High Court
- आरोप प्रथम दृष्टया विचारणीय हैं और उनका फैसला साक्ष्यों के आधार पर किया जाना आवश्यक : हाई कोर्ट
- पूर्व मंत्री करण सिंह दलाल बोले सांप्रदायिक नारों और धार्मिक अपीलों से हारी चुनाव की बाजी, चुनाव रद करने की मांग की
चंडीगढ़। हरियाणा की पलवल विधानसभा सीट से जुड़े चुनाव विवाद में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तहत पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने मुख्य विवाद बिंदु तय कर दिया है। यह याचिका वर्तमान राज्य मंत्री गौरव गौतम के चुनाव को चुनौती देते हुए दाखिल की गई है, जिसमें उन पर जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 123(3) के तहत भ्रष्ट आचरण का आरोप लगाया गया है।
पूर्व मंत्री करण सिंह दलाल द्वारा दायर चुनाव याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने यह प्रश्न तय किया है कि क्या वर्तमान राज्य मंत्री गौरव गौतम ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 123(3) का उल्लंघन करते हुए धर्म के नाम पर वोट मांगकर भ्रष्ट आचरण किया है ।
मामले की सुनवाई कर रहीं जस्टिस अर्चना पुरी ने स्पष्ट किया कि अब मुकदमे का निपटारा इसी केंद्रीय प्रश्न के इर्द-गिर्द होगा, क्योंकि याचिका में लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया विचारणीय हैं और उनका फैसला साक्ष्यों के आधार पर किया जाना आवश्यक है ।
इससे पहले गौतम की ओर से सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश सात नियम 11 के तहत चुनाव याचिका को प्रारंभिक स्तर पर खारिज करने की मांग की गई थी। हाई कोर्ट ने 28 नवंबर 2025 को दिए गए विस्तृत आदेश में उस अर्जी को खारिज करते हुए कहा था कि याचिका में ऐसे तथ्य और आधार मौजूद हैं, जिन पर पूर्ण सुनवाई जरूरी है ।
याचिकाकर्ता करण सिंह दलाल की ओर से हरियाणा के पूर्व एडवोकेट जनरल और भारत सरकार के पूर्व अतिरिक्त सालिसिटर जनरल मोहन जैन ने अदालत को बताया कि गवाहों की सूची पहले ही रिकार्ड पर दाखिल की जा चुकी है।
सूची के साथ पर्याप्त और ठोस साक्ष्य संलग्न हैं, जो यह सिद्ध करते हैं कि मंत्री गौरव गौतम ने वास्तव में धर्म के नाम पर वोट मांगे। उन्होंने बताया कि कई धार्मिक आयोजनों में प्रत्याशी ने स्वयं मंच साझा कर मतदाताओं से वोट मांगे और इंटरनेट मीडिया पर भी इससे जुड़े वीडियो एवं फोटोग्राफ़ साझा किए गए। याचिका में इन सभी वीडियो को प्रमाण के रूप में पेश किया गया है और पेन ड्राइव में हाई कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि राज्य मंत्री गौरव गौतम ने चुनाव प्रचार के दौरान धार्मिक आयोजनों में देवताओं की मूर्तियों के समक्ष ईश्वर का आह्वान करते हुए मतदाताओं से समर्थन मांगा। याचिकाकर्ता का कहना है कि यह आचरण सीधे तौर पर जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 123 (3) के तहत निषिद्ध भ्रष्ट आचरण की श्रेणी में आता है। याचिका में आरोप लगाया है कि गौतम ने चुनाव प्रचार के दौरान धर्म और सांप्रदायिक भावनाओं का सहारा लिया, जिससे उन्हें चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता के साक्ष्य दर्ज करने के 20 जनवरी की तारीख तय कर दी है ।

