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बड़ी उम्र में गर्भधारण से बढ़ रहा Heart Attack During Pregnancy का खतरा, महिलाओं के लिए गंभीर चेतावनी

Byadmin

Jan 27, 2026

र्भावस्था को लंबे समय तक महिलाओं के अच्छे स्वास्थ्य, खासकर हृदय स्वास्थ्य (Heart Health) का प्रतीक माना जाता रहा है। आम धारणा यही रही है कि गर्भवती महिलाएं अपेक्षाकृत युवा, सक्रिय और गंभीर बीमारियों से दूर होती हैं।
लेकिन हाल के वर्षों में यह तस्वीर तेजी से बदल रही है। अब गर्भावस्था के दौरान हार्ट अटैक (Heart Attack During Pregnancy) के मामले पहले की तुलना में बढ़ते जा रहे हैं, जो न सिर्फ मां बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु के लिए भी बड़ा खतरा बन सकते हैं।


🔍 क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, गर्भावस्था से जुड़े हार्ट अटैक के मामलों में बढ़ोतरी का सबसे बड़ा कारण मातृत्व की बढ़ती उम्र और बदलती जीवनशैली है।
आज की महिलाएं करियर, शिक्षा और सामाजिक कारणों से पहले की तुलना में देर से गर्भधारण कर रही हैं।

👉 35 वर्ष या उससे अधिक उम्र में गर्भावस्था के दौरान हृदय संबंधी जटिलताओं का खतरा काफी बढ़ जाता है।
इसके साथ ही डायबिटीज, मोटापा और हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियां भी अब कम उम्र में ही आम हो चुकी हैं, जो गर्भावस्था के दौरान दिल पर अतिरिक्त दबाव डालती हैं।


⚖️ हार्मोनल और शारीरिक बदलाव क्यों बनते हैं खतरा?

गर्भावस्था के दौरान महिला के शरीर में बड़े पैमाने पर बदलाव होते हैं:

  • शरीर में रक्त की मात्रा 30–50% तक बढ़ जाती है

  • दिल को सामान्य से कहीं ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है

  • हार्मोनल बदलाव हृदय की धमनियों को कमजोर कर सकते हैं

कुछ मामलों में यह स्थिति Spontaneous Coronary Artery Dissection (SCAD) जैसी गंभीर समस्या को जन्म देती है, जो गर्भावस्था से जुड़ा हार्ट अटैक का एक प्रमुख कारण है।

सबसे बड़ी समस्या यह है कि इसके लक्षण कई बार सामान्य गर्भावस्था की परेशानियों जैसे लगते हैं, जिससे समय पर पहचान नहीं हो पाती।


📊 आंकड़े क्या बताते हैं?

  • भारत में 1–4% गर्भावस्थाओं में हृदय रोग जटिलता के रूप में सामने आते हैं

  • लगभग 1 लाख डिलीवरी में 3 मामलों में तीव्र हार्ट अटैक देखा जाता है

  • वर्ष 2023 में प्रति 1 लाख जीवित जन्म पर 88 मातृ मृत्यु दर्ज की गईं

👉 आंकड़े बताते हैं कि जोखिम भले ही कम हो, लेकिन इसे नजरअंदाज करना घातक हो सकता है।


🚨 गर्भावस्था में हार्ट अटैक के मुख्य कारण

1️⃣ मातृत्व की बढ़ती उम्र

35 वर्ष या उससे अधिक उम्र में गर्भधारण करने से हाई बीपी, डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।

2️⃣ डायबिटीज और मोटापा

गर्भकालीन डायबिटीज और मोटापा धमनियों में सूजन और ब्लॉकेज की संभावना को बढ़ाते हैं।

3️⃣ बदलती जीवनशैली

कम शारीरिक गतिविधि, तनाव, अनियमित खान-पान, धूम्रपान या पैसिव स्मोकिंग हृदय रोगों के खतरे को बढ़ाते हैं।

4️⃣ हार्मोनल व शारीरिक बदलाव

रक्त की बढ़ी हुई मात्रा और हार्मोनल असंतुलन दिल पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं।

5️⃣ पहले से मौजूद हृदय रोग

जिन महिलाओं को पहले से हृदय से जुड़ी समस्या होती है, उनमें गर्भावस्था के दौरान खतरा और बढ़ जाता है।


⚠️ लक्षण पहचानना क्यों है जरूरी?

गर्भावस्था में हार्ट अटैक के लक्षण अक्सर नजरअंदाज हो जाते हैं:

  • सीने में दर्द या भारीपन

  • सांस फूलना

  • अत्यधिक थकान

  • मतली, उल्टी या चक्कर

👉 इन लक्षणों को सामान्य प्रेग्नेंसी की समस्या समझकर टालना जानलेवा हो सकता है।


✅ क्या करें? (महत्वपूर्ण सावधानियां)

  • गर्भधारण से पहले हृदय स्वास्थ्य की जांच जरूर कराएं

  • हाई-रिस्क महिलाओं की नियमित कार्डियक मॉनिटरिंग

  • किसी भी असामान्य लक्षण को हल्के में न लें

  • डॉक्टरों और गर्भवती महिलाओं दोनों में जागरूकता बढ़ाना जरूरी


📝 निष्कर्ष

गर्भावस्था में हार्ट अटैक के बढ़ते मामले बदलती जीवनशैली, मातृत्व की बढ़ती उम्र और मेटाबॉलिक बीमारियों का स्पष्ट संकेत हैं।
हालांकि यह समस्या अब भी दुर्लभ है, लेकिन समय पर पहचान, सही इलाज और जागरूकता से अधिकांश मामलों में मां और शिशु — दोनों की जान बचाई जा सकती है

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