पूरे ₹590 करोड़ वापस कर दिए गए हैं। हालांकि सरकार अब इस पूरे मामले में बेहद सावधानी से कदम उठा रही है और हर स्तर पर जांच की मांग कर रही है।

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